स्वास्थ्य

बर्थ एस्फिक्सिया से पीड़ित नवजात का थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया से सफल उपचार

नवजात चिकित्सा में मील का पत्थर

मुरादाबाद, 17 जनवरी। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) के टीएमयू हॉस्पिटल ने नवजात चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार जन्म के समय दम घुटने (बर्थ एस्फिक्सिया) से पीड़ित एक नवजात शिशु का अत्याधुनिक तकनीक थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया के माध्यम से सफल उपचार किया गया। उपचार के पश्चात शिशु पूरी तरह स्वस्थ है और बिना किसी जटिलता के उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया जैसी उन्नत सुविधा अब तक देश के बड़े महानगरों के चुनिंदा चिकित्सा संस्थानों तक सीमित थी। मुरादाबाद में इसका सफल प्रयोग न केवल टीएमयू हॉस्पिटल की चिकित्सा क्षमता को दर्शाता है, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह सफलता नवजात चिकित्सा में एक मील का पत्थर साबित हुई है और मुरादाबाद को उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाती है।
इस जटिल और संवेदनशील उपचार का नेतृत्व नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अदिति रावत ने किया। उनकी टीम में पीडियाट्रिक्स विभाग की अध्यक्ष डॉ. रूपा सिंह, प्रो. विवेक त्यागी, डॉ. सुरेन, डॉ. मयंक एवं डॉ. नव्या की अहम भूमिका रही। चिकित्सकों की इस टीम ने 24 घंटे निरंतर निगरानी रखते हुए नवजात को सुरक्षित और प्रभावी उपचार प्रदान किया।
डॉक्टरों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद शिशु को गंभीर अवस्था में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती किया गया था। बर्थ एस्फिक्सिया एक अत्यंत गंभीर स्थिति होती है, जिसमें समय पर सही इलाज न मिलने पर मस्तिष्क को स्थायी क्षति पहुंचने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय टीम ने आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीक थेरैप्यूटिक हाइपोथर्मिया अपनाने का निर्णय लिया।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रूप से लगभग 72 घंटे तक कम रखा जाता है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इसके बाद ग्रैजुअल रीवार्मिंग प्रक्रिया के जरिए शिशु को धीरे-धीरे सामान्य तापमान पर लाया जाता है। यह संपूर्ण उपचार अत्याधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सतत निगरानी में किया गया।
शिशु के माता-पिता ने भावुक होते हुए डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें उम्मीद टूटती नजर आ रही थी, लेकिन डॉक्टरों की कुशलता, अनुभव और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके बच्चे को नया जीवन मिला।

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