बजट के बाद ₹10 लाख करोड़ क्यों डूबे?

-MILIND KHANDEKAR
STT यानी Securities Transaction Tax बजट के बाद फिर से चर्चा में आ गया है. वित्त मंत्री ने F&O में STT बढ़ा दिया है. Futures में बढ़ोतरी 150% हुई है यानी पहले 0.02% टैक्स था, अब बढ़कर 0.05% जबकि Options में 50%. पहले 0.10% टैक्स था और अब 0.15% . कैश मार्केट के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है. इस टैक्स बढ़ोतरी का नतीजा यह हुआ कि शेयर बाज़ार दो प्रतिशत नीचे बंद हुआ. क़रीब दस लाख करोड़ रुपये का नुक़सान हो गया
तो हिसाब किताब में समझिए कि STT क्या है?
यह टैक्स 2004 में UPA सरकार ने लाया था. शेयर बाज़ार में ख़रीदने और बेचने पर टैक्स लगाया गया था. एक तरह का टोल टैक्स है. आप हाइवे पर आएँगे या जाएंगे तो टैक्स चुकाना पड़ेगा. तब सरकार ने कहा कि यह टैक्स दीजिए हम शेयरों पर LTCG यानी Long Term Capital Gains Tax नहीं लगाएँगे.
2018 में NDA सरकार ने इसे पलट दिया. STT क़ायम रखा, शेयर से होने वाले फायदे पर LTCG फिर लगा दिया. अब सरकार का लॉजिक था कि बाकी Assets पर LTCG लगता है तो शेयरों को अलग कैसे रखें? 2024 में यह टैक्स बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया.
इन दोनों टैक्स से इनवेस्टर्स ख़ासकर FII परेशान चल रहे थे. बाज़ार सुस्त है इसलिए उम्मीद थी कि STT और LTCG में राहत मिलेगी लेकिन वित्त मंत्री ने इसे बढ़ा दिया. सरकार का लॉजिक है कि Derivatives में भारत की GDP से 500 गुना ज़्यादा ट्रेडिंग हर साल हो रही है. भारत की GDP 300 लाख करोड़ रुपये है जबकि Derivatives trading 150 लाख लाख करोड़ रुपये. इसी सट्टेबाजी को रोकने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है.
SEBI की रिपोर्ट कहती है कि 100 में से 90 इनवेस्टर्स F&O में नुक़सान में हैं. इसे रोकने के लिए पिछले दो साल में कदम भी उठाए गए हैं, टर्न ओवर 25% तक कम हुआ है.सरकार को यह पर्याप्त नहीं लगता है. यही कारण है कि STT का रेट सरकार ने बढ़ाया है . सट्टेबाजी रुकेगी या नहीं, इसका पता नहीं मगर बाज़ार का मूड ज़रूर ख़राब हो गया है . समीर अरोड़ा जैसे जानकार तो कह रहे हैं कि शेयर बाज़ार और रुपया आने वाले दिनों में और टूटे
