देश के 70 प्रतिशत वाहन वैधानिक मानकों पर खरे नहीं
1.7 करोड़ से अधिक वाहनों पर डी-रजिस्ट्रेशन का खतरा, सरकार डेटाबेस ‘साफ’ करने की तैयारी में
–Uttaratkhand Himalaya Desk-
देश में पंजीकृत वाहनों की वास्तविक स्थिति चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, देश में मौजूद लगभग 40.7 करोड़ वाहनों में से 70 प्रतिशत से अधिक वाहन किसी न किसी वैधानिक मानक का पालन नहीं कर रहे हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या दोपहिया वाहनों की है, जो कुल गैर-अनुपालक वाहनों का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं।
मंत्रालय के अनुसार, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC), फिटनेस सर्टिफिकेट या बीमा—इनमें से किसी एक या अधिक की वैधता समाप्त होने के कारण ये वाहन नियमों के अनुरूप नहीं माने जा रहे हैं। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ हाल में हुई बैठक में एक नया ढांचा (फ्रेमवर्क) प्रस्तावित किया है, जिसके तहत नियमों का पालन न करने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से स्वतः डी-रजिस्टर किया जा सकता है।
दोपहिया वाहन सबसे बड़ी चुनौती
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 23.5 करोड़ गैर-अनुपालक वाहन दोपहिया श्रेणी के हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में कारें, हल्के व भारी व्यावसायिक वाहन (LCV, MCV, HCV) और अन्य श्रेणियों के वाहन भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि वाहन डेटाबेस में ऐसे कई वाहन दर्ज हैं जो कानूनी या परिचालन रूप से सड़क पर चलने के योग्य ही नहीं हैं, लेकिन फिर भी रिकॉर्ड में ‘सक्रिय’ दिख रहे हैं, जिससे कुल वाहन संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई नजर आती है।
केवल 8.2 करोड़ वाहन पूरी तरह अनुपालक
सरकारी विवरण के मुताबिक, देश में इस समय केवल 8.2 करोड़ वाहन ऐसे हैं जो पूरी तरह सक्रिय और सभी मानकों पर खरे उतरते हैं। इसके विपरीत, 30 करोड़ से अधिक वाहनों में किसी न किसी प्रकार की कमी पाई गई है। इसके अलावा, लगभग 2.2 करोड़ वाहन ‘आर्काइव’ श्रेणी में पहले से ही डाले जा चुके हैं।
मंत्रालय ने वाहनों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया है—
सक्रिय एवं अनुपालक (Active-Compliant)
सक्रिय लेकिन गैर-अनुपालक (Active Non-Compliant)
अस्थायी आर्काइव (Temporary Archive)
स्थायी आर्काइव (Permanent Archive)
राज्यों में भी स्थिति असंतुलित
राज्यवार स्थिति पर नजर डालें तो तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में 40 प्रतिशत से अधिक पंजीकृत वाहन सक्रिय होने के बावजूद गैर-अनुपालक हैं। इसके उलट, तेलंगाना एकमात्र राज्य है, जहां यह अनुपात 20 प्रतिशत से कम बताया गया है।
अस्थायी आर्काइव श्रेणी में राजस्थान, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और कर्नाटक की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक खराब मानी जा रही है।
एक, दो और फिर स्थायी कार्रवाई
प्रस्तावित नए ढांचे के अनुसार,
सक्रिय लेकिन गैर-अनुपालक वाहनों के मालिकों को एक वर्ष के भीतर फिटनेस, बीमा और PUC जैसे दस्तावेज़ों को नवीनीकृत करना होगा।
ऐसा न करने पर वाहन को अस्थायी आर्काइव श्रेणी में डाल दिया जाएगा।
यदि दो वर्षों तक भी नवीनीकरण नहीं हुआ, तो वाहन स्वतः स्थायी आर्काइव में चला जाएगा, जिसे व्यवहारिक रूप से डी-रजिस्ट्रेशन माना जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया स्वचालित (ऑटोमेटेड) होगी और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से दस्तावेज़ों की वैधता के आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा।
स्थायी आर्काइव से वापसी केवल विशेष मामलों में
सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थायी आर्काइव अंतिम श्रेणी होगी, जहां से सामान्य परिस्थितियों में वापसी संभव नहीं होगी। केवल डेटा त्रुटि, न्यायालय के आदेश या पुराने प्रवासन (legacy data) से जुड़े मामलों में ही वाहन को दोबारा सक्रिय किया जा सकेगा। इसके लिए राज्य के परिवहन आयुक्त की स्वीकृति अनिवार्य होगी और हर रिकवरी डिजिटल रूप से दर्ज, ऑडिट योग्य और पारदर्शी होगी।
उद्देश्य: साफ और भरोसेमंद डेटाबेस
एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में, “सरकार का उद्देश्य वाहन डेटाबेस को साफ करना है। राज्यों से फीडबैक मांगा गया है और उनसे डेटाबेस के सैनिटाइजेशन की योजना बनाने को कहा गया है।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और बीमा व्यवस्था—तीनों के लिहाज से अहम है। साथ ही, इससे नीति-निर्माण के लिए सटीक और भरोसेमंद आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
कुल मिलाकर, यह प्रस्तावित व्यवस्था वाहन मालिकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है—कागज़ी लापरवाही अब नहीं चलेगी। नियमों का पालन न करने पर वाहन सिर्फ सड़क से ही नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड से भी बाहर हो सकता है।
