पर्यावरण

रेडटेप आंदोलन के प्रणेता प्रभात मिश्रा को निर्मल कुमार जोशी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार

बाँदा, 4 फरबरी।।ग्राम बबेरु में चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र तथा मंगलभूमि फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक कार्यक्रम में पर्यावरणविद् एवं ‘रेडटेप आंदोलन’ के प्रणेता प्रभात मिश्रा को वन्यजीव एवं जैव-विविधता संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित निर्मल कुमार जोशी वन्यजीव संरक्षण पुरस्कार प्रदान किया गया।

यह सम्मान प्रभात मिश्रा को जन-भागीदारी और लोक चेतना को केंद्र में रखकर उनके द्वारा संचालित रेडटेप मूवमेंट के लिए दिया गया। रेडटेप आंदोलन वन्यजीव संरक्षण, पुराने वृक्षों की सुरक्षा तथा नए क्षेत्रों को हरित बनाने के उद्देश्य से जनसहभागिता पर आधारित एक अभिनव पहल है।

उल्लेखनीय है कि चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र द्वारा यह पुरस्कार भारत के पहले वनाधिकारी एवं चिपको आंदोलन की ऐतिहासिक रिपोर्ट के लेखक तथा उसकी संस्तुतियों को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारतीय वन सेवा के वरिष्ठ अधिकारी निर्मल कुमार जोशी की स्मृति में प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।

यह सम्मान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पर्यावरणविदों, वनविदों एवं वनकर्मियों को दिया जाता है। पुरस्कार स्वरूप प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति पदक प्रदान किया गया।

प्रभात मिश्रा विगत 17 वर्षों से रेडटेप आंदोलन के माध्यम से ग्रामीणों, स्कूली छात्र-छात्राओं तथा स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में पर्यावरण संरक्षण का सतत कार्य कर रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2005 में उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद में जिला बचत अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इस आंदोलन की शुरुआत की थी, जो आज उत्तर प्रदेश सहित चंबल क्षेत्र के अनेक हिस्सों में व्यापक रूप ले चुका है।

इस अभियान के अंतर्गत अवकाश के दिनों में कार्यकर्ता आसपास के गांवों में जाकर ग्रामीणों को ग्लोबल वार्मिंग, पर्यावरण संरक्षण, जैव-विविधता एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं। वृक्षारोपण के साथ-साथ पुराने वृक्षों पर लाल रिबन बांधकर उनके संरक्षण का संदेश दिया जाता है। प्रत्येक सोमवार पौधों को पानी देना और उनकी नियमित देखरेख करना इस आंदोलन की विशिष्ट पहचान है।

छात्रों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से प्रभात मिश्रा द्वारा विद्यालयों में ‘पर्यावरण संसद’ का गठन किया गया है, जिसे विश्व स्तर पर अपनी तरह का पहला छात्र संगठन माना जाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चण्डी प्रसाद भट्ट पर्यावरण एवं विकास केंद्र के प्रबंध न्यासी ओम प्रकाश भट्ट ने कहा कि मानवजनित गतिविधियों के कारण हिमालय से लेकर समुद्र तक संपूर्ण विश्व गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहा है। यदि समय रहते जमीनी स्तर पर जन-सहभागिता आधारित प्रयास नहीं किए गए, तो इसके परिणाम अत्यंत भयावह होंगे।

मुख्य अतिथि सीताराम दास महाराज ने कहा कि भारतीय धर्म-दर्शन में प्रकृति और संस्कृति का गहरा संबंध है, जहां पेड़ों और वन्यजीवों को विशेष महत्व दिया गया है।

डॉ. प्रभात मिश्रा ने अपने संबोधन में वृक्षों के संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण को भी अनिवार्य बताया।

कार्यक्रम के दौरान विकास केंद्र द्वारा संचालित “खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में” अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण एवं उसके सतत उपयोग के लिए रामबाबू तिवारी सहित उनके सहयोगियों राम औतार यादव, अनिरुद्ध कुमार त्रिपाठी, देव नारायण गर्ग, राजाराम यादव एवं श्री रामसजीवन वर्मा को गांधी-150 सम्मान से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर पूर्व वनाधिकारी त्रिलोक सिंह बिष्ट, चिपको आंदोलन की मातृ संस्था से जुड़े विनय सेमवाल, समाजसेवी मंगला कोठियाल, गौरव वशिष्ठ सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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