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भारत में लांच हुआ बच्चों की सुरक्षा के लिए दुनिया का अपनी तरह का पहला एआई आधारित टूल ‘रक्षा

नयी दिल्ली, 14 जनवरी। भारत ने बच्चों को निशाना बनाकर किए जाने वाले अपराधों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में स्वयं को अग्रिम पंक्ति में स्थापित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित अपनी तरह का पहला और अनोखा प्रौद्योगिकी सक्षम टूल ‘रक्षा’ पेश किया है जिसे बच्चों की ट्रैफिकिंग, बाल विवाह तथा बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (सी-सीम) की प्रभावी रोकथाम के लिए तैयार किया गया है। एआई आधारित इस टूल को 16 से 20 फ़रवरी 2026 के बीच आयोजित होने वाले भारत सरकार के इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले लांच किया गया है। बच्चों की सुरक्षा के लिए विकसित इस क्रांतिकारी प्रौद्योगिकी-सक्षम टूल ‘रक्षा’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी तथा वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने ‘प्रॉस्पेरिटी फ़्यूचर्स: चाइल्ड सेफ्टी टेक समिट’ में लांच किया, जो भारत सरकार के एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आधिकारिक प्री-समिट कार्यक्रम है। यह सम्मेलन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने अपने रणनीतिक साझेदार इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के साथ मिलकर आयोजित किया।

बच्चों की सुरक्षा के लिए इस टूल ‘रक्षा’ को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने तैयार किया है जिसके 250 से अधिक सहयोगी नागरिक समाज संगठनों का नेटवर्क बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की रोकथाम, पहचान और प्रभावी प्रतिक्रिया को सशक्त बनाने के लिए देश के 451 जिलों में जमीन पर काम कर रहा है।

‘रक्षा’ देशभर के बच्चों से संबंधित आंकड़ों का विश्लेषण करता है और उन्नत एआई क्षमताओं का उपयोग कर वास्तविक समय में बच्चों की ट्रैफिकिंग और बाल विवाह के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों का मानचित्रण, संवेदनशील बच्चों और समुदायों की पहचान, ट्रैफिकिंग जैसे मुनाफे वाले संगठित अपराध में शामिल गिरोहों की निगरानी, उसके स्रोत और गंतव्य बिंदुओं की ट्रैकिंग तथा शोषण के उभरते रुझानों व नए केंद्रों का पता लगाने में सक्षम बनाता है।

बाल सुरक्षा पर अपनी तरह के पहले सम्मेलन को डिजिटली संबोधित करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, “प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्यांकन सबसे संवेदनशील तबकों व लोगों की सुरक्षा में निहित है। बच्चे हमारे भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि जिस डिजिटल दुनिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को वे विरासत में पाएं, वह सुरक्षित, समावेशी और उन्हें सशक्त करने वाली हो। यह जानकर मुझे प्रसन्नता है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन बच्चों की सुरक्षा, सशक्तीकरण और संरक्षण के लिए एआई-आधारित टूल की शुरुआत कर रहा है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आगे कहा कि ‘रक्षा’ टूल बच्चों की सुरक्षा व संरक्षण के मूल्यों को समाहित करने के साथ और एक सुदृढ़ बाल संरक्षण प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन को इस जिम्मेदारी को पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाने और एआई व प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से देश के बच्चों के सुरक्षित वर्तमान व समृद्ध भविष्य पर रचनात्मक विमर्श के लिए सभी पक्षों व हितधारकों को एक मंच पर लाने व इस सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

इस बात को रेखांकित करते हुए कि ‘रक्षा’ किस प्रकार बाल संरक्षण के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित कर सकता है, जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “बाल संरक्षण प्रणालियों को सुदृढ़ करने और बच्चों की सुरक्षा व समृद्धि को आगे बढ़ाने में एआई के उपयोग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। तकनीक के उपयोग से दुनिया का सबसे समग्र बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने की दिशा में ‘रक्षा’ भारत के वैश्विक नेतृत्व का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। ‘रक्षा’ का एक मंच के रूप में उपयोग करते हुए, भारत तकनीक के सहारे देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले प्रत्येक बच्चे और हर संवेदनशील परिवार की पहचान और निगरानी कर सकता है। आंकड़ों को ज्ञान और ठोस कार्रवाई में रूपांतरित कर यह दृष्टिकोण न्याय तक पहुंच का विस्तार कर रहा है, संवेदनशील परिवारों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार ला रहा है, और बच्चों के सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ कर रहा है। साथ मिलकर हम हर बच्चे के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगे।”

बच्चों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम में एआई की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए सांसद लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब कोई भविष्य का वादा नहीं रही, बल्कि मौजूदा समय की सच्चाई बन चुकी है। यह इस बात को आकार दे रही है कि हम कैसे सीखते हैं, शासन करते हैं, काम करते हैं और इससे आगे बढ़कर यह भी तय कर रही है कि हमारे बच्चे किससे और कैसे जुड़ते हैं। एआई हमें प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर रोकथाम की ओर, नुकसान के महज दस्तावेजीकरण से आगे बढ़कर जोखिम का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता देती है। भौगोलिक परिस्थितियों, प्रवासन, स्कूलों में उपस्थिति और सामाजिक-आर्थिक स्थितियों से जुड़ी बाल-संवेदनशीलता के पैटर्न पहले से ही समेकित डेटा प्रणालियों में मौजूद हैं। एआई इन बिंदुओं को जोड़कर समय से पूर्व चेतावनियां और ऐसे हस्तक्षेप संभव बनाती है, जिनसे नुकसान होने से पहले ही उसे रोका जा सके। ऐसे तंत्र मानवीय विवेक का स्थान नहीं लेते, बल्कि उसे सशक्त करते हैं, क्योंकि रोकथाम केवल एक तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि एक नैतिक अनिवार्यता है। हमारे सामने मौजूद चुनौती सरकार, तकनीक विशेषज्ञों, नागरिक समाज, शिक्षा जगत और समुदायों के बीच सहयोग की मांग करती है।” लावू ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ के संयोजक हैं जो बच्चों और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाला मंच है।

