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ब्रह्मांड की ‘धड़कन’: वैज्ञानिकों ने सुलझाया ब्लैक होल की रहस्यमयी झिलमिलाहट का राज

ASTRONOMERS HAVE UNRAVELLED THE MYSTERY BEHIND AN INTRIGUING FLICKER THAT THEY NOTICED IN BLACK HOLE SYSTEMS, USING ADVANCED COMPUTER SIMULATIONS.BLACK HOLES, THE MOST COMPACT OBJECTS IN THE UNIVERSE WITH STRONG GRAVITATION ARE STUDIED INDIRECTLY BY OBSERVING THE ELECTROMAGNETIC RADIATION EMITTED BY MATTER SURROUNDING THEM. MATTER FALLING TOWARD A BLACK HOLE DUE TO THE STRONG GRAVITATION, FIRST COLLECTS IN A TEMPORARY STRUCTURE CALLED AN ACCRETION DISC. THE BEHAVIOR OF THIS DISC CONTROLS HOW ENERGY AND RADIATION ARE PRODUCED. WHEN THE MOTION OF MATTER IN THE DISC IS MAINLY ROTATIONAL, THE INWARD FLOW SLOWS DOWN AND THE RADIATION GENERATED ARE EMITTED AS THERMAL RADIATION. HOWEVER, IF THE ACCRETING MATTER HAS A SIGNIFICANT INFALL VELOCITY, NON-THERMAL RADIATION DOMINATES. SUCH NON-THERMAL RADIATION OFTEN PRODUCED SIGNALS CALLED QUASI-PERIODIC OSCILLATIONS (QPOS), WITH FUNDAMENTAL FREQUENCIES RANGING FROM LESS THAN ONE HERTZ TO SEVERAL TENS OF HERTZ IN ACCRETION DISCS AROUND BLACK HOLES WITH MASSES OF A FEW TO TENS OF SOLAR MASSES. SUCH BLACKHOLE SYSTEMS FLICKER RHYTHMICALLY INSTEAD OF SHINING STEADILY. THE REASONS BEHIND THE FLICKERS HAVE INTRIGUED SCIENTISTS FOR LONG.

चित्र (Fig):पहली पंक्ति में घनत्व के कंटूर और वेग सदिश (तीर), दूसरी पंक्ति में तापमान (केल्विन में) और तीसरी पंक्ति में कोणीय संवेग (λ) दर्शाया गया है। यह सभी परिणाम मॉडल L2 के लिए α = 0.05 पर दिखाए गए हैं। पहली, दूसरी, तीसरी और अंतिम कॉलम क्रमशः 85,000 tg, 95,000 tg, 104,000 tg और 112,500 tg समय पर लिए गए स्नैपशॉट हैं। विस्तृत जानकारी के लिए मूल पाठ देखें।

 

 

-ज्योति/ उषा  रावत-

ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमयी निवासी—ब्लैक होल—सिर्फ अंधेरे का गड्ढा नहीं हैं, बल्कि वे एक लयबद्ध तरीके से ‘टिमटिमाते’ भी हैं। हाल ही में खगोलविदों ने उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से इस झिलमिलाहट (Flicker) के पीछे छिपे सदियों पुराने रहस्य को सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है।

क्या है यह ‘कॉस्मिक झिलमिलाहट’?

ब्लैक होल इतने शक्तिशाली होते हैं कि रोशनी भी इनसे बच नहीं सकती, इसलिए इन्हें सीधे देखना असंभव है। लेकिन, इनका गुरुत्वाकर्षण आसपास के पदार्थ को अपनी ओर खींचता है, जिससे एक घूमती हुई डिस्क बनती है, जिसे ‘एक्रिशन डिस्क’ कहा जाता है।

जब इस डिस्क में पदार्थ बहुत तेज़ गति से गिरता है, तो वहां से ‘नॉन-थर्मल’ विकिरण निकलता है। यही विकिरण एक खास तरह का संकेत पैदा करता है जिसे ‘क्वाजी-पीरियॉडिक ऑस्सिलेशन’ (QPO) कहते हैं। सरल शब्दों में कहें तो, ब्लैक होल एक स्थिर रोशनी के बजाय किसी धड़कन की तरह एक निश्चित लय में चमकते और बुझते हैं।

