क्षेत्रीय समाचार

आपदा प्रभावित गांवों के विस्थापन की उठी मांग, नव भारत मिशन ने शासन-प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की अपील

 

– महिपाल गुसाईं –

गोपेश्वर, 22 अप्रैल। चमोली जिले के नंदानगर (घाट) प्रखंड के स्वैच्छिक संगठन नव भारत मिशन ने कहा है कि बीते वर्ष सितंबर में आई आपदा से बुरी तरह प्रभावित लोग आज भी भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। आगामी मानसून सीजन को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता बनी हुई है। पिछले वर्ष की आपदा के दर्दनाक अनुभवों को याद कर लोग आज भी सिहर उठते हैं। मिशन ने शासन-प्रशासन से आपदा पीड़ितों की तत्काल सुध लेने की अपील की है।

मिशन के अनुसार नंदानगर क्षेत्र के आपदा पीड़ितों के घाव अब भी हरे हैं। आपदा के समय पीड़ितों के आंसू पोंछने के लिए पक्ष-विपक्ष के कई जनप्रतिनिधि पहुंचे थे, लेकिन प्रारंभिक दिलासा देने के बाद दोबारा कोई हालचाल लेने नहीं आया। उस समय विस्थापन और पुनर्वास को लेकर कई घोषणाएं की गईं, परंतु धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप लोगों का सरकारी वादों पर भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है।

नव भारत मिशन ने बताया कि कुंतरी सैंती, कुंतरी फाली, घाट बैंड, लक्ष्मी मार्केट, धुर्मा और सेरा जैसे गांवों में आपदा के दौरान खेत-खलिहान और ग्रामीणों के घर-आंगन बुरी तरह तबाह हो गए थे। उस समय क्षतिग्रस्त परिसंपत्तियों को बचाने और पुनर्वास की दिशा में हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन पूरा वित्तीय वर्ष बीत जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्य शुरू नहीं हो पाया। न तो प्रभावितों का पुनर्वास हुआ और न ही क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के संरक्षण का कार्य आगे बढ़ सका। खेत-खलिहान आज भी आपदा के घावों की कहानी बयान कर रहे हैं।

मिशन ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि भी इस मामले में स्वयं को असहाय महसूस कर रहे हैं और पीड़ितों की मांगों को आगे बढ़ाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि बीते वर्ष 17 सितंबर को आई आपदा से प्रभावित ग्रामीण अब हताश और निराश हो चुके हैं। आपदा के दौरान जिन परिवारों को जन-धन की हानि हुई, उन्हें पांच-पांच लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई, लेकिन इसके बाद अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं और सुरक्षा उपायों की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। जिन लोगों ने अपने परिजनों को खोया, उन्हें आर्थिक सहायता देने के अलावा दीर्घकालिक सुरक्षा और पुनर्वास की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल आगामी मानसून को लेकर है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई, तो मानसून के दौरान उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी और वे कहां रहेंगे। विस्थापन के स्थान को लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे लोगों में असमंजस बना हुआ है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए नव भारत मिशन, नंदानगर (चमोली) ने जिला प्रशासन, शासन और प्रदेश के मुखिया को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। विशेष रूप से जिला अधिकारी चमोली से संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावितों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की अपील की गई है।

मिशन का कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में प्रभावित लोगों का सुरक्षित पुनर्वास सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिला प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित बताए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों को आशंका है कि कहीं कार्रवाई में देरी अगली आपदा को आमंत्रित न कर दे। मिशन ने राज्य सरकार से इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाने की मांग दोहराई है।

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