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सौर तूफानों के रहस्य से उठा पर्दा ; सौर विस्फोट जीवन के लिए बन सकते हैं खतरा

चित्र: बाएँ: संख्यात्मक सिमुलेशन का एक स्नैपशॉट जो दिखा रहा है कि सौर विस्फोट कैसे प्रारंभ हो रहे हैं और सूर्य से निकल रहे हैं। दाएँ: तीन परिदृश्यों (नीला, पीला और लाल क्रमशः असफल, एकल और कई विस्फोटों के लिए) के लिए टोटल अन्साइन्ड करंट हाइलाइटिस का समयानुसार विकास। असफल, एकल और कई विस्फोट मामलों के लिए फ्लक्स रोप निर्माण समय को नीली, पीली और लाल खड़ी रेखाएँ दर्शाती हैं। काली बिंदीदार खड़ी रेखा शियर के अंत को दर्शाती है। समय शियर की शुरुआत से मापा गया है

In a new study, researchers from the Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences (ARIES), an autonomous institute under the Dept. of Science & Technology (DST) , Govt. of India, and their collaborators used computational models that simulate the behavior of electrically conducting fluids like plasma, interacting with magnetic fields (magnetohydrodynamic (MHD) simulations) to uncover two critical factors that govern these eruptions, known as Coronal Mass Ejections (CMEs). The findings reveal that Sun’s global magnetic field acts like a ‘magnetic cage’, while the rapid build-up of magnetic twist provides the key to unlocking it.

 

-BY- JYOTI RAWAT-

वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष के उन शक्तिशाली और विनाशकारी सौर विस्फोटों को समझने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है, जो हमारी तकनीक और जीवन के लिए खतरा बन सकते हैं। ये सौर उभार या कोरोनल मास एजेक्शन (CME) न केवल पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में हलचल पैदा करते हैं, बल्कि उपग्रहों, पावर ग्रिडों और अंतरिक्ष में मौजूद यात्रियों के लिए भी गंभीर जोखिम उत्पन्न करते हैं। सौर मौसम के सटीक पूर्वानुमान में सबसे बड़ी चुनौती यह समझना रहा है कि सूर्य की कौन सी चुंबकीय संरचनाएं कब और कैसे फटेंगी। मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) सिमुलेशन एक अत्यंत जटिल और शक्तिशाली गणितीय तकनीक है, जिसका उपयोग ब्रह्मांड में मौजूद ‘प्लाज्मा’ के व्यवहार को समझने के लिए किया जाता है। सरल शब्दों में कहें तो यह तरल पदार्थों की गतिशीलता (Fluid Dynamics) और विद्युत-चुंबकत्व (Electromagnetism) का एक अद्भुत संगम है।

 

चुंबकीय पिंजरा और विस्फोट की कुंजी

नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (ARIES) के शोधकर्ताओं, जिनमें पीएचडी छात्र नितिन वशिष्ठ और डॉ. वैभव पंत शामिल हैं, ने एक उन्नत कंप्यूटेशनल मॉडल के जरिए इस गुत्थी को सुलझाया है। उनके अध्ययन से पता चला है कि सूर्य का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र एक ‘चुंबकीय पिंजरे’ की तरह काम करता है जो इन विस्फोटों को रोक कर रखता है। जब यह पिंजरा कमजोर होता है, तो सौर पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति में मामूली वृद्धि भी इन विस्फोटों को रोक सकती है, जिससे वे सतह पर ही वापस गिर जाते हैं।

सौर चक्र 24 की अनसुलझी पहेली

यह शोध सौर चक्र 24 से जुड़ी एक पुरानी पहेली का जवाब भी देता है। पिछले चक्रों की तुलना में सौर चक्र 24 चुंबकीय रूप से कमजोर था, फिर भी इसने रिकॉर्ड संख्या में CME उत्पन्न किए। टीम के सिमुलेशन यह स्पष्ट करते हैं कि कमजोर चुंबकीय पिंजरे के कारण छोटी घटनाओं को भी अंतरिक्ष में निकलने का रास्ता मिल गया। इस निष्कर्ष ने उस सिद्धांत को मजबूती दी है जो बताता है कि सूर्य का बाहरी आवरण कैसे इन विस्फोटों की सीमा तय करता है।

