आपदा/दुर्घटना

उत्तराखण्ड की  पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट एनडीएमए को भेजी गयी

 

देहरादून, 13 जनवरी। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) ने वर्ष 2025 के दौरान राज्य में घटित विभिन्न आपदाओं से हुए नुकसान के आकलन हेतु तैयार की गई पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंट (PDNA) रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारत सरकार को प्रेषित कर दी है।

रिपोर्ट में आपदाओं के कारण सामाजिक, अवसंरचना, उत्पादक एवं क्रॉस-कटिंग क्षेत्रों में हुई क्षति, हानि, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण आवश्यकताओं का विस्तृत एवं क्षेत्रवार आकलन प्रस्तुत किया गया है। उल्लेखनीय है कि देश में उत्तराखण्ड पहला राज्य है, जहां पूरे प्रदेश स्तर पर PDNA किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में आपदाओं के कारण कुल ₹15,103.52 करोड़ का समग्र आर्थिक प्रभाव (Total Economic Impact) आंका गया है। इसमें ₹3,792.38 करोड़ की प्रत्यक्ष क्षति (Damages), ₹312.19 करोड़ की हानि (Losses) तथा ₹10,998.95 करोड़ की पुनर्वास, पुनर्निर्माण एवं ‘बिल्ड बैक बेटर’ के तहत आवश्यकता सम्मिलित है।
क्षेत्रवार प्रमुख निष्कर्ष
सामाजिक क्षेत्र (Social Sector):
सामाजिक क्षेत्र में कुल ₹4,966.85 करोड़ का आर्थिक प्रभाव दर्ज किया गया है। इसमें आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में ₹2,579.47 करोड़, जबकि आवास क्षेत्र में ₹2,005.48 करोड़ का आर्थिक प्रभाव आंका गया है।
अवसंरचना क्षेत्र (Infrastructure Sector):
अवसंरचना क्षेत्र में कुल ₹6,225.69 करोड़ का आर्थिक प्रभाव सामने आया है।
इसमें जलापूर्ति क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां ₹4,048.88 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त सड़कों को ₹1,963.29 करोड़ तथा विद्युत क्षेत्र को ₹213.52 करोड़ का प्रभाव पड़ा।
उत्पादक क्षेत्र (Productive Sector):
कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, पर्यटन एवं वानिकी सहित उत्पादक क्षेत्रों में कुल ₹893.94 करोड़ का आर्थिक प्रभाव आंका गया है।
पर्यटन क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित रहा, जहां ₹744.94 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया।

क्रॉस-कटिंग सेक्टर (Cross-Cutting Sector):
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के अंतर्गत भविष्य में आपदाओं के प्रभाव को कम करने हेतु ₹3,017.04 करोड़ की पुनर्निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण आवश्यकता चिन्हित की गई है।

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि यह PDNA रिपोर्ट राज्य की भौगोलिक संवेदनशीलता, पर्वतीय परिस्थितियों तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट का उद्देश्य केवल नुकसान का आकलन करना नहीं, बल्कि एक अधिक सुदृढ़, सुरक्षित एवं आपदा-रोधी उत्तराखण्ड के निर्माण हेतु योजनाबद्ध पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत करना है।

उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार से आवश्यक वित्तीय सहयोग प्राप्त होगा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में शीघ्र पुनर्बहाली, आजीविका संरक्षण तथा बुनियादी ढांचे को ‘बिल्ड बैक बेटर’ सिद्धांत के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

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