संस्कृत शिक्षा के विस्तार के लिए उत्तराखंड-गुजरात के बीच समन्वय पर जोर

देहरादून, 3 अक्टूबर। गुजरात संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं राज्य मंत्री हिमांजल पालीवाल ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार और इसे जनभाषा के रूप में विकसित करने के लिए उत्तराखंड और गुजरात के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने उत्तराखंड में चलाए जा रहे संस्कृत संभाषण कार्यक्रमों और संस्कृत ग्रामों की पहल की सराहना की।
उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा की गतिविधियों के अध्ययन के लिए एक अक्टूबर से चार दिवसीय भ्रमण पर आए पालीवाल और गुजरात संस्कृत शिक्षा बोर्ड के प्रशासनिक अधिकारी निकुंज पटेल ने भ्रमण के तीसरे दिन उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा निदेशालय और उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा परिषद का दौरा किया। संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार, निदेशक मंजू भारती और उपनिदेशक डॉ. वाजश्रवा आर्य ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
बैठक में गुजरात के प्रतिनिधिमंडल ने संस्कृत शिक्षा निदेशालय और परिषद की कार्यप्रणाली, संबंधित शासनादेशों, संस्थागत ढांचे, पद संरचना और विभिन्न योजनाओं की जानकारी ली। निदेशक मंजू भारती ने राज्य में संचालित संस्कृत शिक्षा कार्यक्रमों, विभागीय उपलब्धियों और प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी दी।
संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में संस्कृत के संवर्धन के लिए कई प्रयोग किए जा रहे हैं। इनमें विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों और विधायकों के लिए संस्कृत संभाषण, राज्य में द्विभाषी नाम पट्टिकाएं, प्रवेशिका संस्थाएं, ऑनलाइन संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण और सचिवालय में संस्कृत संभाषण कार्यक्रम शामिल हैं। उत्तराखंड संस्कृत संस्थान की ओर से भी विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित किया था। राज्य में विकसित किए जा रहे संस्कृत ग्रामों के माध्यम से स्थानीय समुदायों को संस्कृत सीखने के साथ भारतीय दार्शनिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
पालीवाल ने इन प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत में व्यापक संभावनाएं हैं और इसके प्रचार-प्रसार के लिए राज्यों के अनुभवों तथा सफल प्रयोगों को साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने संस्कृत को केवल शिक्षण संस्थानों तक सीमित रखने के बजाय आम बोलचाल से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
इस दौरान संस्कृत शिक्षा निदेशालय और संस्कृत शिक्षा परिषद के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।
