यूसैक कार्यशाला में, महिलाओं को आधुनिक अंतरिक्ष व डिजिटल तकनीक से जोड़ने पर जोर

देहरादून, 7 फरबरी। यूसैक सभागार में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य महिलाओं को अंतरिक्ष तकनीक, रिमोट सेंसिंग/जीआईएस (RS/GIS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एवं ड्रोन तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उन्हें शैक्षणिक एवं व्यावसायिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना रहा।
कार्यशाला में मुख्य अतिथि उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कंडवाल, विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा तिवारी (पूर्व निदेशक, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, देहरादून), शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत एवं वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ आमंत्रित अतिथियों एवं यूसैक के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
यूसैक की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरुणा रानी ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए RS/GIS, AI और ड्रोन तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला तथा बताया कि किस प्रकार ये तकनीकें महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त बना रही हैं।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए यूसैक के निदेशक एवं महानिदेशक, युकॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा कि आधुनिक तकनीकों के माध्यम से महिलाओं के लिए रोजगार, नवाचार, कौशल विकास और नेतृत्व के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, इंटरनेट, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने महिलाओं को नई पहचान, अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान की है। AI आधारित प्लेटफॉर्म कौशल विकास एवं रोजगार के नए मार्ग खोल रहे हैं, वहीं मोबाइल हेल्थ ऐप्स, टेलीमेडिसिन और ऑनलाइन परामर्श से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान हुई है। सेफ्टी ऐप्स, जीपीएस और हेल्पलाइन सेवाएं महिलाओं की सुरक्षा को भी सुदृढ़ कर रही हैं।
मुख्य अतिथि श्रीमती कुसुम कंडवाल ने अपने संबोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ महिलाओं को निर्णय-निर्माण, नेतृत्व और शासन के प्रत्येक स्तर पर समान अवसर, अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं और नेतृत्व में महिलाओं की भागीदारी न केवल लैंगिक समानता को बढ़ाती है, बल्कि शासन की गुणवत्ता, संवेदनशीलता और प्रभावशीलता को भी मजबूत करती है। वर्तमान समय में प्रशासनिक और राजनीतिक क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला-बाल सुरक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को प्राथमिकता मिल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंच महिलाओं के लिए अपने अधिकारों, समस्याओं और उपलब्धियों को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं।
कार्यशाला के अति विशिष्ट अतिथि, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता दिलीप ताहिल ने कहा कि फिल्म उद्योग में तकनीकी विकास ने महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल कैमरा, एडिटिंग सॉफ्टवेयर, वीएफएक्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने महिलाओं को निर्देशक, लेखक, सिनेमेटोग्राफर और निर्माता के रूप में नए अवसर प्रदान किए हैं। तकनीक के माध्यम से महिलाएं अब अपनी कहानियाँ स्वयं कह रही हैं और सशक्त महिला पात्रों को दर्शकों तक पहुँचा रही हैं।
विशिष्ट अतिथि वैज्ञानिक डॉ. पूनम गुप्ता ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल क्लासरूम और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक महिलाओं की पहुंच सरल हुई है। दूर-दराज क्षेत्रों की महिलाएं भी अब घर बैठे कौशल विकास और उच्च शिक्षा प्राप्त कर पा रही हैं।
शिक्षाविद प्रो. रीमा पंत ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक महिलाओं को अपनी आवाज उठाने, नेटवर्क बनाने और नेतृत्व में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान कर रही है। ई-गवर्नेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाएं नीति-निर्माण और सामाजिक परिवर्तन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि समान पहुंच, उचित प्रशिक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, तो तकनीक महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त नेतृत्वकर्ता के रूप में उभार सकती है, जो समावेशी और सतत विकास के लिए आवश्यक है।
कार्यशाला में डीएवी पीजी कॉलेज की एनसीसी छात्राएं, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून की छात्राएं, यूसैक के वैज्ञानिक, कार्मिक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. नीलम रावत द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डीएवी पीजी कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट डॉ. अर्चना पाल, महिला प्रौद्योगिकी संस्थान देहरादून के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंशुल, यूसैक के वैज्ञानिक डॉ. प्रियदर्शी उपाध्याय, डॉ. आशा थपलियाल, डॉ. गजेन्द्र सिंह, श्री शशांक लिंगवाल, श्री पुष्कर सिंह, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्री आर.एस. मेहता, जनसंपर्क अधिकारी श्री सुधाकर भट्ट सहित देवेश कपरवान, सौरभ डंगवाल एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
