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सोमन वांगचुक रिहाई मंच ने सरकार को दिलाई संवैधानिक मूल्यों की याद

संवैधानिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संवाद:  सोमन वांगचुक रिहाई मंच ने देहरादून में आयोजित की सभा


देहरादून, 26 जनवरी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमन वांगचुक रिहाई मंच की ओर से एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें संवैधानिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात से आंकी जाती है कि वह असहमति और स्वतंत्र विचारों को किस तरह स्थान देता है।
सभा में वक्ताओं ने यह भी उल्लेख किया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोमन वांगचुक पिछले चार महीनों से हिरासत में हैं। उनका कहना था कि अब तक न तो उन पर औपचारिक आरोप तय हुए हैं और न ही उन्हें जमानत मिली है, जिससे उनके समर्थकों में चिंता बनी हुई है। वक्ताओं के अनुसार, वांगचुक ने लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर सरकार से संवाद और अपने वादों को पूरा करने की मांग की थी।


यह सभा मूल रूप से गांधी पार्क में आयोजित होनी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के चलते पुलिस प्रशासन के अनुरोध पर इसे दीन दयाल पार्क में स्थानांतरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार व्यक्त किए गए और समर्थन में नारे भी लगाए गए।
सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. रवि चोपड़ा ने कहा कि संविधान किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। यदि संविधान सुरक्षित रहेगा तो समय के साथ उसकी कमियों पर भी चर्चा और सुधार की गुंजाइश बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि संवैधानिक संस्थाओं और मूल्यों को मजबूत किया जाए।
सीपीआई (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने संविधान में निहित समानता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों की चर्चा करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में इन मूल्यों का सम्मान बनाए रखना बेहद जरूरी है।
जन विज्ञान मंच से जुड़े विजय भट्ट ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ नीतिगत फैसलों पर व्यापक सार्वजनिक बहस होनी चाहिए, ताकि वे संविधान की भावना के अनुरूप हों।
सभा में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, विमला कोली, सामाजिक कार्यकर्ता परमजीत सिंह कक्कड़, जगदीश कुकरेती सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन हरिओम पाली ने किया।
इस अवसर पर स्वतंत्र पत्रकार एवं रंगकर्मियों द्वारा ‘संविधान चौपाल’ का आयोजन भी किया गया, जिसमें मौलिक अधिकारों, नागरिक कर्तव्यों और संविधान की प्रस्तावना को सरल भाषा में प्रदर्शित किया गया। संविधान आधारित जनगीत भी प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहा।
सभा में पद्मा गुप्ता, निर्मला बिष्ट, नंदन पांडेय, हिमांशु चौहान, वी.के. डोभाल, राजू सिंह, रुचि सिंह, मनीष केडियाल, डॉ. जितेंद्र भारती, राकेश पंत, जयकृत कंडवाल, कृष्णा सकलानी, अशोक कटारिया, ईश्वर पाल शर्मा सहित कई नागरिक मौजूद रहे।

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