हर्बल ड्रिंक को ‘चाय’ नहीं कहा जा सकता: FSSAI का बड़ा फैसला
By- Usha Rawat
केवल Camellia sinensis से बनी पत्ती ही कहलाएगी असली ‘टी’
नई दिल्ली/गुवाहाटी। देश की खाद्य सुरक्षा संस्था FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल Camellia sinensis पौधे से बनने वाला पेय ही ‘टी/चाय’ कहलाएगा। इसके अलावा जड़ी-बूटियों, फूलों, बीजों या अन्य पौधों से बने पेय को ‘टी’ कहकर बेचना अब मना होगा।
FSSAI ने सभी कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को निर्देश दिया है कि वे हर्बल और प्लांट-आधारित इंफ्यूजन (जैसे लेमनग्रास, हिबिस्कस, रूईबोस आदि) को ‘टी/चाय’ लिखकर न बेचें। ऐसा करना उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा और यह Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत गलत ब्रांडिंग की श्रेणी में आएगा।
“असली चाय” की कानूनी परिभाषा तय
FSSAI ने साफ कहा—
✔ केवल Camellia sinensis से बनी ब्लैक टी, ग्रीन टी, कांगड़ा टी, इंस्टेंट टी आदि ही ‘टी’ कहलाएँगी।
✔ हर्बल या बोटैनिकल पेय अब “Herbal infusion” या “Botanical blend” जैसे नाम से बेचे जाएँगे।
✔ किसी भी तरह से उन्हें ‘हर्बल टी’ या ‘फ्लावर टी’ कहना गलत होगा।
इस फैसले से उन ब्रांड्स पर सीधा असर पड़ेगा जो आज तक ‘हर्बल टी’, ‘डिटॉक्स टी’, ‘फ्लावर टी’ जैसे नाम से उत्पाद बेच रहे थे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
FSSAI के मुताबिक—
👉 बहुत-सी कंपनियाँ ऐसी चीजें भी “टी” नाम से बेच रही थीं जिनका चाय-पत्ती से कोई लेना-देना नहीं।
👉 इससे ग्राहक भ्रमित होते हैं और उन्हें लगता है कि वे स्वास्थ्यप्रद “चाय” पी रहे हैं।
👉 कानून के अनुसार यह मिसब्रांडिंग (गलत नाम से बेचना) है।
असम और दार्जिलिंग के उत्पादकों ने स्वागत किया
असम और दार्जिलिंग जैसे बड़े चाय उत्पादक राज्यों ने इस कदम को सकारात्मक बताया। उनका कहना है कि—
💬 “इससे असली भारतीय चाय की ब्रांड वैल्यू और पहचान सुरक्षित रहेगी। ग्राहकों को भी असली पत्ती मिलेगी।”
भारत में क्यों अहम है यह फैसला?
भारत दुनिया के सबसे बड़े चाय उत्पादक और उपभोक्ता देशों में से एक है।
• असम, दार्जिलिंग, नीलगिरी, कांगड़ा जैसी चाय विश्व प्रसिद्ध हैं।
• भारत में प्रतिवर्ष करोड़ों किलो चाय का उत्पादन होता है।
• बड़ी संख्या में किसान और कामगार इसी उद्योग पर निर्भर हैं।
ऐसे में “हर्बल ड्रिंक” को भी “टी” कहने से असली चाय उद्योग की साख और बाजार दोनों प्रभावित हो रहे थे।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
अब बाज़ार में—
✔ Camellia sinensis से बनी चीजें ही चाय कहलाएँगी
✔ हर्बल ड्रिंक अलग नाम से बिकेंगे
✔ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अपने कई उत्पादों की री-लिस्टिंग करनी पड़ेगी
कानून किसे “टी” मानता है?
Food Safety and Standards (2011) के अनुसार—
टी = Camellia sinensis से बनी पत्तियाँ
यानी
• ब्लैक टी
• ग्रीन टी
• व्हाइट टी
• ऊलॉन्ग टी
• इंस्टेंट टी
इनके अलावा कोई भी “इंफ्यूजन” चाहे वह कितना भी स्वास्थ्यवर्धक क्यों न दावा करे — टी नहीं कहलाएगा।
हर्बल इंफ्यूजन क्या है?
ये किसी पौधे, जड़ी-बूटी, मसाले, फूल या फल को गर्म पानी में उबालकर या डुबोकर बनाया गया पेय होता है, जैसे—
🌿 लेमनग्रास ड्रिंक
🌼 हिबिस्कस इंफ्यूजन
🌿 तुलसी वॉटर
☕ रूईबोस ड्रिंक
ये स्वास्थ्यवर्धक हो सकते हैं, लेकिन इनका चाय-पत्ती से संबंध नहीं।
निष्कर्ष
FSSAI का यह फैसला—
✔ उपभोक्ताओं को सही जानकारी देगा
✔ असली चाय उद्योग की पहचान की रक्षा करेगा
✔ ब्रांड्स की गलत मार्केटिंग पर रोक लगाएगा
संकेत साफ है—
👉 “चाय” वही, जो Camellia sinensis से बने — बाकी सब ‘हर्बल इंफ्यूजन’ हैं।
