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मोदी–ट्रंप व्यापार सौदा: रूस से तेल, टैरिफ में कटौती और कई अनसुलझे सवाल

 

-अल जज़ीरा की रिपोर्ट पर आधारित-
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कथित रूप से हुए एक “ऐतिहासिक व्यापार समझौते” को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा तेज है। क़तर स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ नेटवर्क अल जज़ीरा की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष बड़े दावे कर रहा है, जबकि भारत सरकार ने कई अहम बिंदुओं पर अब तक आधिकारिक रूप से कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है।

ट्रंप का दावा: रूस से तेल खरीदना बंद करेगा भारत

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के ज़रिये दावा किया है कि भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना पूरी तरह बंद करने पर सहमति जताई है। ट्रंप का कहना है कि इसके तहत भारत अब अमेरिका और उसके “मित्र देशों” से ऊर्जा आपूर्ति करेगा।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस कथित सहमति के बदले अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर “शून्य टैरिफ” की दिशा में आगे बढ़ेगा और अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर की तकनीक व कृषि उत्पादों की खरीद करेगा।

भारत सरकार का रुख: कुछ बातों पर चुप्पी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका द्वारा टैरिफ में की गई कटौती का स्वागत किया है और इसे भारतीय निर्यातकों के लिए राहत भरा कदम बताया है। हालांकि, अल जज़ीरा के अनुसार, भारतीय पक्ष ने ट्रंप के कई दावों पर चुप्पी साध रखी है।
प्रधानमंत्री मोदी के किसी भी आधिकारिक बयान में रूस से तेल आयात बंद करने का उल्लेख नहीं किया गया है। इसी तरह, अमेरिका से 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है।

क्या-क्या बातें साफ़ हैं

अल जज़ीरा की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका ने भारत पर लगाए गए ऊँचे टैरिफ को कम करने का आधिकारिक आदेश ज़रूर जारी कर दिया है और अब यह 18 प्रतिशत के “आधार स्तर” पर आ गया है।
यह कदम 2025 से चले आ रहे भारत–अमेरिका व्यापार तनाव में एक बड़ी नरमी के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भारतीय कपड़ा उद्योग, आभूषण क्षेत्र और आईटी सेवाओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

अब भी बने हुए हैं कई सवाल

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि कई अहम मुद्दों पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। भारत अपनी कुल ऊर्जा ज़रूरतों का लगभग 36 प्रतिशत रूस से पूरा करता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत वास्तव में रूस से तेल आयात अचानक बंद कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम भारत की लंबे समय से चली आ रही “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति के विपरीत होगा।
इसके अलावा, दोनों देशों के बीच अभी तक किसी विस्तृत और औपचारिक कानूनी दस्तावेज या संयुक्त वक्तव्य पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। अल जज़ीरा के अनुसार, पूरा मामला फिलहाल दो नेताओं के सोशल मीडिया बयानों तक ही सीमित दिखाई देता है।
एक और अहम सवाल रूस की प्रतिक्रिया को लेकर है। यदि भारत रूसी तेल से दूरी बनाता है, तो इसका असर भारत–रूस के दशकों पुराने रक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर क्या पड़ेगा, यह भी अभी साफ़ नहीं है।

रूस पर खुलासा अभी बाकी

अल जज़ीरा की रिपोर्ट इस ओर इशारा करती है कि जहां राष्ट्रपति ट्रंप इस कथित समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं भारत इसे फिलहाल केवल व्यापारिक तनाव में कमी के तौर पर देख रहा है। असली तस्वीर तब सामने आएगी, जब भारत का विदेश मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय रूस से तेल आयात के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट और औपचारिक नीति सार्वजनिक करेंगे।

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