बीकेटीसी कर्मचारियों की प्रमोशन और नियमितीकरण को लेकर आंदोलन की चेतावनी
ज्योतिर्मठ, 22 जनवरी (कपरूवाण)। बद्रीनाथ एवं केदारनाथ धामों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करने वाले बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के कार्मिकों को अपने जायज अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होना पड़ रहा है। राज्य सरकार के अधीन तथा बद्रीनाथ–केदारनाथ अधिनियम 1939 के अंतर्गत संचालित इस समिति में सैकड़ों कर्मचारी वर्षों से पदोन्नति और नियमितीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जो 20–20 वर्ष से अधिक सेवा देने के बावजूद नियमित हुए बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों में पूजा-पाठ, दर्शन व्यवस्था और मंदिर से जुड़े सभी कार्य बीकेटीसी के अधिकारियों व कर्मचारियों के जिम्मे हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इन धामों में कर्मचारी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते आ रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्मिक स्थिर वेतन या स्वयंसेवक के रूप में बेहद कम मानदेय पर कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
समय-समय पर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने या वेतन बढ़ाने की बातें जरूर होती रही हैं। केदारनाथ उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा अस्थायी कार्मिकों को वन-टाइम सेटलमेंट के माध्यम से लाभ दिए जाने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
गत वर्ष के यात्रा काल में बद्रीनाथ और केदारनाथ धामों के लिए पीआरडी के माध्यम से कार्मिकों को सेवा पर रखा गया, जिन्हें लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है। इसके विपरीत, बीते 20–25 वर्षों से नियमित होने की आस में अल्प वेतन पर कार्य कर रहे बीकेटीसी के कार्मिकों ने न तो इस व्यवस्था का खुलकर विरोध किया और न ही समान वेतन की मांग रखी।
इसी बीच प्रतिनियुक्ति और संविदा नियुक्ति से संबंधित एक विज्ञप्ति के प्रकाशन ने कर्मचारियों में रोष पैदा कर दिया। कर्मचारी संघ ने बद्रीनाथ–केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि जब तक पदोन्नति, अस्थायी कर्मचारियों का वन-टाइम सेटलमेंट और वेतन वृद्धि की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक नई नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो कर्मचारी संघ विधिसम्मत और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाने को बाध्य होगा। यह ज्ञापन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह बिष्ट, महामंत्री भूपेंद्र रावत, उपाध्यक्ष रविंद्र भट्ट सहित बद्रीनाथ एवं केदारनाथ अधिष्ठानों के अनेक कार्मिकों के हस्ताक्षरों के साथ भेजा गया है।
