ब्लॉगविज्ञान प्रोद्योगिकी

चांद की मिट्टी में छिपे हो सकते हैं अंतरिक्ष  प्राणियों   के निशान, वैज्ञानिक तलाशना चाहते हैं

1972 में अपोलो 16 मिशन से इकट्ठा किए गए चांद के नमूनों के साथ वैज्ञानिक। क्रेडिट…NASA

Researchers want to explore the idea that microscopic particles shed by alien civilizations have accumulated on the lunar surface, making it an archive of extraterrestrial technology.

 

By Becky Ferreira

 क्या चांद की धूल में किसी दूसरी दुनिया की सभ्यता के निशान छिपे हो सकते हैं? सुनने में यह किसी विज्ञान-कथा की कहानी जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों का एक दल इसे गंभीरता से जांचने की योजना बना रहा है।वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि हमारी आकाशगंगा में कभी कोई अत्यधिक विकसित तकनीकी सभ्यता रही होगी, तो उसके बनाए विशाल अंतरिक्ष यान, ऊर्जा संयंत्र, खनन परियोजनाएं या अन्य तकनीकी ढांचे समय के साथ टूटते और घिसते गए होंगे। इनसे निकले बेहद छोटे कण अंतरिक्ष में फैलकर दूसरे ग्रहों और उपग्रहों तक पहुंचे हो सकते हैं।

इनमें से कुछ कण संभवतः हमारे सौर मंडल तक भी पहुंचे हों और चांद की सतह पर जमा हो गए हों। शोधकर्ताओं का मानना है कि चांद की मिट्टी इसलिए ऐसी किसी प्राचीन बाहरी सभ्यता के तकनीकी अवशेषों को सुरक्षित रखने वाली प्राकृतिक ‘अभिलेखागार’ बन सकती है।

यह विचार SETI यानी Search for Extraterrestrial Intelligence से जुड़े वैज्ञानिकों के एक दल ने सामने रखा है। उनका अध्ययन फिलहाल International Journal of Astrobiology में समीक्षा के दौर में है।

चांद क्यों हो सकता है एलियन तकनीक का संग्रहालय?

शोध दल का तर्क है कि अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुएं हमेशा सुरक्षित नहीं रहतीं। समय के साथ विकिरण, छोटे उल्कापिंडों की टक्कर और अन्य प्रक्रियाएं किसी भी संरचना को धीरे-धीरे तोड़ सकती हैं। इससे सूक्ष्म कण अलग होकर अंतरिक्ष में फैल सकते हैं।

पृथ्वी पर इसका उदाहरण पहले से मौजूद है। हमारे उपग्रह और अंतरिक्ष यान भी समय के साथ सूक्ष्म मात्रा में सामग्री छोड़ते हैं। वैज्ञानिकों ने इसी प्रक्रिया को दूसरी सभ्यताओं पर लागू करके यह अनुमान लगाने की कोशिश की है कि उनके तकनीकी अवशेष आकाशगंगा में किस तरह फैल सकते हैं।

SETI इंस्टीट्यूट और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के बिर्कबेक कॉलेज से जुड़े वैज्ञानिक लुईस पिनॉल्ट के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में इन कणों की संभावित यात्रा का मॉडल तैयार किया गया है। उनका कहना है कि यदि आकाशगंगा में कभी कोई दूसरी तकनीकी सभ्यता अस्तित्व में रही है, तो उसके कुछ कणों का चांद तक पहुंचना पूरी तरह असंभव नहीं है।

चाँद के किसी एक सैंपल में एलियन टेक्नोसिग्नेचर (तकनीकी निशानी) मिलना बहुत मुश्किल है, लेकिन अगर चाँद की धूल में ऐसा कुछ मिल जाए, तो इससे उस दिलचस्प रहस्य का जवाब मिल जाएगा कि क्या पृथ्वी के बाहर भी जीवन है। क्रेडिट…NASA\SVS\Ernie T. Wright

इन कणों का नाम भी रखा गया

शोधकर्ताओं ने ऐसे काल्पनिक सूक्ष्म कणों को ‘Arkhipov particles’ नाम दिया है। यह नाम यूक्रेनी शोधकर्ता एलेक्सी वी. अर्किपोव के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने 1990 के दशक में यह विचार दिया था कि चांद एलियन कलाकृतियों के लिए एक तरह का प्राकृतिक संग्रह स्थल हो सकता है।

अब वैज्ञानिकों ने इसी विचार को बेहद छोटे स्तर पर आगे बढ़ाया है। ये कण माइक्रोन के आकार के हो सकते हैं—यानी लगभग एक जीवाणु के आकार के।

