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क्वांटम विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस 2026 का भव्य आयोजन

* क्वांटम विश्वविद्यालय में गूंजी मातृभाषाओं की स्वर लहरियाँ, ‘शिक्षा में बहुभाषिकता’ पर हुआ भव्य आयोजन
* मातृभाषाओं के सम्मान में क्वांटम विश्वविद्यालय में सृजनात्मकता और संस्कृति का संगम
* मातृभाषा दिवस पर क्वांटम विश्वविद्यालय बना भाषाई एकता का मंच

रुड़की, 22  फरवरी । रुड़की स्थित क्वांटम विश्वविद्यालय के मीडिया अध्ययन विभाग तथा मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर “शिक्षा में बहुभाषिकता” विषय पर विश्वविद्यालय के श्यामजी ऑडिटोरियम में एक भव्य, विचारोत्तेजक एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषाई विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना, मातृभाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करना तथा शिक्षा में बहुभाषिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तराखंड सरकार की मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया, जिसने ज्ञान, संस्कृति एवं भाषाई चेतना के प्रसार का प्रतीकात्मक संदेश दिया।

अपने प्रेरक उद्बोधन में कुलपति प्रो. (डॉ.) विवेक कुमार ने कहा कि “भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और परंपराओं की वाहक होती है।” उन्होंने विद्यार्थियों को वैश्विक युग में बहुभाषिक दक्षता विकसित करने तथा अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाओं के प्रति भी समान सम्मान रखने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) गोविंद सिंह ने अपने विचारों में मातृभाषाओं के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “मातृभाषा हमारी जड़ों से जुड़ाव का सबसे सशक्त माध्यम है।” उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपनी भाषाई विरासत को संजोए रखें और डिजिटल युग में भी स्थानीय भाषाओं को सशक्त बनाने में योगदान दें।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने विविध भारतीय भाषाओं और लोक परंपराओं की जीवंत झलक प्रस्तुत की। विभिन्न राज्यों की लोकभाषाओं पर आधारित नृत्य, गीत एवं नाट्य प्रस्तुतियों ने ‘एकता में विविधता’ की भावना को साकार किया। इन प्रस्तुतियों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि भाषाई और सांस्कृतिक समृद्धि के महत्व को भी प्रभावी ढंग से दर्शाया। वहीं रचनात्मकता और अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने हेतु अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिनमें रील निर्माण, पोस्टर निर्माण, निबंध लेखन, नृत्य, कहानी वाचन एवं कविता पाठ प्रमुख रहे। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने विभिन्न भाषाओं के माध्यम से अपने विचारों को अभिव्यक्त किया, जिससे बहुभाषिकता की वास्तविक भावना परिलक्षित हुई।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) मनीष श्रीवास्तव, निदेशक, क्वांटम स्कूल ऑफ बिजनेस ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी विशिष्ट अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों के सक्रिय सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में न केवल रचनात्मकता का विकास करते हैं, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ते हैं।

यह आयोजन विद्यार्थियों में मातृभाषाओं के प्रति जागरूकता, सम्मान एवं गर्व की भावना को सुदृढ़ करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुआ। साथ ही, इसने शिक्षा में बहुभाषिकता की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया कि भाषाई विविधता ही भारत की वास्तविक शक्ति है और इसके संरक्षण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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