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आज़ादी के 79 वर्ष बाद भी सड़क से वंचित विरसण सेरा के छह तोक, चार किमी पैदल चलने को मजबूर ग्रामीण

 

राजेश्वरी राणा की रिपोर्ट-
पोखरी, 30 जून। आजादी के 79 वर्ष बाद भी विकासखंड पोखरी की ग्राम पंचायत विरसण सेरा तथा इसके बणेथ, चेमड़ा, कयूरियाल खर्क, भनवाणी और मजयाणी तोक आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाए हैं। सड़क के अभाव में यहां के सैकड़ों ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति तब है, जब बदरीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला का पैतृक गांव भी विरसण सेरा के कयूरियाल खर्क तोक में स्थित है। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र प्रसाद भट्ट तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी की गृह तहसील के ये गांव आज भी सड़क की बाट जोह रहे हैं।
ग्राम प्रधान शंकर सिंह नेगी तथा ग्रामीण सत्येंद्र सिंह नेगी, सुखदेव सिंह और ईश्वर सिंह ने बताया कि विरसण सेरा में 60, बणेथ में 20, चेमड़ा में 30, कयूरियाल खर्क में 20 तथा भनवाणी और मजयाणी में लगभग 40 परिवार निवास करते हैं। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को राशन, गैस सिलेंडर, निर्माण सामग्री और अन्य दैनिक उपयोग का सामान बाजार से पीठ पर ढोकर चार किलोमीटर पैदल अपने गांव तक पहुंचाना पड़ता है।
ग्रामीणों के अनुसार सबसे अधिक कठिनाई बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में होती है। आपात स्थिति में मरीजों को चारपाई पर लादकर सड़क तक लाना पड़ता है, जिससे कई बार उपचार में देरी होने से गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं।
सड़क सुविधा के अभाव का असर सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गम परिस्थितियों के कारण लोग इन गांवों में रिश्तेदारी करने से भी कतराने लगे हैं, जिससे पलायन की समस्या और सामाजिक अलगाव बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के समक्ष सड़क निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने शासन और प्रशासन से विरसण सेरा सहित सभी छह तोकों को शीघ्र सड़क मार्ग से जोड़ने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीण व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

 

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