मशरूम उत्पादन से आत्मनिर्भरता की राह: द हंस फाउंडेशन की पहल

देहरादून, 10 जनवरी। दिव्यांगजनों एवं स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में द हंस फाउंडेशन ने एक सराहनीय पहल करते हुए सामुदायिक आधारित पुनर्वास (CBR) परियोजना के अंतर्गत तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। यह प्रशिक्षण इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर ट्रेनिंग एंड रिसर्च (IATR), प्रेमनगर, देहरादून में 7 से 10 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें दिव्यांगजन तथा हंस-समावेशित स्वयं सहायता समूहों के सदस्य शामिल रहे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना तथा वैकल्पिक आजीविका साधनों के माध्यम से उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना रहा।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें भूसा उपचार, स्पॉन मिश्रण, बैग भरने की प्रक्रिया, उत्पादन की देखरेख, रोग प्रबंधन एवं विपणन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। इसके साथ ही मूल्य संवर्धन के अंतर्गत मशरूम से चटनी बनाने की विधि भी सिखाई गई, जिससे प्रतिभागी अपने उत्पाद को बेहतर मूल्य पर बाजार में बेचकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।
प्रशिक्षण विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक दोनों प्रकार का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिससे उन्हें उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजित समारोह में द हंस फाउंडेशन के परियोजना प्रबंधक श्री युद्धवीर सिंह, IATR के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित उपाध्याय सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं मशरूम उत्पादन बैग वितरित किए गए तथा प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में द हंस फाउंडेशन के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री दीपक बूधा, रमेश गड़िया, प्रीति भट्ट, सूरज कुमार, सुनील बहुगुणा, तथा IATR की ओर से नवीन नौटियाल, लतिका, रिया सहित अन्य सहयोगी उपस्थित रहे।
