ज्योतिर्मठ भू-धंसाव : ट्रीटमेंट से पहले सीवर-ड्रेनेज और लंबित समस्याओं के समाधान की मांग
ज्योतिर्मठ, 2 फरवरी (कपरूवाण)। भू-धंसाव आपदा से प्रभावित मूल निवासी स्वाभिमान संगठन ने सोमवार को उप जिलाधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ट्रीटमेंट कार्य शुरू करने से पूर्व सभी लंबित समस्याओं के निराकरण तथा स्थिरीकरण कार्य से पहले सीवर और ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित करने की प्रमुख मांग उठाई।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि जनवरी 2023 में आई भू-धंसाव आपदा के बाद संगठन की ओर से ट्रीटमेंट सहित अन्य आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता पर शुरू कराने के लिए 13 सूत्रीय ज्ञापन दिया गया था, लेकिन आपदा के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी कई बिंदुओं पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे नगर के मूल निवासियों में गहरा असंतोष व्याप्त है।
पुनः जिलाधिकारी को भेजे गए 11 सूत्रीय ज्ञापन में कहा गया है कि मूल एवं पुश्तैनी निवासियों की बड़ी मात्रा में भूमि सेना, आईटीबीपी, बीआरओ, विष्णुप्रयाग परियोजना, एनटीपीसी, विभिन्न राजकीय विभागों और शिक्षण संस्थानों के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। इसके बाद शेष बची भूमि के आसपास केसर-ए-हिंद श्रेणी की भूमि पर दशकों से काश्तकार कृषि व बागवानी कर जीवनयापन कर रहे हैं। यदि ट्रीटमेंट कार्यों के लिए ऐसी भूमि का उपयोग किया जाता है, तो काश्तकारों को भूमि के बदले सुरक्षित स्थानों पर वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई जाए।
ज्ञापन में भू-धंसाव आपदा के बाद असुरक्षित घोषित की गई भूमि के लिए 40 लाख रुपये प्रति नाली मुआवजा दिए जाने की मांग की गई है। साथ ही जिन मूल निवासियों के भवन असुरक्षित अथवा क्षतिग्रस्त घोषित किए गए हैं, उन्हें सुरक्षित भूमि पर निर्धारित मानकों के अनुरूप भवन निर्माण या मरम्मत की अनुमति देने की भी मांग की गई है। संगठन ने रीवरफ्रंट परियोजना के अंतर्गत विष्णुप्रयाग से ऐरा पुल तक तटबंध निर्माण की डीपीआर तैयार करने की आवश्यकता भी जताई है।
इसके अतिरिक्त आपदा में क्षतिग्रस्त उत्तराखंड शैली के पठालयुक्त भवनों, टिनशेड और गौशालाओं के लिए पूर्ण मुआवजा देने, प्रधानमंत्री आवास योजना और राजीव आवास योजना के अंतर्गत मुआवजे का शीघ्र निर्धारण करने, असुरक्षित घोषित होम-स्टे को आवासीय श्रेणी के अनुसार मुआवजा दिए जाने तथा व्यावसायिक भवनों का बिना मूल्यह्रास मुआवजा भुगतान करने की मांग की गई है। सुरक्षा कारणों से बंद किए गए रोप-वे को पुनः संचालित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आपदा के दौरान किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षणों की विस्तृत रिपोर्ट में भार वहन क्षमता कम करने की स्पष्ट आवश्यकता बताई गई थी, लेकिन इस दिशा में अब तक की गई कार्रवाई को सार्वजनिक नहीं किया गया है। संगठन ने आपदा के तीन वर्ष बाद भी अनेक प्रभावितों को मुआवजा न मिलने पर चिंता जताते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की है।
ज्ञापन सौंपने और उप जिलाधिकारी से वार्ता करने वालों में मूल निवासी स्वाभिमान संगठन के अध्यक्ष भुवन चंद्र उनियाल, सचिव समीर डिमरी, उपाध्यक्ष प्रकाश नेगी, देवपूजाई समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूरी, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष अमित सती, पालिका सभासद प्रवेश डिमरी एवं प्रदीप पंवार, पूर्व सभासद रविंद्र साह सहित महाबीर सिंह बिष्ट और जे.पी. भट्ट आदि उपस्थित रहे।
