विश्व पृथ्वी दिवस पर हिमालय को लेकर चेतावनी, श्वेत पत्र जारी

*2 अरब लोगों की जीवनरेखा खतरे में! भूस्खलन और वर्षा में बढ़ोतरी, नया नजरिया जरूरी*
नई दिल्ली, 22 अप्रैल : विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर सीपी कुकरेजा फाउंडेशन फॉर डिज़ाइन एक्सीलेंस ने नई दिल्ली में ‘द फ्यूचर ऑफ द हिमालयाज’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण श्वेत पत्र जारी किया है। यह रिपोर्ट हिमालयी विकास के मौजूदा दृष्टिकोण पर पुनर्विचार की आवश्यकता को रेखांकित करती है जिसपर विश्व की लगभग एक चौथाई आबादी (करीब 2 अरब लोग) जल, खाद्य सुरक्षा और पारिस्थितिक संतुलन के लिए निर्भर हैं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अरुणाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू उपस्थित रहे।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय हिमालयी क्षेत्र में 1950 के दशक से अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में 15–20% की वृद्धि हुई है जिससे भूस्खलन का खतरा और अवसंरचना पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह स्थितियां अलग-अलग घटनाएं नहीं बल्कि विकास मॉडल और नाजुक पर्वतीय पारिस्थितिकी के बीच गहरे असंतुलन का परिणाम हैं। श्वेत पत्र हिमालयी विकास के दृष्टिकोण में एक मूलभूत बदलाव का आह्वान करता है। इसके प्रमुख सुझावों में परियोजना-आधारित दृष्टिकोण से हटकर प्रणाली-स्तरीय योजना अपनाना, विकास रणनीतियों को जलग्रहण और बेसिन-स्तर की पारिस्थितिक प्रक्रियाओं के साथ जोड़ना, नीति-निर्माण में वैज्ञानिक आंकड़ों का समावेश करना तथा भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप अवसंरचना डिजाइन को बढ़ावा देना शामिल है। साथ ही पारिस्थितिकी वहन क्षमता (Carrying Capacity) को एक अनिवार्य मानदंड के रूप में मान्यता देने पर भी जोर दिया गया है।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए *अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने कहा* कि “पर्वतीय राज्यों में विकास के लिए संतुलित दृष्टिकोण बेहद जरूरी है, जहां पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि हिमालय आज एक संवेदनशील मोड़ पर है और विकास को पर्यावरणीय संतुलन के साथ आगे बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।” उन्होंने आगे कहा कि “हिमालयी क्षेत्र के विकास के लिए वैज्ञानिक आकलन, जिम्मेदार योजना, सतत अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी और मजबूत नीतिगत समन्वय को एकीकृत ढांचे में शामिल करना होगा। साथ ही, नीति आयोग सहित सभी नीति-निर्माताओं, डेवलपर्स और वैश्विक हितधारकों को मिशन मोड में मिलकर कार्य करना होगा, ताकि हर विकास निर्णय में दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।”
श्वेत पत्र का परिचय देते हुए, *सीपी कुकरेजा फाउंडेशन फॉर डिज़ाइन एक्सीलेंस के निदेशक दिक्षु सी. कुकरेजा* ने कहा कि “विश्व पृथ्वी दिवस पर ‘द फ्यूचर ऑफ द हिमालयाज’ श्वेत पत्र का विमोचन इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति हमारी जिम्मेदारी को रेखांकित करता है। सड़क, जलविद्युत और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में विकास आवश्यक है, लेकिन इसके कारण हो रहे अपरिवर्तनीय नुकसान को देखते हुए हमें एक समग्र, विज्ञान-आधारित नीति ढांचे की ओर बढ़ना होगा। यह श्वेत पत्र दीर्घकालिक, टिकाऊ और लचीले विकास के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की वकालत करता है।”
यह श्वेत पत्र हाल ही में फाउंडेशन द्वारा आयोजित हुए एक बहु-विषयक हिमालयी राउंडटेबल का परिणाम है जिसमें शासन, अवसंरचना, पारिस्थितिकी, इंजीनियरिंग और सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञों ने भाग लेकर हिमालय क्षेत्र में बढ़ती विकास चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया था।
यह श्वेत पत्र हाल ही में आयोजित हुए एक बहु-विषयक हिमालयी राउंडटेबल का परिणाम है जिसमें शासन, अवसंरचना, पारिस्थितिकी, इंजीनियरिंग और सामाजिक विज्ञान के विशेषज्ञों ने भाग लेकर हिमालय क्षेत्र में बढ़ती विकास चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया था।
फाउंडेशन ने जोर दिया कि इन चुनौतियों का समाधान केवल समन्वित, बहु-क्षेत्रीय प्रयासों से ही संभव है, जिसमें डेटा-आधारित नीति-निर्माण, सामुदायिक भागीदारी और दीर्घकालिक लचीलापन (Resilience) पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना होगा। रिपोर्ट के निष्कर्ष में एक नए हिमालयी विकास मॉडल की आवश्यकता पर बल दिया गया है जो पारिस्थितिक सीमाओं के अनुरूप, सांस्कृतिक संदर्भों के प्रति संवेदनशील और संस्थागत समन्वय से समर्थित हो।
*सीपी कुकरेजा फाउंडेशन फॉर डिज़ाइन एक्सीलेंस के बारे में:*
यह फाउंडेशन जटिल सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु डिज़ाइन-आधारित सोच को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अनुसंधान, संवाद और जन सहभागिता के माध्यम से यह संस्था टिकाऊ और संदर्भ-संवेदी विकास को प्रोत्साहित करती है।
