पृथ्वी जैसे निकटवर्ती ग्रह पर मिला वायुमंडल, जीवन की खोज में बड़ी वैज्ञानिक सफलता

It’s the first potentially habitable world known to host an atmosphere, making it a lead contender in the search for life beyond our solar system.
-कतरिना मिलर-
खगोल विज्ञान के क्षेत्र में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जो पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज को नई दिशा दे सकती है। खगोलविदों ने पहली बार एक ऐसे चट्टानी (रॉकी) ग्रह पर वायुमंडल (एटमॉस्फियर) की स्पष्ट पुष्टि की है, जो अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र (हैबिटेबल ज़ोन) में स्थित है। यह खोज इस संभावना को मजबूत करती है कि ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे अन्य ग्रह भी मौजूद हो सकते हैं, जहां जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियां उपलब्ध हों।
वैज्ञानिकों के अनुसार, जीवन के लिए किसी ग्रह में कम से कम तीन प्रमुख विशेषताएं आवश्यक मानी जाती हैं—वह चट्टानी हो, उसकी सतह पर तरल पानी मौजूद रहने योग्य तापमान हो और उसके चारों ओर वायुमंडल हो। अब तक इन तीनों गुणों वाले किसी ग्रह पर वायुमंडल का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला था।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय से हाल ही में पीएचडी पूरी करने वाले ग्रह वैज्ञानिक कॉलिन चेरुबिम ने कहा, “फिलहाल हमारे पास इस ग्रह पर जीवन होने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि जीवन के लिए आवश्यक लगभग सभी बुनियादी तत्व वहां मौजूद हैं।”
एलएचएस 1140बी : पृथ्वी जैसा लेकिन अलग
यह ग्रह एलएचएस 1140बी (LHS 1140b) नाम से जाना जाता है। यह हमारे सौरमंडल से कुछ दर्जन प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और एक लाल बौने (रेड ड्वार्फ) तारे की परिक्रमा करता है। इसकी कक्षा उस दूरी पर है जिसे हैबिटेबल ज़ोन कहा जाता है, अर्थात जहां तापमान इतना अधिक नहीं होता कि पानी भाप बन जाए और न इतना कम कि वह पूरी तरह बर्फ में बदल जाए।
इस ग्रह की खोज वर्ष 2017 में हुई थी। यह पृथ्वी की तुलना में कुछ ठंडा है, लेकिन आकार और द्रव्यमान दोनों में पृथ्वी से बड़ा है।
पहली बार मिला वायुमंडल का स्पष्ट प्रमाण
साइंस (Science) पत्रिका में प्रकाशित नए शोध के अनुसार, एलएचएस 1140बी के चारों ओर हीलियम-समृद्ध वायुमंडल मौजूद है। यह पहली बार है जब किसी संभावित रूप से रहने योग्य चट्टानी ग्रह पर वायुमंडल होने का स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण मिला है।
यह खोज इस धारणा को मजबूत करती है कि ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसे अन्य ग्रह भी हो सकते हैं, जहां जीवन के लिए आवश्यक परिस्थितियां मौजूद हों।
मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की प्रसिद्ध खगोल भौतिकविद सारा सीगर, जो इस अध्ययन का हिस्सा नहीं थीं, कहती हैं, “जब एक ऐसा ग्रह मिला है तो निश्चित रूप से ऐसे और भी ग्रह होंगे। उम्मीद है कि यह खोज एक नए युग की शुरुआत साबित होगी।”
जीवन के लिए क्यों जरूरी है वायुमंडल?