‘रक्षा’ को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि वह बाल संरक्षण पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर रोकथाम और जांच एजेंसियों- दोनों को सुदृढ़ करे। इसके लिए यह तीन लक्ष्य केंद्रित टूल का उपयोग करता है। पहला टूल व्यापक स्तर पर परिवारों की आर्थिक असुरक्षा को कम कर रोकथाम पर काम करता है, विशेषकर बाल विवाह के विरुद्ध। दूसरा टूल ट्रैफिकिंग जैसे संगठित आर्थिक अपराध से निपटता है। यह एक तरफ अपराध के घटित होने से पहले ही उसका पूर्वानुमान और रोकथाम, व दूसरी ओर पैसे के लेनदेन की पड़ताल कर संगठित आपराधिक गिरोहों की जड़ों और उनके विस्तार की पहचान करने पर केंद्रित है। तीसरा टूल डिजिटल बाल संरक्षण को सशक्त करता है और यह बाल यौन शोषण सामग्री के निर्माण, उसके अपलोड, डाउनलोड और देखने से जुड़े ऑनलाइन हीट जोन और आईपी पतों का पता लगाने, उनके विश्लेषण और मानचित्रण में सक्षम है।

यह शिखर सम्मेलन चार पूर्ण सत्रों में विभाजित था, जिनमें ‘सामाजिक परिवर्तन में एआई की भूमिका’, ‘रक्षा: बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल स्पेस की रूपरेखा’, ‘टेक फॉर गुड’ तथा ‘एआई, जागरूकता और कार्रवाई: भविष्य के लिए संप्रेषण और विमर्श’ शामिल थे। इन सत्रों के दौरान वक्ताओं ने पूर्वानुमान आधारित रोकथाम, व्यवहार विश्लेषण में एआई की भूमिका, कानून और जमीनी कार्रवाइयों के साथ उसके समन्वय, तथा डिजिटल युग में बच्चों के लिए जोखिमों, अधिकारों और जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।

दिन-भर चले इस शिखर सम्मेलन में दया शंकर, उप सचिव एवं निदेशक, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय; प्रियंका ऋभु, प्रमुख, सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियरल चेंज फॉर चिल्ड्रेन (सी-लैब); मैथिल्द सेरियोली, मुख्य वैज्ञानिक, एवरीवन एआई, परिषद सदस्य, चैटजीपीटी; नोमिशा कुरियन, सहायक प्रोफेसर, वारविक विश्वविद्यालय; जी. के. गोस्वामी, अपर महानिदेशक एवं निदेशक, फॉरेंसिक संस्थान, उत्तर प्रदेश; हर्षवर्धन, पुलिस अधीक्षक, तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो; धनंजय टिंगल, कार्यकारी निदेशक, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन; अनिल रघुवंशी, संस्थापक एवं अध्यक्ष, चाइल्डसेफनेट; बैली सैपल, विकास प्रमुख, वी प्रोटेक्ट ग्लोबल एलायंस; अनुप्रिया मोहता, पब्लिक पॉलिसी मैनेजर, यूट्यूब; डॉ. ई. खलियाराज, निदेशक, राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा अनुसंधान परिषद; मयंक, अपर महानिदेशक, रेलवे पुलिस बल; व संपूर्णा बेहुरा, कार्यकारी निदेशक, इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन, गौरव मित्तल, प्रिंसिपल अप्लाइड साइंटिस्ट, माइक्रोसॉफ्ट यूएस और अतुल अग्रवाल, सीईओ एस्प्रिफाई एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड मौजूद थे।

नीति आयोग के साथ साझेदारी में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अकेले 2025 में आर्थिक रूप से संवेदनशील 20 लाख से ज्यादा परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा, 198,628 बाल विवाह रोके और ट्रैफिकिंग व शोषण के शिकार 55,146 बच्चों को मुक्त कराया। जेआरसी की याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री देखने, डाउनलोड करने व साझा करने को अपराध घोषित किया और चाइल्ड पोर्नोग्राफी शब्द की जगह बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार सामग्री शब्द के उपयोग का आदेश दिया। नेटवर्क ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय से सी-सीम के 73,258 मामलों में कार्रवाई शुरू की। रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के साथ समझौते के तहत यह रेल के जरिए बच्चों की ट्रैफिकिंग की रोकथाम व उन्हें मुक्त कराने में उसके साथ करीबी समन्वय से काम करता है।

भारत सरकार 16 से 20 फरवरी तक इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट का आयोजन कर रही है जो ग्लोबल साउथ में अपनी तरह का पहला आयोजन है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेता, सीईओ और नीति निर्माता कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इस पर विमर्श को आकार देने में भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा करेंगे। इससे पहले भारत सरकार के सहयोग से एआई पर इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं।

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