शोधकर्ताओं ने एक और संभावना पर भी विचार किया है। हो सकता है कि किसी दूसरी सभ्यता ने जानबूझकर बेहद छोटी मशीनें या स्वचालित जांच उपकरण अंतरिक्ष में भेजे हों। ऐसे संभावित उपकरणों को उन्होंने ‘Bracewell particles’ कहा है। इसका नाम भौतिक विज्ञानी रोनाल्ड ब्रेसवेल के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1960 के दशक में स्वायत्त एलियन जांच यानों की संभावना पर विचार किया था।

चांद की एक घन मीटर मिट्टी खंगालने की योजना

अब सवाल है कि इस विचार को परखा कैसे जाए? शोधकर्ताओं का सुझाव है कि चांद की सतह पर एक मिशन भेजकर शुरुआत में करीब एक घन मीटर मिट्टी की जांच की जाए। इसके लिए विशेष उपकरणों की मदद से मिट्टी को छाना जाएगा और उसमें ऐसे कण तलाशे जाएंगे, जो प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से निर्मित दिखाई दें।

इन कणों की तलाश में धातुओं और अन्य निर्मित पदार्थों की पहचान की जा सकती है। चांद की सतह पर मौजूद बड़े कृत्रिम ढांचों की पहचान के लिए विकसित किए गए कंप्यूटर मॉडल को भविष्य में बेहद छोटे कणों की खोज के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, इसमें एक बड़ी समस्या है।

एलियन कण मिला तो भी सवाल रहेगावह किसका है?

चांद पर अगर कोई कृत्रिम कण मिलता भी है, तो जरूरी नहीं कि वह एलियन सभ्यता का हो। पिछले कई दशकों में बड़ी संख्या में अंतरिक्ष यान और उनके हिस्से चांद पर गिर चुके हैं। ऐसे में वहां इंसानों के छोड़े हुए सूक्ष्म कण मिलना भी स्वाभाविक होगा।

इसलिए किसी संदिग्ध कण की रासायनिक संरचना का बेहद बारीकी से विश्लेषण करना होगा। वैज्ञानिकों को यह पता लगाना होगा कि वह पृथ्वी से आया है या वास्तव में किसी दूसरी दुनिया से।

यही कारण है कि वैज्ञानिक इस संभावना को लेकर उत्साहित होने के साथ-साथ सावधानी भी बरत रहे हैं।

नीडल इन हेस्टैकजैसी होगी खोज

SETI इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक सोफिया शेख, जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थीं, ने इस विचार को रचनात्मक और उपयोगी दिशा बताया है। उनके अनुसार, जैसे पृथ्वी पर समय के साथ इंसानों की बनाई चीजें टूटती-घिसती हैं, उसी तरह किसी दूसरी तकनीकी सभ्यता के अवशेष भी समय के साथ बिखर सकते हैं।

पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री और SETI शोधकर्ता जेसन राइट ने भी अध्ययन को विस्तृत और प्रभावशाली बताते हुए कहा कि वैज्ञानिकों ने एक पुराने और लगभग भुला दिए गए विचार को नए सिरे से सामने रखा है और दिखाया है कि यह संभावना पूरी तरह असंभव नहीं है।

फिर भी वैज्ञानिक खुद मानते हैं कि चांद की मिट्टी में एलियन तकनीक का कोई निशान मिल जाना बेहद मुश्किल होगा।

बिर्कबेक कॉलेज के ग्रह वैज्ञानिक इयान क्रॉफर्ड के अनुसार, यह सचमुच भूसे के ढेर में सुई तलाशने जैसा होगा। लेकिन अगर चांद की मिट्टी में एक भी ऐसा कण मिल गया, जिसकी बाहरी और कृत्रिम उत्पत्ति वैज्ञानिक रूप से पक्की हो गई, तो उसका महत्व असाधारण होगा।

क्योंकि तब यह सिर्फ एलियन तकनीक की खोज नहीं होगी। यह इस बात का भी सबसे मजबूत संकेत हो सकता है कि पृथ्वी के बाहर कभी किसी दूसरी तकनीकी सभ्यता का अस्तित्व था।

और अगर एक कण मिल गया, तो वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आकाशगंगा के इतिहास में ऐसे अवशेषों की संख्या शायद बहुत बड़ी हो सकती है।

फिलहाल यह एक साहसिक वैज्ञानिक परिकल्पना है, जिसका परीक्षण होना बाकी है। लेकिन अगर कभी चांद की धूल से किसी दूसरी सभ्यता का कोई सूक्ष्म निशान निकल आया, तो इंसान के ब्रह्मांड को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!