भविष्य की सटीक भविष्यवाणी का नया आधार

अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ‘हेलिसिटी’ या चुंबकीय ऊर्जा के बढ़ने की दर से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने ‘एब्सलूट नेट करंट हेलिसिटी’ (ANCH) नामक एक नया पैमाना पहचाना है। उन्होंने देखा कि केवल ऊर्जा की मात्रा मायने नहीं रखती, बल्कि यह कितनी तेजी से जमा होती है, वह सबसे निर्णायक है। यदि यह ऊर्जा धीरे-धीरे बढ़ती है, तो विस्फोट विफल हो जाता है, लेकिन इसकी तीव्र वृद्धि हमेशा एक सफल और शक्तिशाली CME का संकेत होती है।

सुरक्षित भविष्य की ओर एक कदम

डॉ. वैभव पंत के अनुसार, ये सिमुलेशन एक ‘आभासी प्रयोगशाला’ की तरह हैं जो हमें सूर्य की भौतिकी की गहराई तक ले जाते हैं। अब अगला लक्ष्य इन निष्कर्षों को वास्तविक दुनिया के अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान प्रणाली में बदलना है। इससे न केवल हम आने वाले सौर तूफानों को समय रहते पहचान सकेंगे, बल्कि अपने संचार उपग्रहों और बिजली प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों की बेहतर सुरक्षा भी कर पाएंगे।

प्लाज्मा: ब्रह्मांड का चौथा रूप

सूर्य और अधिकांश तारे ठोस, तरल या गैस नहीं हैं; वे प्लाज्मा से बने हैं। प्लाज्मा एक ऐसी अवस्था है जहाँ गैस इतनी गर्म हो जाती है कि उसके परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन खो देते हैं, जिससे वह विद्युत का सुचालक (Conductive) बन जाता है। क्योंकि प्लाज्मा चार्ज्ड होता है, यह चुंबकीय क्षेत्रों (Magnetic Fields) के प्रति बहुत संवेदनशील होता है।

MHD सिमुलेशन क्या है?

MHD दो शब्दों से मिलकर बना है: Magneto (चुंबकीय क्षेत्र) और Hydrodynamic (तरल पदार्थों की गति)।

जब वैज्ञानिक सूर्य पर होने वाले विस्फोटों का अध्ययन करते हैं, तो वे भौतिकी के कुछ बुनियादी समीकरणों (जैसे मैक्सवेल के समीकरण और नेवियर-स्टोक्स समीकरण) को मिलाकर कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार करते हैं। यह सिमुलेशन हमें यह देखने की अनुमति देता है कि सूर्य की सतह पर चुंबकीय रेखाएं कैसे खिंचती हैं, आपस में उलझती हैं और अंततः टूटकर सौर तूफान (CME) के रूप में बाहर निकलती हैं।

यह काम कैसे करता है?

सूर्य पर चुंबकीय क्षेत्र एक ‘जेल’ या ‘पिंजरे’ की तरह व्यवहार करते हैं। MHD सिमुलेशन में शोधकर्ता निम्नलिखित कारकों का विश्लेषण करते हैं:मैग्नेटिक रिकनेक्शन: जब चुंबकीय रेखाएं बहुत अधिक तनाव में आकर टूटती हैं और फिर से जुड़ती हैं, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है। यही सौर विस्फोट का मुख्य कारण है। ऊर्जा का संचय: सिमुलेशन यह ट्रैक करता है कि सूर्य के कोरोना (बाहरी वातावरण) में कितनी ‘हेलिसिटी’ (चुंबकीय मोड़) जमा हो रही है।द्रव गति: प्लाज्मा का घनत्व, दबाव और वेग चुंबकीय क्षेत्र को कैसे प्रभावित कर रहे हैं

 

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