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हरिद्वार भूमि खरीद घोटाले में धामी सरकार का बड़ा एक्शन

In a major anti-corruption crackdown, the Uttarakhand government under Chief Minister Pushkar Singh Dhami has taken strict action in the Haridwar Municipal Corporation land purchase scam. Former Municipal Commissioner Varun Chaudhary has been recommended for immediate dismissal, while former District Magistrate Karmendra Singh faces major punishment for serious lapses. Additional actions include adverse entries and withholding of increments against other officials like SDM Ajayveer Singh. The Vigilance probe revealed criminal conspiracy and financial loss to the civic body. Criminal cases will be registered against 10 individuals, including officials and land sellers, under the Bharatiya Nyaya Sanhita and Prevention of Corruption Act. The move reinforces the government’s zero-tolerance policy against corruption.

पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति, तत्कालीन डीएम पर मेजर पनिशमेंट; 10 लोगों पर दर्ज होगा अभियोग

 

देहरादून, 19 जून ।  हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में उत्तराखंड सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक और दंडात्मक कार्रवाइयों में से एक करते हुए कई अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के संकल्प के तहत न केवल विभागीय कार्रवाई की गई है, बल्कि मामले में आपराधिक मुकदमे दर्ज करने का भी निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुई विस्तृत जांच और विजिलेंस की पड़ताल में भूमि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, वित्तीय नुकसान तथा आपराधिक षड्यंत्र के संकेत मिलने के बाद सरकार ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया है।

प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण चौधरी को गंभीर अनियमितताओं का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की गई है। वहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी पाते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को संस्तुति भेजी जा रही है।

इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के विरुद्ध परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने तथा उनकी तीन वेतन वृद्धियां रोकने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

प्रारंभिक जांच के बाद हुए थे निलंबित

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए थे। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के माध्यम से पूरे मामले की गहन पड़ताल कराई गई।

10 लोगों के खिलाफ दर्ज होगा मुकदमा

विजिलेंस की विस्तृत जांच में यह प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाया गया कि आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी के माध्यम से भूमि क्रय-विक्रय कर नगर निगम को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि विक्रेताओं के खिलाफ अभियोग दर्ज किए जाने को मंजूरी दे दी है।

दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जिन व्यक्तियों के खिलाफ अभियोग दर्ज किया जाएगा, उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट, तत्कालीन सहायक अभियंता एवं प्रभारी अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्राण, तत्कालीन संपत्ति लिपिक वेदपाल तथा तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भूमि विक्रेता एवं अन्य संबंधित व्यक्तियों में सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव तथा सुजीत कुमार सिंह के विरुद्ध भी मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार और जनधन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि हैं तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक स्पष्ट और सख्त संदेश है कि पद का दुरुपयोग करने तथा सरकारी धन को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। हरिद्वार भूमि खरीद प्रकरण में की गई यह कार्रवाई उत्तराखंड में जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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