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ब्रह्मांड की अब तक की सबसे व्यापक गणना की शुरुआत

वेरा सी. रुबिन वेधशाला ने दक्षिणी आकाश के सबसे बड़े और गहन सर्वेक्षण का अभियान शुरू किया

– कैटरीना मिलर

पृथ्वी पर स्थापित विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल कैमरा अब हमारे ब्रह्मांड की अब तक की सबसे विस्तृत और गतिशील तस्वीरें रिकॉर्ड करना शुरू कर चुका है। यह केवल स्थिर चित्र नहीं लेगा, बल्कि अगले दस वर्षों तक ब्रह्मांड में होने वाली निरंतर गतिविधियों का एक विशाल “चलचित्र” तैयार करेगा।

मंगलवार को वेरा सी. रुबिन वेधशाला (Vera C. Rubin Observatory) ने चिली के अटाकामा मरुस्थल की पर्वत-चोटी से दक्षिणी आकाश के अब तक के सबसे व्यापक और सबसे गहरे सर्वेक्षण की औपचारिक शुरुआत कर दी। आगामी एक दशक में यह अत्याधुनिक दूरबीन अरबों तारों और आकाशगंगाओं से आने वाले प्रकाश को दर्ज करेगी। इससे वैज्ञानिकों को सौरमंडल, हमारी आकाशगंगा (मिल्की वे) तथा उससे भी परे स्थित खगोलीय पिंडों की गति, उनकी चमक में होने वाले परिवर्तन और विस्फोट जैसी घटनाओं का अभूतपूर्व रिकॉर्ड प्राप्त होगा।

वेधशाला के संचालन से जुड़े एसएलएसी राष्ट्रीय त्वरक प्रयोगशाला (SLAC National Accelerator Laboratory) के उपनिदेशक फिल मार्शल ने द न्यूयॉर्क टाइम्स से कहा, “यह लगभग 30 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत है। हमारे लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

ब्रह्मांड के रहस्यों से उठेगा पर्दा

खगोलविदों का मानना है कि ‘लेगेसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम (Legacy Survey of Space and Time-LSST)’ नामक यह परियोजना ब्रह्मांड के बारे में हमारी समझ को पूरी तरह बदल सकती है। इससे वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि आकाशगंगा का जन्म कैसे हुआ, ब्रह्मांड में फैले अदृश्य डार्क मैटर का स्वरूप क्या है और किन प्रक्रियाओं ने आज के ब्रह्मांडीय ढांचे का निर्माण किया।

फिल मार्शल के अनुसार, इस सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल ज्ञात खगोलीय पिंडों का अध्ययन करना नहीं है, बल्कि ऐसी नई और अज्ञात घटनाओं की खोज करना भी है, जिनके अस्तित्व की अभी तक वैज्ञानिकों को जानकारी तक नहीं है।

उन्होंने कहा, “यह सर्वेक्षण हर उस चीज़ को देखने के लिए बनाया गया है, जिनकी हमें तलाश है और उन चीज़ों को भी, जिनकी तलाश करने के बारे में हमने अभी सोचा तक नहीं है।”

अमेरिका की संयुक्त वैज्ञानिक परियोजना

यह वेधशाला अमेरिकी ऊर्जा विभाग (U.S. Department of Energy) तथा नेशनल साइंस फाउंडेशन (National Science Foundation) की संयुक्त वित्तपोषित परियोजना है।

पिछले वर्ष इस वेधशाला की टीम ने ब्रह्मांड की कुछ अत्यंत आकर्षक तस्वीरें सार्वजनिक की थीं, जिनमें असंख्य तारे, आकाशगंगाएँ और अन्य खगोलीय संरचनाएँ दिखाई दी थीं। इन तस्वीरों ने यह संकेत दे दिया था कि रुबिन वेधशाला भविष्य में कितनी अद्भुत वैज्ञानिक खोजें कर सकती है।

अंतिम परीक्षणों के बाद शुरू हुआ अभियान

तब से वैज्ञानिक दूरबीन की सभी प्रणालियों का अंतिम परीक्षण और मूल्यांकन कर रहे थे। नेशनल ऑप्टिकल-इन्फ्रारेड एस्ट्रोनॉमी रिसर्च लेबोरेटरी में रुबिन वेधशाला के संचालन निदेशक बॉब ब्लूम के अनुसार, उनकी टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम किया कि दूरबीन अगले दस वर्षों तक विभिन्न मौसम और पर्यावरणीय परिस्थितियों में बिना किसी बाधा के कार्य कर सके।

हर दो रात में पूरे दक्षिणी आकाश की तस्वीर

इस दस वर्षीय सर्वेक्षण के दौरान रुबिन वेधशाला हर दो रात के भीतर पूरे दक्षिणी आकाश का एक बार अवलोकन करेगी।

हालांकि अभियान अभी शुरू ही हुआ है, लेकिन वैज्ञानिकों को प्रारंभिक चरण में ही महत्वपूर्ण सफलताएँ मिलनी शुरू हो गई हैं। अब तक 11,000 से अधिक नए क्षुद्रग्रह (Asteroids) खोजे जा चुके हैं। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने धूमकेतु 3I/ATLAS का भी अवलोकन किया है, जिसकी उत्पत्ति हमारे सौरमंडल के बाहर हुई मानी जाती है। इससे अंतरतारकीय पिंडों के अध्ययन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

विज्ञान के लिए होगा ‘सोने की खान’ साबित

आने वाले वर्षों में दुनिया भर के हजारों खगोल वैज्ञानिक इस वेधशाला द्वारा एकत्र किए जाने वाले विशाल डेटा का विश्लेषण करेंगे। यह डेटा उन्हें ब्रह्मांड के उन अत्यंत धुंधले और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने का अवसर देगा, जहाँ अब तक मानव कल्पना से परे अनेक नए खगोलीय पिंड और रहस्य छिपे हो सकते हैं।

फिल मार्शल का कहना है कि “यह सर्वेक्षण विज्ञान के लिए सचमुच सोने की खान (Gold Mine) साबित होगा।”

मानव इतिहास में पहली बार वैज्ञानिकों के पास ऐसा विशाल और विस्तृत खगोलीय अभिलेख होगा, जो न केवल ब्रह्मांड की वर्तमान स्थिति को समझने में मदद करेगा, बल्कि भविष्य की अनगिनत नई खोजों की आधारशिला भी बनेगा।

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