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अंकिता प्रकरण: महापंचायत में सीबीआई जांच के दायरे और प्रक्रिया को लेकर प्रस्ताव पारित

– जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री को प्रक्रिया से अलग रखने की मांग

– डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर के आधार पर जांच पर आपत्ति, कई नामों को जांच के दायरे में लाने का प्रस्ताव

देहरादून, 8 फरबरी। अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए गए। इनमें प्रमुख रूप से यह मांग शामिल रही कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पद से हटाकर उन्हें भी सीबीआई जांच के दायरे में लाया जाए। महापंचायत में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि इस मामले की सीबीआई जांच डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की एफआईआर के आधार पर न कराई जाए। महापंचायत में अंकिता के माता-पिता भी उपस्थित रहे।


अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से परेड ग्राउंड में आयोजित इस महापंचायत में लगभग 40 संगठनों ने भागीदारी की। इंडिया गठबंधन की घटक राजनीतिक पार्टियों ने भी इस आयोजन को समर्थन दिया। महापंचायत की अध्यक्षता अंकिता की माता सोनी देवी और पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने की।


जस्टिस फॉर अंकिता मंच श्रीनगर की रेशमा पंवार, महिला किसान अधिकार मंच ऊधम सिंह नगर की हीरा जंगपांगी, उत्तराखंड महिला मंच नैनीताल की बसंती पाठक, राज्य आंदोलनकारी ऊषा भट्ट और भारत ज्ञान विज्ञान समिति की उमा भट्ट ने पंच के रूप में महापंचायत का संचालन किया।

पंचों की ओर से कुल पांच प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिन्हें उपस्थित संगठनों और प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से पारित किया। पहले प्रस्ताव में डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई। दूसरे प्रस्ताव में अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र के आधार पर, सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग रखी गई।


तीसरे प्रस्ताव में यह कहा गया कि घटना के बाद साक्ष्यों के संरक्षण और जांच से जुड़े सार्वजनिक बयानों के मद्देनज़र, मुख्यमंत्री को भी जांच प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए तथा निष्पक्ष जांच पूरी होने तक उन्हें पद से पृथक रखा जाए।
चौथे प्रस्ताव में मांग की गई कि पीड़ित पक्ष की शिकायत के आधार पर 15 दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। ऐसा न होने की स्थिति में राज्यव्यापी आंदोलन तेज करने की बात कही गई।
पांचवें प्रस्ताव में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को उनके वर्तमान दायित्वों से मुक्त कर जांच के दायरे में लाने का प्रस्ताव पारित किया गया।
महापंचायत के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन भी प्रेषित किया गया। ज्ञापन में डॉ. अनिल जोशी की एफआईआर को निरस्त करने, अंकिता के माता-पिता के पत्र के आधार पर सीबीआई जांच कराने और अन्य संबंधित मांगों को शामिल किया गया। ज्ञापन का पाठ तुषार रावत ने मंच से पढ़कर सुनाया।
अंकिता के पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने कहा कि उनके और मुख्यमंत्री के बीच हुई मुलाकात को लेकर समाज में गलत धारणाएं फैलाई गईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री से भेंट के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच कराने की मांग का पत्र सौंपा था। उन्होंने यह भी कहा कि वे डॉ. अनिल जोशी को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते और एफआईआर दर्ज होने से पहले या बाद में उनका उनसे कोई संपर्क नहीं रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यदि जांच किसी विवादित आधार पर आगे बढ़ती है, तो निष्पक्षता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण सीबीआई जांच को लेकर भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं और सभी पहलुओं की पारदर्शी जांच आवश्यक है।
सीपीआई (माले) के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी विस्तृत तथा निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता चारु तिवारी ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं का उल्लेख करते हुए प्रभावी कानून व्यवस्था और संवेदनशील प्रशासनिक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।
महापंचायत में उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, लोक वाहिनी के राजीवलोचन शाह, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के पीसी तिवारी, सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी, गौरव सैनिक संगठन के महावीर राणा, राजस्थान से आईं सरिता भारतके सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मंच संचालन निर्मला बिष्ट ने किया।
सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, शिवानी पांडेय, गीता गैरोला सहित अन्य कलाकारों ने जनगीत प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम में डॉ. रवि चोपड़ा, नंदन नंदन पांडेय, परमजीत सिंह कक्कड़, अनूप नौटियाल, प्रभात ध्यानी, माया चिलवाल, लोकेश नवानी, पद्मा गुप्ता, मनीष केडियाल, गरिमा दसौनी, डॉ. एसएन सचान, चंद्रकला, विमला कोली, स्वाति नेगी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

भावुक रहीं अंकिता की मां
महापंचायत के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी मंच पर उपस्थित रहीं, लेकिन भावनात्मक स्थिति के कारण उन्होंने कोई वक्तव्य नहीं दिया। कार्यक्रम के बाद मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने विनम्रतापूर्वक अस्वीकार कर दिया। उपस्थित लोगों ने उन्हें कैमरों और माइकों से दूर रखते हुए वाहन तक पहुंचाया।
अंकिता के पिता वीरेन्द्र सिंह भंडारी ने संक्षिप्त रूप से कहा— “मेरी बेटी नहीं झुकी, तो मैं कैसे झुक सकता हूं।”

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