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पोखरी में अफसरों के खाली पदों से चरमराई व्यवस्था, जनप्रतिनिधियों ने सीएम से की स्थायी तैनाती की मांग

– राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट-

पोखरी, 21 अप्रैल : उत्तराखंड की सियासत का अहम केंद्र माने जाने वाले विकासखंड पोखरी में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था पटरी से उतरी नजर आ रही है। तहसील, विकासखंड कार्यालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जैसे प्रमुख विभाग लंबे समय से स्थायी अधिकारियों के अभाव में प्रभारियों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इसका खामियाजा सीधे आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर पोखरी में रिक्त पड़े सभी प्रमुख पदों पर शीघ्र स्थायी नियुक्ति किए जाने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण तहसील में प्रशासनिक ढांचे का कमजोर होना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।

तहसील में अफसर नहीं, कामकाज प्रभावित

पोखरी तहसील में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार के पद लंबे समय से रिक्त हैं। वर्तमान में एसडीएम का प्रभार कर्णप्रयाग के उपजिलाधिकारी के पास है, जबकि नायब तहसीलदार को तहसीलदार का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। कर्णप्रयाग में पहले से अधिक कार्यभार होने के कारण एसडीएम पोखरी को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं।

इसका परिणाम यह है कि तहसील से जुड़े दैनिक कार्यों में देरी हो रही है। मूल निवास, आय, जाति और चरित्र प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए लोगों को कई-कई दिन चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दूरस्थ गांवों से आने वाले लोगों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

विकास कार्यों पर भी पड़ा असर

विकासखंड कार्यालय में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) का पद रिक्त होने के कारण कार्यालय प्रभारी अधिकारी के भरोसे संचालित हो रहा है। इससे विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में सुस्ती आ गई है। कई योजनाएं कागजों में सिमटकर रह गई हैं, जबकि कुछ कार्य अधूरे पड़े हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोखरी में अधीक्षक का पद खाली होने से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं। प्रभारी अधीक्षक के सहारे अस्पताल का संचालन किया जा रहा है, जिससे व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। मरीजों को बेहतर इलाज और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

करीब दो माह पूर्व जिलाधिकारी द्वारा पोखरी के उपजिलाधिकारी का स्थानांतरण गैरसैंण तहसील में किए जाने के बाद से यह पद रिक्त चल रहा है। तब से लेकर अब तक स्थायी तैनाती न होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

बड़े नेताओं की गृह तहसील, फिर भी बदहाल व्यवस्था

गौरतलब है कि पोखरी क्षेत्र राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद भट्ट, बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला और पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी की गृह तहसील है। इसके बावजूद यहां प्रशासनिक पदों का लंबे समय तक खाली रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने जताई नाराजगी

ज्ञापन भेजने वालों में ब्लॉक प्रमुख राजी देवी, नगर पंचायत अध्यक्ष सोहन लाल, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद पंत, पूर्व प्रमुख नरेंद्र रावत, जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र सिंह राणा, व्यापार मंडल जिला मंत्री कुंवर सिंह चौधरी, राज्य आंदोलनकारी संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष कुंवर सिंह खत्री, विष्णु प्रसाद चमोला, संतोष चौधरी, रमेश चौधरी, प्रधान संगठन ब्लॉक अध्यक्ष तेजपाल रावत, विधायक प्रतिनिधि धीरेन्द्र राणा, दिनेश रडवाल और इंद्र प्रकाश रडवाल सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हैं।

जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही स्थायी अधिकारियों की तैनाती नहीं की गई, तो क्षेत्र में जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से जनहित में तत्काल प्रभाव से उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, खंड विकास अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक की नियुक्ति करने की मांग की है, ताकि क्षेत्र की चरमराई प्रशासनिक व्यवस्था को शीघ्र पटरी पर लाया जा सके।

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