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सुप्रीम कोर्ट सख्त: कचरा प्रबंधन नियमों की अनदेखी पर अब अब होगा मुकदमा दर्ज

 

नियमों की अवहेलना प्रशासनिक चूक नहीं, आपराधिक जिम्मेदारी मानी जाएगी

नयी दिल्ली, 22 फरबरी। ठोस कचरा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्थानीय निकायों, अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी। अदालत ने कहा है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के उल्लंघन पर न केवल जुर्माना बल्कि आपराधिक अभियोजन भी किया जाएगा। ये नए नियम एक अप्रैल से प्रभावी हो रहे हैं।
न्यायालय ने कहा कि जो भी व्यक्ति या अधिकारी अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं करता, या लापरवाही, सहयोग अथवा उपेक्षा के जरिए नियमों के उल्लंघन में योगदान देता है, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब इसे सामान्य प्रशासनिक त्रुटि मानकर छोड़ा नहीं जाएगा।
स्थानीय निकायों को समय-सीमा तय करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्येक नगर निकाय और स्थानीय संस्था को निर्देश दिया है कि वे ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के शत-प्रतिशत अनुपालन के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करें और उसे सार्वजनिक रूप से घोषित करें। न्यायालय ने कहा कि बिना समयबद्ध योजना के नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है।
तीन स्तरों पर होगी सख्त कार्रवाई
अदालत ने नियमों के पालन के लिए तीन-स्तरीय प्रवर्तन प्रणाली लागू करने के आदेश दिए हैं। इसके तहत प्रारंभिक उल्लंघन पर तत्काल जुर्माना लगाया जाएगा। यदि लापरवाही जारी रहती है तो पर्यावरण कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। गंभीर मामलों में नागरिकों से लेकर निकायों के शीर्ष अधिकारियों तक की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।
चार धाराओं में होगा कचरे का पृथक्करण
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एक अप्रैल से कचरा प्रबंधन में सख्त द्विआधारी व्यवस्था लागू की जाए। इसके अंतर्गत गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाला कचरा चार अलग-अलग श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पुराने कचरा डंपिंग स्थलों के निस्तारण के लिए अलग और समयबद्ध कार्ययोजना बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हर घर तक पहुंचे नियमों की जानकारी
अदालत ने स्थानीय निकायों को आदेश दिया है कि ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद कर उसे हर घर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए वॉयस कॉल, नोटिस, सोशल मीडिया और निर्वाचित वार्ड प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया है।
स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल होंगी कचरा प्रबंधन की अच्छी प्रथाएं
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया गया है कि ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी अच्छी और व्यवहारिक प्रक्रियाओं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए। अदालत ने पार्षदों, महापौरों और वार्ड सदस्यों को अपने क्षेत्रों में नागरिकों को कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी है।
अनुपालन की होगी फोटोग्राफिक निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि स्थानीय निकाय अपने अनुपालन से संबंधित फोटोग्राफिक साक्ष्य जिला कलेक्टर कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजेंगे, जिससे जमीनी स्तर पर वास्तविक प्रगति की जांच की जा सके। बड़े कचरा उत्पादकों को 31 मार्च तक नए नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर निगमों की होगी रैंकिंग, रिपोर्ट सार्वजनिक होगी
पर्यावरण मंत्रालय को देश के प्रमुख नगर निगमों को ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन के आधार पर वर्गीकृत करने और उसकी रिपोर्ट एक केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों और न्यायाधिकरणों से भी अनुरोध किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नए ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रभावी पालन की निगरानी करें। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब ठोस कचरा प्रबंधन को केवल नीति और कागजों तक सीमित रखने का समय खत्म हो चुका है, इसे जमीन पर सख्ती से लागू करना अनिवार्य है।

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