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मंगल ग्रह पर नासा के क्यूरियोसिटी रोवर को मिलीं मधुमक्खी के छत्ते जैसी रहस्मयी आकृतियाँ

A close-up of the polygon fractures discovered by NASA’s Curiosity Mars rover highlights their honeycomb-like textures NASA/JPL-Caltech/MSSS

As NASA’s Curiosity rover recently began climbing up a Martian valley nicknamed “Valle Grande,” it sent back images that were a familiar sight to mission scientists: honeycomb-like textures called polygonal fractures, each one about 1.5 to 3 inches (4 to 8 centimeters) across. The mission has spotted small patches of these geometric shapes several times before, but nothing at the scale discovered in Valle Grande.

मंगल पर मिला बहुभुज (Polygons) आकृतियों का समंदर

By- Andrew Good
Jet Propulsion Laboratory, Pasadena, Calif.

नासा का क्यूरियोसिटी रोवर हाल ही में मंगल ग्रह की “वैले ग्रांडे” (Valle Grande) नाम की एक घाटी की चढ़ाई कर रहा था, तभी उसने कुछ ऐसी तस्वीरें भेजीं जिन्हें देखकर मिशन से जुड़े वैज्ञानिक दंग रह गए! तस्वीरों में मधुमक्खी के छत्ते जैसी आकृतियों वाला एक विशाल मैदान दिखाई दिया, जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में ‘पॉलीगोनल फ्रैक्चर’ (Polygonal Fractures) कहा जाता है। इनमें से प्रत्येक आकृति लगभग 1.5 से 3 इंच (4 से 8 सेंटीमीटर) चौड़ी है।

मिशन के दौरान रोवर ने पहले भी कई बार ऐसी ज्यामितीय (Geometric) आकृतियों के छोटे-छोटे टुकड़े देखे थे, लेकिन ‘वैले ग्रांडे’ में जितनी बड़ी संख्या में यह आकृतियाँ मिली हैं, वैसा नज़ारा पहले कभी नहीं देखा गया।

मिशन के 4,930वें और 4,931वें मंगल दिवस (Sols)—यानी 19 और 20 जून को—रोवर ने एक 360-डिग्री पैनोरमा (चारों तरफ का विस्तृत दृश्य) कैमरे में कैद किया। इस तस्वीर में जहाँ तक नज़र जाती है, हर तरफ केवल यह बहुभुज आकृतियाँ ही फैली हुई दिखाई देती हैं। यहाँ तक कि पास में स्थित “मीराफ्लोरेस” (Miraflores) नाम की 20 फीट (6 मीटर) ऊंची एक टीले-नुमा पहाड़ी के किनारों पर भी ये आकृतियाँ लिपटी हुई हैं, जिसके शिखर पर रेत की मोटी परत जमा है।

“क्यूरियोसिटी की आंखों से हमने कई अद्भुत और आकर्षक परिदृश्य देखे हैं, लेकिन इन बहुभुज आकृतियों के इस पूरे समंदर ने हमारी सांसें थाम दीं,” दक्षिण कैलिफोर्निया में नासा की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट अश्विन वसावडा ने कहा। “हमने इनके आकार और रासायनिक बनावट की ध्यानपूर्वक जांच की है और हमें उम्मीद है कि इस डेटा में यह छिपा रहस्य ज़रूर मिलेगा कि ये अनोखी आकृतियां आखिर बनी कैसे थीं।”

NASA’s Curiosity Mars rover captured this sand-capped butte, nicknamed “Miraflores,” estimated to be about 20 feet (6 meters) tall, on June 11, 2026. The surrounding area includes an expanse of terrain covered in surface features called polygons. NASA/JPL-Caltech/MSSS

मिट्टी के सूखने से लेकर प्राचीन पानी के निशान तक

अतीत में रोवर को जो ऐसी आकृतियाँ मिली थीं, उनमें से कुछ स्पष्ट रूप से कीचड़ के सूखकर चटकने (Mud Cracks) के कारण बनी थीं। हालाँकि, ऐसी मधुमक्खी के छत्ते जैसी बनावट बनने के पीछे कई अन्य प्रक्रियाएं भी हो सकती हैं—जैसे कि बार-बार तापमान का गर्म और ठंडा होना, या फिर सतह के नीचे दबे होने के कारण तलछट (Sediment) से पानी का निचोड़कर बाहर निकल जाना।

5 अगस्त 2012 को मंगल की सतह पर उतरने के बाद से, पिछले 14 वर्षों में क्यूरियोसिटी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं—यह नई खोज उन्हीं में से एक है। सल्फर के क्रिस्टल और चमकते उल्कापिंडों (Meteorites) के अलावा, रोवर ने मंगल के प्राचीन वातावरण को लेकर कई महान खोजें की हैं। सबसे महत्वपूर्ण खोज यह रही है कि प्राचीन मंगल पर पानी, आवश्यक रसायन और पोषक तत्व मौजूद थे, जो सूक्ष्मजीवों (Microbial Life) का जीवन पनपने के लिए पूरी तरह अनुकूल थे।

क्या कभी मंगल पर जीवन था?

अरबों साल पहले, माउंट शार्प (3 मील यानी 5 किलोमीटर ऊंचा पर्वत, जिसकी चढ़ाई क्यूरियोसिटी 2014 से कर रहा है) की निचली पहाड़ियों पर झीलें और नदियाँ लहराती थीं। रोवर ने मंगल के इस जलीय इतिहास से जुड़े कई रासायनिक सुराग ढूंढे हैं, जिनमें कार्बन-आधारित अणु भी शामिल हैं—जिन्हें RNA और DNA (अनुवांशिक जानकारी ले जाने वाले दो मुख्य न्यूक्लिक एसिड) का पूर्ववर्ती (Precursors) माना जाता है।

वैज्ञानिक अभी निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि ये जैविक (Biologic) प्रक्रियाओं से बने थे या फिर केवल भौगोलिक/रासायनिक (Geologic) हलचलों का परिणाम थे, लेकिन इस खोज ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्राचीन काल में लाल ग्रह पर जीवन के फलने-फूलने के लिए बिल्कुल सही वातावरण मौजूद था।

मिशन के बारे में:

पासाडेना स्थित Caltech द्वारा प्रबंधित, JPL ने क्यूरियोसिटी का निर्माण किया था और वह नासा के ‘मार्स एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम’ के तहत वाशिंगटन स्थित नासा के साइंस मिशन डायरेक्टरेट की ओर से इस मिशन का नेतृत्व करता है।

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andrew.c.good@jpl.nasa.gov

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