टैरिफ़ पर टैरिफ़ नहीं चलेगा !

by-milind khandekar-
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ लगाने के अधिकारों पर रोक लगा दी है. ट्रंप ने पिछले साल भर में दुनिया भर के देशों पर रातोंरात टैरिफ़ लगा दिया था. वो IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत टैरिफ़ लगा रहे थे. अब कोर्ट ने कहा कि वो कांग्रेस ( वहाँ की संसद) की मंज़ूरी के बिना टैरिफ़ नहीं लगा सकेंगे. हिसाब किताब में समझेंगे कि क्या टैरिफ़ को हथियार बनाने का खेल खत्म होगा?
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला
सबसे पहले तो समझ लीजिए कि टैरिफ़ देश में आने वाले सामान पर लगने वाला टैक्स है. डोनाल्ड ट्रंप की दलील रही है कि अमेरिका आने वाले सामान पर कम टैरिफ़ लगाता है लेकिन अमेरिका से जाने वाले सामान पर दूसरे देश मोटा टैरिफ़ लगाते हैं . इससे अमेरिका नुक़सान में है. व्यापार घाटा बढ़ रहा है. कंपनियाँ अमेरिका के बजाय दूसरे देशों में फैक्ट्री लगाती हैं. नौकरियाँ वहाँ मिलती हैं जबकि सामान ख़रीदने वाले अमेरिका को कुछ नहीं मिलता है.
ट्रंप ने इसी आधार पर दुनिया भर के देशों पर टैरिफ़ लगा दिया. उन्होंने IEEPA के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर यह टैरिफ़ लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप के पास इस तरह से टैरिफ़ लागू करने का अधिकार नहीं है.उन्हें कांग्रेस से मंज़ूरी लेनी चाहिए थी. ट्रंप ने कांग्रेस को किनारे रखकर टैरिफ़ लगाए थे.
अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी ट्रंप के पास टैरिफ़ लगाने के रास्ते हैं. पहले उन्होंने उसी कानून के तहत 10% टैरिफ़ लगा दिया, फिर 24 घंटे के भीतर बढ़ाकर 15% कर दिया. यह टैरिफ़ अस्थायी है. सिर्फ 150 दिन तक लागू रहेगा. इसके बाद ट्रंप को दूसरा रास्ता खोजना पड़ेगा.
उनके पास दूसरे क़ानूनों के तहत ग़लत तरीक़े से व्यापार करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर टैरिफ़ लगाने का अधिकार है. इस अधिकार का इस्तेमाल ताबड़तोड़ नहीं हो सकता है. पहले जाँच बैठाई जाती है, सुनवाई होती है. फिर टैरिफ़ लगता है जैसे स्टील और एल्युमीनियम पर लगाया गया है.लंबी प्रक्रिया है.
भारत का क्या होगा?
भारत दुनिया में जितना सामान एक्सपोर्ट करता है उसका क़रीब 18% अमेरिका में बिकता है. ट्रेड वॉर से एक्सपोर्ट पर बुरा असर पड़ रहा था. इसी महीने ट्रेड डील की घोषणा हुई. टैरिफ़ 18% तय हुआ था. अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद ट्रंप ने भारत समेत सभी देशों पर 15% टैरिफ़ कर दिया है. अभी डील साइन नहीं हुई है. सवाल बना हुआ है कि क्या समझौता 18% टैरिफ़ पर होगा या उससे भी कम. इसका जवाब अभी देना मुश्किल है लेकिन ट्रंप के ताबड़तोड़ टैरिफ़ लगाने के अधिकारों में कटौती अच्छी ख़बर है. भारतीय अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता कम हो सकती है. शेयर बाज़ार के लिए भी अच्छी ख़बर है क्योंकि बाज़ार हमेशा इसी डर में जी रहा था कि पता नहीं सुबह उठने पर कौनसा नया टैरिफ़ लग जाएगा? टैरिफ़ 10% से बढ़कर 15% ज़रूर हुआ है लेकिन राहत की बात इतनी है कि इस क़ानून के तहत टैरिफ़ 15% से ज़्यादा नहीं हो सकता है.
