राजनीति

सरकारी अधिकारियों पर हमले लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा: गणेश गोदियाल

देहरादून, 22 फरवरी. उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री गणेश गोदियाल ने वन विभाग के आशारोड़ी रेंज कार्यालय में वन विकास निगम के कर्मचारियों पर हुए हमले तथा ननूरखेड़ा में भाजपा विधायक उमेश शर्मा की अगुवाई में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए जानलेवा हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि भाजपा शासन में जिस प्रकार सरकारी कार्यालयों, अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमले हो रहे हैं, उससे प्रदेश की कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था भी ध्वस्त होती दिखाई दे रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में भू-माफिया, शराब माफिया और खनन माफिया हावी हो चुके हैं तथा इन्हें सरकार का संरक्षण प्राप्त है। उनका कहना था कि राज्य में असामाजिक तत्वों और अपराधियों के मन से कानून का भय समाप्त होता जा रहा है। राजधानी देहरादून में खुलेआम आपराधिक घटनाएँ हो रही हैं और जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में सरकारी कार्यालयों में घुसकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मारपीट की घटनाएँ अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आशारोड़ी तथा प्रारंभिक शिक्षा निदेशक पर हुए हमलों को निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल के विधायक के नेतृत्व में किसी अधिकारी पर हमला किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। जनसेवा में लगे अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर हिंसक घटनाएँ किसी भी लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकतीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विद्यालय का नाम परिवर्तन करना किसी एक अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं होता, बल्कि यह निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाता है। सरकारी अधिकारी और कर्मचारी कानून के दायरे में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उन पर हमला न केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा पर आघात है, बल्कि शासन व्यवस्था, प्रशासनिक मनोबल और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी सीधा प्रहार है। ऐसी घटनाएँ समाज में भय और अराजकता का वातावरण उत्पन्न करती हैं।

श्री गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार से मांग की कि दोनों घटनाओं के दोषियों की तत्काल पहचान कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी, ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर बढ़ते हमले अत्यंत चिंताजनक हैं और यह कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरे का संकेत हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति व्यक्त करने के अनेक संवैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यम उपलब्ध हैं, किंतु हिंसा और धमकी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। उन्होंने पुनः दोहराया कि दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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