सरकार और संगठन के मध्य सीएम धामी बना रहे बेजोड़ तालमेल
–महिपाल गुसाईं–
गोपेश्वर, 16 जून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पार्टी संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लगातार मजबूत कर रहे हैं। धामी लगातार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व दें। उनके यह प्रयास धरातल पर नजर भी आ रहे हैं। उनके इन प्रयासों से सीधा संदेश यह गया है कि वस्तुत सीएम धामी विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले दिनों में सरकार में पांच कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति और उसके बाद विभिन्न बोर्डों, आयोगों और सलाहकार समितियों में अब तक करीब एक सौ से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना उनकी समन्वय बढ़ाने की इन्हीं कोशिशों का प्रतिफल गिना जा सकता है। दरअसल पुष्कर सिंह धामी ने अपने बेहतर प्रयासों से जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए पसीना बहाने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल बहुत अधिक बढ़ाया है। इसमें दो राय नहीं कि धामी की इन कोशिशों से आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य सरकार की विभिन्न लोकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और संगठनात्मक स्तर पर एकजुटता मजबूत हुई है।
सरकार में संगठन के लोगों की राजनीतिक नियुक्तियों का विस्तार होने से विभिन्न निगमों और आयोगों में पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपे गए हैं। यह प्रयास इस लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाते हैं कि चुनाव से पहले पार्टी और सरकार के बीच पूर्ण संतुलन कायम हो। दायित्व वितरण में जो संतुलन दिखा है, उसकी राजनीतिक क्षेत्रों में तारीफ भी हुई है। विशेषता यह भी दिखी कि अपने समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ ही दूसरे दलों से भाजपा में आये नेताओं का सम्मान भी समान रूप से किया गया है।
दायित्व वितरण से पूर्व मंत्रिमंडल में खाली चल रहे सभी पांच पदों को भरा गया, जिससे प्रशासनिक कामकाज में गति और सरकार की पकड़ और मजबूत हुई है।
बहुत कम लोग इस बात को नोटिस करते हैं लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम पर पैनी नजर रखने वाले लोग मानते हैं कि धामी ने आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करने में न सिर्फ़ महारत हासिल कर ली है बल्कि अब वे पहले से अधिक परिपक्व भी दिखने लगे हैं। यह तथ्य उनके विरोधी भी मानने लगे हैं।वे आम जनता के साथ कार्यकर्ताओं से भी सीधा संवाद करते दिखते हैं तो दूसरी ओर कथित रूप से नाराज बताए जा रहे लोगों से भी आत्मीयता का संदेश देते दिखे हैं। गदरपुर के विधायक के आवास पर जाकर उनसे सहृदयता का प्रकृटीकरणा कर धामी ने तमाम अटकलों पर न सिर्फ विराम लगाया बल्कि आलोचकों के मुंह भी बंद किए हैं। तीन साल पहले तक उनका यह मिजाज नजर नहीं आता था लेकिन अब वे एक मंझे हुए राजनेता के रूप में स्थापित हो गये हैं।
प्रदेश का कोई जिला ऐसा नहीं है जहाँ धामी ने लोगों से सीधा संवाद न किया हो, चाहे वहां से विधायक विपक्ष का क्यों न हो।इसका प्रमाण तब साफ दिखा है जब विपक्ष के विधायकों को सरकार की नीति की तारीफ करते हुए जनता से उनका लाभ उठाने का आह्वान किया गया है। कार्यकर्ताओं से लगातार भेंट के चलते धामी सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल के उदाहरण की बड़ी लकीर खींचते दिख रहे हैं।
चमोली को मंत्रिमंडल में जगह नहीं, किंतु दायित्व पर्याप्त
गोपेश्वर। प्रदेश मंत्रिमंडल में सीमांत चमोली जिले को बेशक प्रतिनिधित्व नहीं मिला हो, किंतु दायित्व प्रदान करने में धामी सरकार ने कोई कंजूसी नहीं बरती। चमोली जिले से ही मुख्यमंत्री के पर्यटन सलाहकार बी. डी. सिंह काफी समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अलावा ऋषि प्रसाद सती उपाध्यक्ष बदरी केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष हैं तो हाल ही में पैनखंडा के ही माधव प्रसाद सेमवाल को बीकेटीसी में सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसी तरह हरक सिंह नेगी उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद, प्रेम सिंह राणा उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग, चंद्रकला तिवारी उपाध्यक्ष महिला आयोग, रामचंद्र गौड़ अध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद, रमेश गाड़िया, बलबीर गुनियाल जड़ी बूटी परिषद के अलावा कई अन्य लोग जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस लिहाज से कोई यह नहीं कह सकता कि चमोली जनपद की उपेक्षा की गई है। स्पष्ट है कि सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल का यह बेजोड़ उदाहरण पहली बार दिखा है।