वायुमंडल किसी भी ग्रह की रहने योग्य क्षमता का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यह ग्रह पर पानी को बनाए रखने, तापमान को नियंत्रित करने और अंतरिक्ष से आने वाले हानिकारक विकिरणों से सतह की रक्षा करने का काम करता है।
अब तक वैज्ञानिक गैसीय विशाल ग्रहों के वायुमंडल का पता लगा चुके थे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि अपेक्षाकृत छोटे चट्टानी ग्रह भी अरबों वर्षों तक अपना वायुमंडल सुरक्षित रख सकते हैं या नहीं।
डॉ. चेरुबिम ने वर्षों तक इस विषय पर सैद्धांतिक मॉडल विकसित किया। उनके अनुसार कुछ परिस्थितियों में हीलियम जैसी हल्की गैसें धीरे-धीरे अंतरिक्ष में निकलती रहती हैं। एलएचएस 1140बी ऐसा ही ग्रह है, जहां हीलियम लगातार अंतरिक्ष की ओर पलायन कर रही है।
लाल बौने तारे के आसपास की चुनौती
एलएचएस 1140बी जिस तारे की परिक्रमा करता है, वह रेड ड्वार्फ (लाल बौना) है। हमारी आकाशगंगा में इसी प्रकार के तारे सबसे अधिक संख्या में पाए जाते हैं। इनका आकार और तापमान अपेक्षाकृत कम होने के कारण इनके आसपास छोटे चट्टानी ग्रहों की खोज अपेक्षाकृत आसान होती है।
हालांकि, लाल बौने तारे अक्सर अत्यधिक ऊर्जा वाले विकिरण और सौर ज्वालाएं (फ्लेयर्स) छोड़ते हैं, जो पास स्थित ग्रहों का वायुमंडल नष्ट कर सकती हैं।
डॉ. चेरुबिम के अनुसार एलएचएस 1140बी का तारा सामान्य लाल बौनों की तुलना में काफी शांत है। यही कारण है कि यह ग्रह जीवन की संभावनाओं की खोज के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवारों में शामिल हो गया है।
चिली में हुई महत्वपूर्ण खोज
वर्ष 2024 में वैज्ञानिकों ने चिली स्थित लास कैंपानास वेधशाला के दूरबीनों की सहायता से एलएचएस 1140बी का अध्ययन किया, जब वह अपने तारे के सामने से गुजर रहा था। इस दौरान उन्हें ऊपरी वायुमंडल में हीलियम के विशेष रूप का संकेत मिला, जिससे स्पष्ट हुआ कि ग्रह का वायुमंडल मौजूद है और उसमें से हीलियम धीरे-धीरे अंतरिक्ष में निकल रही है।
सारा सीगर के अनुसार, “यह खोज बेहद सुंदर और स्पष्ट है। इसकी कोई दूसरी वैज्ञानिक व्याख्या संभव नहीं दिखती।”
फिर आया बड़ा आश्चर्य
वर्ष 2025 में वैज्ञानिकों ने दोबारा इसी ग्रह का अवलोकन किया। इस बार उन्हें हीलियम के बाहर निकलने के कोई संकेत नहीं मिले।
अध्ययन के सह-लेखक और कैलिफोर्निया स्थित कार्नेगी ऑब्जर्वेटरीज के ग्रह वैज्ञानिक श्रेयस विस्साप्रगड़ा ने कहा, “यह हमारे लिए बड़ा झटका था, लेकिन पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं।”
उन्होंने बताया कि इससे पहले गैसीय विशाल ग्रहों में हीलियम की मात्रा बदलते हुए देखी गई थी, लेकिन किसी चट्टानी ग्रह पर ऐसा पहली बार देखा गया है।
उनके अनुसार, “हम वास्तविक समय में पृथ्वी जैसे एक ग्रह के वायुमंडल में हो रहे बदलावों को देख रहे हैं। यह अपने आप में बेहद रोमांचक है।”
पृथ्वी जैसा, लेकिन पूरी तरह नहीं
हालांकि वैज्ञानिक इसे पृथ्वी जैसा ग्रह मानते हैं, लेकिन दोनों के बीच कई महत्वपूर्ण अंतर भी हैं।
- एलएचएस 1140बी अपने तारे की एक परिक्रमा केवल 25 दिनों से भी कम समय में पूरी कर लेता है, जबकि पृथ्वी को 365 दिन लगते हैं।
- यह ग्रह अपने तारे की ओर हमेशा एक ही हिस्सा दिखाता है। यानी वहां पृथ्वी की तरह दिन और रात का नियमित चक्र नहीं है।
- इसका वायुमंडल संभवतः हीलियम प्रधान है, जबकि पृथ्वी का वायुमंडल मुख्यतः नाइट्रोजन और ऑक्सीजन से बना है।
क्या ऐसे वातावरण में जीवन संभव है?
वैज्ञानिकों का मानना है कि सिद्धांततः ऐसे वातावरण में भी जीवन विकसित हो सकता है।
वर्ष 2020 में सारा सीगर के नेतृत्व में प्रकाशित एक अध्ययन में यह दिखाया गया था कि यीस्ट (खमीर) और ई. कोलाई (E. coli) जैसे सूक्ष्मजीव शुद्ध हीलियम वाले वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि एलएचएस 1140बी पर जीवन मौजूद है, बल्कि केवल यह कि वहां जीवन की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
जीवन की खोज में महत्वपूर्ण पड़ाव
एलएचएस 1140बी उन चुनिंदा चट्टानी ग्रहों में शामिल हो गया है, जिन्हें भविष्य में पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे ग्रहों का अध्ययन केवल दूसरे ग्रहों पर जीवन खोजने के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी पृथ्वी और ब्रह्मांड में अपनी स्थिति को बेहतर ढंग से समझने के लिए भी आवश्यक है।
डॉ. श्रेयस विस्साप्रगड़ा के शब्दों में, “हम यह जानना चाहते हैं कि पृथ्वी जैसे ग्रह वास्तव में कैसे होते हैं, ताकि ब्रह्मांड में अपनी जगह को बेहतर समझ सकें। एलएचएस 1140बी पर वायुमंडल की खोज पृथ्वी जैसे ग्रहों के विस्तृत अध्ययन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
