आईएमए के इतिहास में नया अध्याय: पहली बार महिला जीसी बनेंगी सेना अधिकारी
13 जून को होने वाली पासिंग आउट परेड में शामिल होंगी आठ महिला कैडेट, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी समीक्षा
-उषा रावत द्वारा-
देहरादून, 30 मई। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून के इतिहास में 13 जून 2026 का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। पहली बार अकादमी की पासिंग आउट परेड (पीओपी) में प्रशिक्षित महिला कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की राष्ट्रपति एवं सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर Droupadi Murmu परेड की समीक्षा अधिकारी (रिव्यूइंग ऑफिसर) होंगी।
आईएमए में जुलाई 2025 में शामिल हुईं आठ महिला कैडेटों का यह पहला बैच है, जिसने पुरुष कैडेटों के साथ समान सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये सभी भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में नियुक्त की जाएंगी। इससे भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
1932 में स्थापित आईएमए ने अब तक हजारों सैन्य अधिकारियों को तैयार किया है, लेकिन लगभग 94 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर होगा जब महिला कैडेट यहां से नियमित सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर अधिकारी बनकर निकलेंगी। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका के विस्तार और बदलते सैन्य परिदृश्य का प्रतीक है।
सेना मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार महिला कैडेटों सहित कुल कितने जेंटलमैन एवं महिला कैडेट इस बार कमीशन प्राप्त करेंगे, इसका अंतिम आंकड़ा परेड से एक-दो दिन पूर्व तय किया जाएगा। हालांकि आठों महिला कैडेट अपना प्रशिक्षण लगभग पूरा कर चुकी हैं और उनके कमीशन प्राप्त करने की पूरी संभावना है।
राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति इस समारोह को और अधिक ऐतिहासिक बना देगी। इससे पहले भी राष्ट्रपति पासिंग आउट परेड की समीक्षा करते रहे हैं, लेकिन महिला कैडेटों के पहले बैच के कमीशनिंग समारोह में उनकी मौजूदगी विशेष महत्व रखती है।
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यह उपलब्धि उन सामाजिक और संस्थागत बदलावों का परिणाम है, जिनके तहत महिलाओं के लिए सेना में अवसरों का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। हाल के वर्षों में महिलाओं को सेना की विभिन्न शाखाओं में स्थायी कमीशन, नेतृत्वकारी भूमिकाओं और राष्ट्रीय रक्षा अकादमियों में प्रवेश का अवसर मिला है। आईएमए से महिला अधिकारियों का पहला बैच निकलना उसी परिवर्तनकारी यात्रा की अगली कड़ी माना जा रहा है।
13 जून की यह पासिंग आउट परेड केवल नए सैन्य अधिकारियों के कंधों पर सितारे सजाने का समारोह नहीं होगी, बल्कि भारतीय सेना के इतिहास में महिला सशक्तीकरण और समान अवसरों की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी साबित होगी।

