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जनरल धीरज सेठ ने संभाली थल सेना की कमान, बने 31वें सेना प्रमुख

नई दिल्ली, 30 जून (PIB)। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को भारतीय थल सेना के 31वें थल सेनाध्यक्ष (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ – COAS) के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने जनरल उपेन्द्र द्विवेदी का स्थान लिया, जो चार दशक से अधिक की विशिष्ट सैन्य सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए। केंद्र सरकार की नियुक्ति के बाद जनरल सेठ ने आधिकारिक रूप से सेना की कमान संभाली।

आर्मर्ड कोर (बख्तरबंद कोर) से आने वाले जनरल धीरज सेठ वर्ष 1997 में जनरल शंकर रॉय चौधरी के बाद इस कोर से सेना प्रमुख बनने वाले पहले अधिकारी हैं। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) और भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के पूर्व छात्र हैं तथा लगभग चार दशक के सैन्य करियर में उन्होंने कमान, स्टाफ, प्रशिक्षण और रणनीतिक नियुक्तियों सहित अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

सेना प्रमुख बनने से पहले जनरल सेठ उप थल सेनाध्यक्ष (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर कार्यरत थे। इससे पूर्व उन्होंने पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर महत्वपूर्ण सैन्य कमानों का नेतृत्व किया तथा सेना की दीर्घकालिक आधुनिकीकरण योजनाओं, सामरिक क्षमता विकास और भविष्य की युद्ध रणनीतियों के निर्माण में अहम भूमिका निभाई।

जनरल सेठ को विशेष रूप से प्रौद्योगिकी आधारित युद्ध क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन एवं मानव रहित प्रणालियों, साइबर एवं सूचना युद्ध, तथा एकीकृत थिएटर कमान की अवधारणा को आगे बढ़ाने वाला अधिकारी माना जाता है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके कार्यकाल में इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBGs) की अवधारणा को और मजबूती मिलेगी। साथ ही आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उपयोग, तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त संचालन (जॉइंटनेस) तथा सीमाओं पर परिचालन क्षमता को और सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त हुए पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि भविष्य के युद्ध अधिक संयुक्त, एकीकृत और थिएटर आधारित होंगे। उन्होंने अपने कार्यकाल में सैन्य आधुनिकीकरण, परिचालन तत्परता और रक्षा सुधारों को गति देने पर विशेष बल दिया।

जनरल धीरज सेठ ऐसे समय में सेना की कमान संभाल रहे हैं जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के व्यापक आधुनिकीकरण, नई युद्ध तकनीकों के समावेश तथा उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सशस्त्र बलों में व्यापक सुधारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना से भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सक्षम, तकनीक-संपन्न और आत्मनिर्भर सैन्य बल के रूप में विकसित होने की अपेक्षा की जा रही है।

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