भारतीय वैज्ञानिकों का अहम योगदान

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (ARIES) के वैज्ञानिकों ने इस गुत्थी को सुलझाने के लिए एक विशेष न्यूमेरिकल सिमुलेशन कोड विकसित किया। इस शोध टीम में श्री संजीत देबनाथ, डॉ. इंद्रनील चट्टोपाध्याय और उनके साथियों के साथ पोलैंड और फ्रांस के विशेषज्ञ भी शामिल थे।

शॉक वेव्स और डगमगाती डिस्क

‘द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, ब्लैक होल की ओर खिंची चली आने वाली गैस हमेशा सुचारू रूप से अंदर नहीं गिरती।

शॉक वेव्स का निर्माण: कभी-कभी यह गैस अचानक अपनी गति धीमी करती है और गर्म होकर घनी हो जाती है, जिससे वैसी ही ‘शॉक वेव्स’ बनती हैं जैसी सुपरसोनिक जेट विमान हवा में पैदा करते हैं।

अस्थिरता और दोलन: जब डिस्क में घर्षण (Viscosity) अधिक होता है, तो ये शॉक वेव्स स्थिर रहने के बजाय डगमगाने और आगे-पीछे खिसकने लगती हैं। यही ‘डगमगाहट’ ब्लैक होल की झिलमिलाहट का असली कारण है।

अंतरिक्ष के ‘बुलबुले’ और शक्तिशाली जेट

अध्ययन में एक और रोमांचक बात सामने आई। जब घर्षण अधिक होता है, तो डिस्क के भीतर गर्म और अशांत बुलबुले जैसी संरचनाएं बनती हैं। ये बुलबुले समय-समय पर फटते हैं, जिससे ब्लैक होल के ध्रुवों से प्रकाश की गति के 25% तक की रफ़्तार से पदार्थ की शक्तिशाली धाराएं यानी ‘बाइपोलर जेट्स’ बाहर निकलती हैं।

यह खोज न केवल ब्लैक होल के व्यवहार को समझने में मदद करती है, बल्कि यह भी बताती है कि ब्रह्मांड की सबसे चरम स्थितियों में पदार्थ और ऊर्जा का खेल कितना जटिल और सुंदर हो सकता है।

 

  1. इवेंट होराइजन (Event Horizon): वह सीमा जहाँ से प्रकाश भी नहीं लौटता

इवेंट होराइजन ब्लैक होल के चारों ओर की वह अदृश्य सीमा है जिसे ‘पॉइंट ऑफ नो रिटर्न’ कहा जाता है।

गुरुत्वाकर्षण का जाल: इस सीमा के अंदर गुरुत्वाकर्षण इतना शक्तिशाली होता है कि पदार्थ तो क्या, प्रकाश (जिसकी गति $3,00,000$ किमी/सेकंड है) भी बाहर नहीं निकल सकता।

अदृश्यता का कारण: चूंकि यहाँ से कोई प्रकाश वापस नहीं आता, इसलिए हमें ब्लैक होल काला दिखाई देता है। यह किसी छेद की तरह नहीं, बल्कि एक गोले की तरह होता है।

समय का धीमा होना: अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत (Relativity) के अनुसार, जैसे-जैसे आप इवेंट होराइजन के करीब पहुँचते हैं, समय धीमा होने लगता है। बाहर से देखने वाले को लगेगा कि आप वहां पहुंचकर स्थिर हो गए हैं।

  1. ब्लैक होल जेट्स (Relativistic Jets): ब्रह्मांड के शक्तिशाली टॉर्च

जब ब्लैक होल गैस और सितारों को निगलता है, तो सारा पदार्थ उसके अंदर नहीं जाता। कुछ हिस्सा अत्यंत शक्तिशाली ऊर्जा की धाराओं के रूप में बाहर फेंक दिया जाता है।

उत्पत्ति का रहस्य: ये जेट्स इवेंट होराइजन के ठीक बाहर से निकलते हैं। ब्लैक होल के घूमने (Spin) और शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic Fields) के कारण, आसपास का पदार्थ मुड़कर ऊपर और नीचे की दिशा में बहुत तेज़ रफ़्तार से बाहर निकलता है।

प्रकाश की गति: ये जेट्स लगभग प्रकाश की गति (Relativistic speeds) से हज़ारों प्रकाश वर्ष दूर तक अंतरिक्ष में फैल जाते हैं।

आकाशगंगाओं का निर्माण: ये जेट्स इतने शक्तिशाली होते हैं कि वे नई आकाशगंगाओं के निर्माण और वहां सितारों के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

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