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उत्तराखंड में बढ़ रहे हैं भ्रष्टाचार मामलों के लंबित मुकदमे

  • तीन विशेष न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या तीन वर्षों में 368 से बढ़कर 506 हुई
  • उच्च न्यायालय से आरटीआई के तहत मिली जानकारी में हुआ खुलासा

काशीपुर, 17 जुलाई। उत्तराखंड सरकार भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करती रही है, लेकिन राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों के लंबित मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 की शुरुआत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे राज्य के तीन विशेष न्यायालयों में 368 मामले लंबित थे। यह संख्या 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर 506 हो गई।

यह जानकारी काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई है। नदीम उद्दीन ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित विशेष न्यायालयों में लंबित एवं निस्तारित मामलों का ब्यौरा मांगा था। इसके उत्तर में वर्ष 2026 में राज्य लोक सूचना अधिकारी एवं संयुक्त रजिस्ट्रार एच.एस. जीना ने पत्रांक-946 के माध्यम से सूचना उपलब्ध कराई। इससे पहले वर्ष 2024 और 2025 में भी इसी प्रकार की सूचनाएं तत्कालीन लोक सूचना अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराई गई थीं।

31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार राज्य के तीन विशेष भ्रष्टाचार निवारण न्यायालयों में कुल 506 मामले लंबित थे। इनमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश, सीबीआई) देहरादून की अदालत में 64 मामले, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश, विजिलेंस) देहरादून की अदालत में 248 मामले तथा द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश, विजिलेंस) हल्द्वानी की अदालत में 194 मामले लंबित थे।

वर्ष 2023 की पहली तिमाही में इन तीनों न्यायालयों में कुल 368 मामले लंबित थे। इनमें सीबीआई कोर्ट, देहरादून में 48, विजिलेंस कोर्ट, देहरादून में 192 तथा हल्द्वानी में 128 मामले शामिल थे।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में 98 नए मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 33 मामलों का निस्तारण हो सका। इसके परिणामस्वरूप वर्ष के अंत तक लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 433 हो गई। वर्ष 2024 में 79 नए मामले दर्ज हुए और 32 मामलों का निपटारा हुआ। वर्ष के अंत तक लंबित मामलों की संख्या 480 पहुंच गई। वर्ष 2025 में 48 नए मामले दर्ज हुए, जबकि केवल 22 मामलों का निस्तारण हुआ और वर्ष के अंत तक लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 506 हो गई।

आरटीआई से प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड उच्च न्यायालय में भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से संबंधित मामलों का लंबित बोझ बना हुआ है। वर्ष 2023 की शुरुआत में ऐसे कुल 226 मामले लंबित थे। इनमें 183 अपीलें, 16 रिवीजन याचिकाएं तथा धारा 482 के तहत 27 विविध प्रार्थना पत्र शामिल थे। वर्ष 2023 के अंत तक इनकी संख्या बढ़कर 249 हो गई, जिनमें 199 अपीलें, 16 रिवीजन और धारा 482 के तहत 34 विविध प्रार्थना पत्र शामिल थे।

वर्ष 2024 के अंत तक उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 294 हो गई। इनमें 200 अपीलें, 40 रिवीजन, धारा 482 के तहत 36 विविध प्रार्थना पत्र, धारा 528 के तहत 8 विविध प्रार्थना पत्र तथा 10 जमानत प्रार्थना पत्र शामिल थे।

हालांकि वर्ष 2025 के अंत और वर्ष 2026 की शुरुआत तक उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई और यह घटकर 290 रह गई। इनमें 201 अपीलें, 23 रिवीजन, धारा 482 के तहत 34 विविध प्रार्थना पत्र, धारा 528 के तहत 29 विविध प्रार्थना पत्र तथा 3 जमानत प्रार्थना पत्र लंबित थे।

आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन का कहना है कि आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का निस्तारण नए मामलों की तुलना में काफी धीमी गति से हो रहा है। इससे विशेष न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया की गति और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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