पूर्व विधायक बलवीर सिंह नेगी का निधन, उत्तराखंड की राजनीति में शोक की लहर
देहरादून, 27 जनवरी। टिहरी गढ़वाल जिले की घनसाली विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ नेता एवं तीन बार के पूर्व विधायक बलवीर सिंह नेगी का सोमवार को निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे। उनके निधन से उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
पूर्व विधायक बलवीर सिंह नेगी ने 26 जनवरी 2026 को देहरादून स्थित कैलाश अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उपचाराधीन थे। उनके निधन के बाद मंगलवार को हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
बलवीर सिंह नेगी का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश के दौर से शुरू हुआ था। वे भिलंगना क्षेत्र की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भिलंगना ब्लॉक प्रमुख के रूप में की थी और दो बार ब्लॉक प्रमुख तथा जिला पंचायत सदस्य भी रहे
वर्ष 1988 में वे पहली बार जनता दल के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में उन्होंने एनसीपी (NCP) के टिकट पर घनसाली विधानसभा से जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2007 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर पुनः विधायक निर्वाचित हुए। वह गढ़वाल मंडल विकास निगम के अध्यक्ष भी रहे।
बलवीर सिंह नेगी को उनके सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव के लिए जाना जाता था। घनसाली क्षेत्र के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने क्षेत्र में सड़क नेटवर्क के विस्तार, शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए विधानसभा में लगातार आवाज उठाई। जनसमस्याओं के प्रति उनकी संवेदनशीलता उन्हें एक लोकप्रिय जननेता के रूप में स्थापित करती थी।
उनके निधन पर मुख्यमंत्री सहित पूर्व मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड की राजनीति, विशेषकर टिहरी जनपद के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। बलवीर सिंह नेगी अपने पीछे पत्नी और एक पुत्र को छोड़ गए हैं।
