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गढ़वाल विश्वविद्यालय के प्रो. बिष्ट जम्मू-कश्मीर की उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति में शामिल

 It is a moment of great pride for Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal Central University that Professor M.P.S. Bisht, an expert in Himalayan disaster studies, has been nominated as a member of the High-Level Expert Committee on Hazard, Vulnerability and Risk Assessment (HVRA) constituted by the Government of Jammu and Kashmir. 

श्रीनगर (गढ़वाल), 13 फरवरी। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं हिमालयी आपदा अध्ययन के विशेषज्ञ प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट को जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा गठित “हैज़र्ड, वल्नरेबिलिटी एंड रिस्क असेसमेंट (HVRA)” विषयक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति में सदस्य नामित किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग, जम्मू-कश्मीर द्वारा 06 फरवरी 2026 को जारी सरकारी आदेश संख्या 168-JK (GAD) 2026 के अंतर्गत इस समिति का गठन किया गया है।

यह समिति जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तथा वनाग्नि सहित बहु-आपदाओं के जोखिम का वैज्ञानिक आकलन करेगी। साथ ही खतरा मानचित्रण, जोन निर्धारण, HVRA एटलस की तैयारी तथा अल्पकालीन, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक रणनीतियों को शासन एवं विकास योजनाओं में एकीकृत करने हेतु ठोस सिफारिशें प्रस्तुत करेगी।

प्रो. एम.पी.एस. बिष्ट पिछले चार दशकों से उत्तराखंड हिमालय में प्राकृतिक आपदाओं—भूस्खलन, भूकंप, हिमस्खलन और बाढ़—पर गहन शोध कार्य कर रहे हैं। वर्ष 1985 से वे हिमालयी भू-प्रक्रियाओं का निरंतर अध्ययन कर रहे हैं तथा भारतीय अंतरिक्ष उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण को अपने शोध का महत्वपूर्ण आधार बनाते रहे हैं।

उत्तरकाशी भूकंप एवं चमोली भूकंप, वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा, रेणी-तपोवन त्रासदी तथा जोशीमठ भू-धंसाव जैसे संवेदनशील मामलों में उन्होंने विशेषज्ञ के रूप में समय-समय पर उत्तराखंड सरकार एवं भारत सरकार को परामर्श प्रदान किया और निवारक उपाय सुझाए।

हाल ही में 29–30 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) में आयोजित हिमालयी राज्यों की परामर्श समिति की बैठक में भी प्रो. बिष्ट ने अपने विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए हिमालयी जोखिम न्यूनीकरण के मुद्दों पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।

जम्मू-कश्मीर की इस उच्च स्तरीय समिति में उनका नामांकन न केवल उनकी व्यक्तिगत विशेषज्ञता की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है, बल्कि हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता का भी प्रमाण है। विश्वविद्यालय परिवार ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन और सतत विकास के क्षेत्र में संस्थान की सुदृढ़ भूमिका की पुष्टि बताया है।

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