अध्ययन में खुलासा b: 2030 तक फेफड़ों के कैंसर के मामलों में तेज़ उछाल की आशंका
महिलाओं में सबसे तेज़ बढ़ोतरी, पूर्वोत्तर बना सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
भारत में वर्ष 2030 तक फेफड़ों (लंग) के कैंसर के मामलों में तेज़ बढ़ोतरी होने की आशंका है। एक राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, देश के पूर्वोत्तर राज्यों में यह समस्या सबसे गंभीर रूप ले रही है, जबकि महिलाओं में मामलों की बढ़ोतरी की रफ्तार पुरुषों की तुलना में अधिक पाई गई है। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन में देश के छह भौगोलिक क्षेत्रों की 57 आबादी-आधारित कैंसर रजिस्ट्रियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि पूर्वोत्तर भारत में फेफड़ों के कैंसर की दर सबसे अधिक है, जहां महिलाओं में यह दर पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच चुकी है—जो भारत में एक असामान्य प्रवृत्ति मानी जाती है।
महिलाओं में सबसे तेज़ वृद्धि
अध्ययन के अनुसार,
- महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में हर साल औसतन7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
- वहीं पुरुषों में यह वृद्धि3 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही।
- सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत है, जबकि आइजोल (मिज़ोरम) पुरुषों और महिलाओं—दोनों के लिए सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।
हॉटस्पॉट और रुझान
- पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की सर्वाधिक दर श्रीनगर और आइजोल में दर्ज की गई।
- महिलाओं में सबसे अधिक मामले आइजोल में पाए गए।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में तंबाकू सेवन अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद फेफड़ों के कैंसर के मामले अधिक हैं, जिसे विशेषज्ञ “दक्षिणी विसंगति” (South anomaly) बता रहे हैं।
कैंसर के प्रकार में बदलाव
- शोध के अनुसार, भारत में फेफड़ों के कैंसर का स्वरूप भी बदल रहा है।
- अब एडिनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार बन गया है, जिसने धूम्रपान से सीधे जुड़े स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा को पीछे छोड़ दिया है।
एम्स, नई दिल्ली के पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉ. सौरभ मित्तल के अनुसार,
“हम गैर-धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामले देख रहे हैं। इसके पीछे इनडोर एयर पॉल्यूशन, बायोमास ईंधन का उपयोग, सेकेंड हैंड स्मोक और व्यावसायिक (ऑक्यूपेशनल) जोखिम अहम कारण हैं।”
देर से पहचान बन रही बड़ी समस्या
अध्ययन में यह भी सामने आया कि:
- करीब 50 प्रतिशत मामलों का पता काफी देर से चलता है,
- फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतें अक्सर कम रिपोर्ट होती हैं,
- और जोखिम कारक अब केवल धूम्रपान तक सीमित नहीं रह गए हैं।
क्षेत्रीय तस्वीर
- बेंगलुरु में महिलाओं के कुल फेफड़ों के कैंसर मामलों में आधे से अधिक एडिनोकार्सिनोमा के हैं।
- दिल्ली में लार्ज–सेल कार्सिनोमा के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी गई है।
- केरल के कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम जैसे जिलों में तंबाकू और शराब का सेवन कम होने के बावजूद पुरुषों में कैंसर की ऊंची दर दर्ज की गई।
- महिलाओं में हैदराबाद और बेंगलुरु में फेफड़ों के कैंसर की दर सबसे अधिक पाई गई।
2030 का अनुमान
शोधकर्ताओं का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक:
- केरल के कुछ हिस्सों में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर 33 प्रति लाख से अधिक हो सकती है,
- जबकि महिलाओं में यह दर 8 प्रति लाख से ऊपर पहुंच सकती है, खासकर बेंगलुरु जैसे महानगरों में।
विशेषज्ञों का कहना है कि खराब वायु गुणवत्ता, घरेलू प्रदूषण और शहरी जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक आने वाले वर्षों में इस समस्या को और गंभीर बना सकते हैं।
अतिरिक्त तथ्य
- भारत में फेफड़ों का कैंसर अब कैंसर से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बनता जा रहा है।
- WHO के अनुसार, दुनिया भर में हर साल फेफड़ों के कैंसर से लगभग 18 लाख मौतें होती हैं।
भारत में महिलाओं में बढ़ते मामलों के पीछे एलपीजी से पहले इस्तेमाल होने वाला बायोमास ईंधन, खराब वेंटिलेशन और वायु प्रदूषण अहम कारण माने जाते हैं।
