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वाहन-से-वाहन संचार प्रणाली : सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

V2V communication enables nearby vehicles to exchange real-time information, including their speed, position, direction, acceleration, etc. This information can provide advance warnings to drivers or vehicle systems in safety-critical situations, including sudden braking, forward-collision risk, unsafe lane changes and the approach of emergency vehicles. The 5.875 GHz to 5.925 GHz frequency band has been considered for V2V and other Intelligent Transportation System applications. The Department of Telecommunications, through G.S.R. 466(E) dated 10 June 2026, has exempted the use of this frequency band from licensing requirements.

नए वाहनों में चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य होगी V2V तकनीक

नई दिल्ली, 3 अगस्त। देश में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और कनेक्टेड मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle-V2V) संचार प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से अनिवार्य बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में संशोधन का मसौदा जारी कर इस संबंध में सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं।

मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर वर्ष करीब 1.68 लाख लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है, जबकि 4.6 लाख से अधिक लोग घायल होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं मानवीय भूल के कारण होती हैं। V2V तकनीक का उद्देश्य चालकों को संभावित दुर्घटना से कुछ सेकंड पहले ही चेतावनी देकर हादसों की संभावना को कम करना है।

क्या है V2V संचार तकनीक और कैसे करेगी काम?

V2V संचार प्रणाली के माध्यम से आसपास चलने वाले वाहन गति, स्थिति, दिशा और त्वरण (एक्सीलरेशन) जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों का रियल-टाइम में आदान-प्रदान कर सकते हैं। यह तकनीक पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों से अलग है, क्योंकि यह सीधे दृष्टि रेखा (Line of Sight) से परे की स्थिति का भी पता लगा सकती है।

इस तकनीक से ड्राइवरों को अचानक ब्रेक लगने, आगे से टक्कर का खतरा होने, असुरक्षित लेन बदलने, गलत दिशा में गाड़ी चलाने और आपातकालीन वाहनों (जैसे एम्बुलेंस) के आने की पूर्व चेतावनी मिल सकेगी। यह उन्नत चालक सहायता प्रणाली (ADAS) के साथ मिलकर हादसों को रोकने में बेहद कारगर साबित होगी।

यह प्रणाली सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (C-V2X) तकनीक पर आधारित होगी, जिसके माध्यम से वाहन एक-दूसरे के साथ वास्तविक समय (रियल टाइम) में अपनी गति, स्थिति, दिशा, त्वरण और अचानक ब्रेक लगाने जैसी सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे। इससे मोड़, घने कोहरे या भारी वाहनों के पीछे छिपे वाहनों का भी पहले से पता चल सकेगा और चालक को प्रतिक्रिया देने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

सरकार ने इसके लिए AIS-230 नामक तकनीकी मानक तैयार किया है। दूरसंचार विभाग ने इसके संचालन के लिए 5.875 से 5.925 गीगाहर्ट्ज (5.9 गीगाहर्ट्ज बैंड) स्पेक्ट्रम को लाइसेंस शुल्क से मुक्त कर दिया है। इस मानक के तहत साइबर सुरक्षा, रेडियो प्रदर्शन, रिसीवर संवेदनशीलता और विद्युतचुंबकीय अनुकूलता (EMC) जैसे कड़े मानदंड लागू होंगे।

प्रस्ताव के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से जिन एल, एम और एन श्रेणी के वाहनों में V2V प्रणाली होगी, उन्हें AIS-230 मानक का पालन करना होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से इन तीनों श्रेणियों के सभी नए निर्मित वाहनों में V2V प्रणाली अनिवार्य कर दी जाएगी। एल श्रेणी में दोपहिया और तिपहिया, एम श्रेणी में यात्री वाहन व बसें तथा एन श्रेणी में मालवाहक वाहन शामिल हैं।

इस तकनीक के तहत प्रारंभिक चरण में आपातकालीन ब्रेक चेतावनी, आगे से टक्कर की चेतावनी, गलत दिशा में चल रहे वाहन का अलर्ट तथा एम्बुलेंस एवं अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए पूर्व चेतावनी जैसी चार प्रमुख सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

मंत्रालय ने मसौदा अधिसूचना पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। समीक्षा के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होने पर भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहां कनेक्टेड व्हीकल तकनीक को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाएगा।

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