Front Pageराष्ट्रीय

सड़क हादसों में मौतें घटाने के लिए 100 जिलों पर विशेष ध्यान

2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु 50 प्रतिशत घटाने का लक्ष्य, दुर्घटना पीड़ितों को सात दिन तक 1.5 लाख रुपये का नकदीरहित उपचार

 

मुंबई, 26 अगस्त। देश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने सर्वाधिक प्रभावित जिलों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार, आधुनिक प्रवर्तन व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर ठोस कार्ययोजना पर जोर दिया है। इसके लिए 15 राज्यों के ऐसे 100 जिलों की पहचान की गई है, जहां प्रत्येक जिले में औसतन हर साल 400 से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मृत्यु होती है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से मुंबई में आयोजित क्षेत्रीय मंथन सम्मेलन में सड़क सुरक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और उपायों की समीक्षा की गई। सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.एम. सप्रे की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य संजय बंद्योपाध्याय और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी महमूद अहमद सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी सम्मेलन में मौजूद रहे।

सम्मेलन में ‘शून्य मृत्यु वाला जिला’ पहल को सड़क सुरक्षा की महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में सामने रखा गया। इसके तहत देश के 15 राज्यों में 100 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु की संख्या अधिक है। इन जिलों में सड़क अभियांत्रिकी, प्रवर्तन, आपातकालीन चिकित्सा और जन-जागरूकता को जोड़ते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपाय किए जाएंगे। प्रत्येक जिले की दुर्घटनाओं के कारणों और स्वरूप का अलग-अलग अध्ययन कर उसी आधार पर कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।

दुर्घटना के बाद पहले एक घंटे को जीवन बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानते हुए सम्मेलन में पीड़ितों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने और उपचार शुरू करने की व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। बताया गया कि दुर्घटना के बाद ‘स्वर्णिम घंटे’ के भीतर अस्पताल पहुंचाए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है।

इसी उद्देश्य से ‘प्रधानमंत्री राहत’ योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से सात दिन तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये का नकदीरहित उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। यह सुविधा पीड़ित की बीमा स्थिति की परवाह किए बिना उपलब्ध होगी। इसके लिए सड़क दुर्घटना से संबंधित आंकड़ा प्रणाली को स्वास्थ्य सेवाओं और 112 आपातकालीन सेवा से जोड़ने की व्यवस्था की गई है, ताकि पुलिस, परिवहन और स्वास्थ्य विभागों के बीच तत्काल सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके और उपचार केवल भुगतान की व्यवस्था न होने के कारण न रुके।

दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘राह-वीर’ योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत गंभीर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने वाले मददगार को प्रति घटना 25 हजार रुपये और प्रशंसा प्रमाण-पत्र देने का प्रावधान है। ऐसे मददगारों को कानूनी संरक्षण भी दिया गया है, ताकि पुलिस या कानूनी प्रक्रिया के भय से लोग दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने से पीछे न हटें।

सम्मेलन में सड़क दुर्घटनाओं से युवाओं के सर्वाधिक प्रभावित होने पर भी चिंता व्यक्त की गई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों में 66.1 प्रतिशत की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होती है। इसे देखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने संयुक्त रूप से ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवकों को जिला स्तर की सड़क सुरक्षा गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।

ये स्वयंसेवक दुर्घटनास्थल पर समन्वय, सड़क सुरक्षा परीक्षण के लिए आंकड़े जुटाने तथा लोगों में जागरूकता बढ़ाने जैसे कार्यों में सहयोग करेंगे। विशेष रूप से सर्वाधिक सड़क दुर्घटना मृत्यु वाले 100 जिलों में जिला सड़क सुरक्षा समितियों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

सम्मेलन में दुर्घटनाओं के आंकड़ों के आधार पर स्थानीय स्तर पर समाधान तैयार करने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियों को केवल सामान्य अनुमान के आधार पर योजनाएं बनाने के बजाय यह पता लगाने को कहा गया कि दुर्घटनाएं वास्तव में किन स्थानों पर और किन कारणों से हो रही हैं। इसके बाद संबंधित क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार सड़क सुधार, प्रवर्तन, जागरूकता और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े उपाय किए जाएंगे।

इसके लिए पांच चरणों—समन्वय बैठक, क्षमता विकास, उपायों की योजना, क्रियान्वयन और प्रभाव आकलन—की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क सुरक्षा पर खर्च होने वाले संसाधनों का उपयोग उन स्थानों पर प्राथमिकता से हो, जहां दुर्घटनाओं और मौतों का जोखिम सबसे अधिक है।

सम्मेलन में कहा गया कि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु रोकने के लिए केवल यातायात नियमों का प्रवर्तन पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित सड़क निर्माण, सुरक्षित वाहन, दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच, तत्काल चिकित्सा सहायता, नागरिक सहभागिता और विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान एक साथ मजबूत करना होगा।

सम्मेलन के अंत में राज्यों और जिलों से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के मूल कारणों का विश्लेषण कर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। साथ ही प्रत्येक जिले में सड़क सुरक्षा योजना को मजबूत करने और किए गए उपायों के परिणामों की नियमित समीक्षा पर जोर दिया गया। केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में 50 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य रखा है। सम्मेलन में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिला स्तर की कार्रवाई को निर्णायक बनाने पर सहमति बनी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!