सीपीएम राज्य समिति की बैठक में जल-जंगल-जमीन के मुद्दों पर आंदोलन तेज करने का निर्णय

देहरादून, 14 जून। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की उत्तराखंड राज्य समिति की दो दिवसीय बैठक रविवार को पार्टी राज्य कार्यालय सभागार में संपन्न हुई। बैठक में पार्टी पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड बीजू कृष्णन ने मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों तथा पार्टी की नीतियों पर विस्तार से विचार रखे।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय समिति सदस्य कॉमरेड राजेंद्र नेगी ने की, जबकि संचालन राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र पुरोहित ने किया।
अपने संबोधन में कॉमरेड बीजू कृष्णन ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार की आर्थिक और विदेश नीतियां बड़े कॉरपोरेट समूहों तथा अमेरिकी हितों से प्रभावित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोर पड़ती भूमिका तथा किसानों की समस्याओं की अनदेखी से देश को गंभीर नुकसान हो रहा है।

उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद किसानों की समस्याएं बरकरार हैं तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी न दिया जाना किसानों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।
बैठक में उत्तराखंड से जुड़े जल, जंगल और जमीन के सवालों को प्रमुखता से उठाते हुए इन मुद्दों पर व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का निर्णय लिया गया। पार्टी ने कहा कि पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बढ़ते जल संकट, अवैध खनन, वन कटान तथा किसानों की भूमि से जुड़े विवाद गंभीर चिंता का विषय हैं। इन मुद्दों को लेकर राज्यभर में संघर्ष कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
पार्टी ने आरोप लगाया कि पहाड़ों के जंगलों, नगर क्षेत्रों की झुग्गी-बस्तियों, नदी-नालों के किनारे तथा चाय बागानों में निवास कर रहे गरीब लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई बढ़ रही है। साथ ही भूमाफियाओं द्वारा विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर पछवादून में, भूमि पर अवैध कब्जों और कथित फर्जी नामांतरण के मामलों में वृद्धि हुई है। पार्टी का कहना है कि इन मामलों के खिलाफ संघर्ष कर रहे उसके नेताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। इसके विरोध में राज्य सचिवालय का घेराव करने की घोषणा की गई।
बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि राज्य में पलायन, बेरोजगारी, खराब सड़क व्यवस्था, शराब नीति तथा बढ़ती नशाखोरी जैसी समस्याएं गंभीर रूप धारण कर चुकी हैं। पार्टी ने इन मुद्दों को लेकर जनसंघर्ष तेज करने का निर्णय लिया।
बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) का उपयोग कई मामलों में आंदोलनकारियों और असहमति व्यक्त करने वाले लोगों के खिलाफ किया जा रहा है।
पार्टी नेताओं ने कहा कि हरिद्वार, देहरादून सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता धार्मिक ध्रुवीकरण सामाजिक सौहार्द के लिए चुनौती बन रहा है। साथ ही राज्य के बजट और विकास नीतियों को लेकर भी सरकार की आलोचना की गई।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय
राज्यभर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, जल संकट, वन विनाश और भूमाफियाओं की गतिविधियों के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली क्षेत्रों में निजीकरण के विरोध में जनअभियान संचालित किया जाएगा।
जिला और ब्लॉक स्तर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने तथा सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
केंद्र और राज्य में भाजपा की नीतियों के विरोध में वामपंथी एवं अन्य विपक्षी दलों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक संघर्ष चलाया जाएगा।
भूमि संबंधी मुद्दों को लेकर आगामी दिनों में सचिवालय पर विशाल जुलूस और प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
बैठक के समापन पर राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र पुरोहित ने कार्यकर्ताओं से जनसरोकारों के मुद्दों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पार्टी का संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
बैठक में महेंद्र जखमोला, भूपाल सिंह रावत, शिव प्रसाद देवली, लेखराज, नितिन मलेठा, माला गुरूंग, अनंत आकाश, मदन मिश्रा, बीरेंद्र गोस्वामी, कमरुद्दीन, आर.पी. जोशी, पुरुषोत्तम बड़ोनी, सत्त सिंह, भगवान सिंह राणा, राजा, कमलेश गौड़, हिमांशु चौहान, मनमोहन तथा अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
