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कुंभ मेला-2027 के लिए 700 करोड़ से अधिक की लागत की योजनाओं पर तेजी से चल रहा काम

 

*निर्धारित टाइमलाइन के अनुसार आगे बढ़ रहीं तैयारियां, सभी कार्य तय समय पर होंगे पूरे : मेलाधिकारी सोनिका*

*गुणवत्ता, समयबद्धता के साथ सुविधा, सुरक्षा, सुगमता और सुव्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता*

हरिद्वार, 08 सितंबर । आगामी कुंभ मेला-2027 को भव्य, सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए चार जिलों में फैले 32 सेक्टरों वाले मेला क्षेत्र में अवस्थापना विकास की तस्वीर तेजी से बदल रही है। कुंभ से जुड़े 126 कार्यों के लिए अब तक लगभग 709.23 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और इन योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम तेजी से चल रहा है। वर्षाकाल समाप्त होते ही निर्माण कार्यों को और गति देते हुए युद्धस्तर पर आगे बढ़ाने की पूरी तैयारी मेला प्रशासन ने कर ली है।
मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका ने मंगलवार को मेला नियंत्रण भवन स्थित सीसीआर सभागार में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में कुंभ मेला की तैयारियों, निर्माण कार्यों और आगामी व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कुंभ मेला-2027 से जुड़े सभी प्रमुख कार्य निर्धारित टाइमलाइन के अनुसार चल रहे हैं और सभी कार्य तय समय पर पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कई बड़े निर्माण कार्य शीघ्र पूरे होने की स्थिति में हैं, जबकि सड़क एवं अन्य अवस्थापना विकास की योजनाओं को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।


मेलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन के लिए केवल कार्य पूरा कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्धारित गुणवत्ता के साथ समय पर कार्य पूरा करना लक्ष्य है। कुंभ की तैयारियों में सुविधा, सुरक्षा, सुगमता और सुव्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रत्येक परियोजना की प्रगति के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार एवं भारत सरकार से स्वीकृत एवं अनुमोदित योजनाओं के अंतर्गत सड़क, पुल, घाट, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, चिकित्सा, स्वच्छता एवं सैनिटेशन, यातायात, सौंदर्यीकरण सहित श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से जुड़ी सुविधाओं के लिए व्यापक स्तर पर कार्य हो रहे हैं। इनमें अधिकांश कार्य स्थायी प्रकृति के हैं, जिनका लाभ कुंभ के बाद भी हरिद्वार को मिलता रहेगा।
श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए पैदल यात्रियों के अनुकूल फुटपाथ विकसित करने की पहल की जा रही है। घाटों के विस्तार एवं सुधार के साथ पैदल आवागमन को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कुंभ नगरी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों के सुधार एवं सुदृढ़ीकरण के साथ आंतरिक सड़कों और गलियों के सुधार तथा बेहतर रखरखाव की भी व्यवस्था की जा रही है। यातायात के सुचारू संचालन के लिए पांच बड़े पुलों के निर्माण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण अवस्थापना कार्य प्रगति पर हैं।
मेलाधिकारी ने कहा कि कुंभ के दौरान हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को शहर में प्रवेश से लेकर घाटों तक पहुंचने और वापस लौटने तक बेहतर अनुभव मिले, इसी सोच के साथ प्रमुख मार्गों से लेकर आंतरिक गलियों तक व्यवस्थाओं को व्यवस्थित किया जा रहा है। सड़क, फुटपाथ, पुल, घाट और यातायात व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़कर समग्र रूप से विकसित किया जा रहा है।
हरिद्वार के आध्यात्मिक स्वरूप को और निखारने के लिए सौंदर्यीकरण के कार्यों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रमुख मार्गों, चौराहों, पुलों, घाटों और महत्वपूर्ण स्थलों को आकर्षक स्वरूप देने के साथ प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, ताकि कुंभ के दौरान हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को स्वच्छ, सुंदर और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव हो।
उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र के सभी 32 सेक्टरों में अस्थायी व्यवस्थाओं के लिए ड्रेसिंग एवं लेवलिंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। वर्षाकाल समाप्त होते ही इन सेक्टरों में अस्थायी सड़क, विद्युत, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाओं के कार्यों को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों एवं कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय कर आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी की जा रही हैं।
मेलाधिकारी ने कहा कि कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। मेला प्रशासन के अधिकारियों के साथ जिला स्तर के अधिकारियों को भी कुंभ मेला से संबंधित कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारी नियमित स्थलीय निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और टाइमलाइन की समीक्षा करेंगे। आवश्यकता के अनुसार तत्काल सुधारात्मक कदम भी उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि ग्रीन कुंभ की अवधारणा को भी तैयारियों का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, हरित क्षेत्र का संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण तथा अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कुंभ की भव्यता के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है।
मेलाधिकारी ने कहा कि कुंभ मेला हरिद्वार के लिए केवल एक बड़ा आयोजन नहीं, बल्कि शहर की दीर्घकालिक अवस्थापना को मजबूत करने का अवसर भी है। इसलिए स्थायी प्रकृति के कार्यों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि कुंभ के बाद भी इनका लाभ स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को मिलता रहे।
उन्होंने पत्रकारों से भी आग्रह किया कि वे कुंभ मेला की तैयारियों एवं कार्यों की प्रगति पर निरंतर नजर रखें और अपने उपयोगी सुझाव एवं फीडबैक मेला प्रशासन तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि मीडिया से प्राप्त रचनात्मक सुझाव कुंभ के सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने कुंभ मेला के निर्माण कार्यों की प्रगति एवं विभिन्न व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान उप मेलाधिकारी श्री मनजीत सिंह भी उपस्थित रहे।

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