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अंकिता भंडारी हत्याकांड की गूंज सिक्किम तक : राज्यपाल की नियुक्ति पर छात्र संगठन ने उठाए सवाल

Students of Sikkim Central University and Govt Law College, Gangtok, have written to the state govt and President Droupadi Murmu, urging them to reconsider BJP leader Dushyant Gautam’s appointment as governor of Sikkim over allegations linking him to the 2022 Rishikesh resort murder case.

सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय छात्र संघ ने राष्ट्रपति से दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग की; छात्र संघ की महिला अध्यक्ष ने विश्वविद्यालयों की सुरक्षा और संवैधानिक पदों की गरिमा का मुद्दा उठाया

 

गंगटोक/देहरादून, 17 अक्टूबर। उत्तराखंड की अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े अनुत्तरित सवाल अब सिक्किम में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर नियुक्ति का विरोध करते हुए सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। छात्र संगठन ने कहा है कि जब तक अंकिता हत्याकांड में कथित अति विशिष्ट व्यक्ति (वीआईपी) की भूमिका से संबंधित आरोपों की निष्पक्ष जांच और स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस नियुक्ति की समीक्षा की जानी चाहिए।

इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आपत्ति केवल उत्तराखंड के राजनीतिक दलों या अंकिता के परिजनों तक सीमित नहीं रही। सिक्किम के विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विधि विशेषज्ञों ने भी संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास का प्रश्न उठाया है।

सिक्किम विश्वविद्यालय छात्र संघ (एसयूएसए) की ओर से 15 अक्टूबर को जारी बयान पर संगठन की अध्यक्ष देब्या कार्की और संयुक्त सचिव के हस्ताक्षर होने की जानकारी पूर्वोत्तर के समाचार माध्यम हब नेटवर्क ने दी है। संगठन ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि गौतम के विरुद्ध लगाए गए आरोप किसी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुए हैं और उन्हें दोषी मानना उचित नहीं होगा। इसके बावजूद उसका कहना है कि सार्वजनिक जीवन में गंभीर आरोपों से जुड़े अनुत्तरित सवालों का निष्पक्ष समाधान आवश्यक है।

Debya Karki, the first woman president of Students’ Association of Sikkim Central University.

छात्र संघ की अध्यक्ष देब्या कार्की, जिन्हें विश्वविद्यालय छात्र संगठन की पहली महिला अध्यक्ष बताया गया है, ने इस विवाद को महिला विद्यार्थियों की सुरक्षा और विश्वविद्यालयों के प्रति विश्वास से भी जोड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सुरक्षित स्थान होने चाहिए और एक महिला के रूप में वह ऐसे व्यक्ति की विश्वविद्यालय से जुड़ी संवैधानिक भूमिका को लेकर असहज महसूस करेंगी, जिसका नाम गंभीर विवादों में आ रहा हो। उन्होंने यह भी बताया कि केवल विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि सिक्किम के नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस नियुक्ति पर सवाल उठा रहे हैं।

छात्र संगठन ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में उन कथित ध्वनि अभिलेखों का भी उल्लेख किया है, जिनमें पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से जुड़ी रही उर्मिला सनावर द्वारा दुष्यंत गौतम का नाम अंकिता हत्याकांड के कथित वीआईपी के रूप में लिए जाने की बात सामने आई थी। संगठन ने यह स्वीकार किया है कि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। गौतम ने आरोपों को निराधार बताते हुए उनका खंडन किया है और मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है।

छात्र संघ ने अंकिता के परिजनों की ओर से कथित वीआईपी की पहचान और संबंधित कॉल विवरण उपलब्ध कराने को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए जांच में पारदर्शिता की मांग की है। उसका कहना है कि संवैधानिक पदों पर नियुक्त व्यक्तियों की सार्वजनिक पृष्ठभूमि को लेकर उठने वाले गंभीर प्रश्नों का समाधान लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

सिक्किम में छात्र संगठन के अतिरिक्त अन्य स्तरों पर भी विरोध के स्वर सामने आए हैं। गंगटोक से प्रकाशित समाचार माध्यम वॉयस ऑफ सिक्किम के अनुसार, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता एम.बी. कार्की ने भी 15 अक्टूबर को अलग बयान जारी करके गौतम की नियुक्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अंकिता हत्याकांड से जुड़े अनुत्तरित सवालों की पारदर्शी और कानूनसम्मत जांच की मांग की।

इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी 15 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर गौतम की नियुक्ति पर पुनर्विचार का अनुरोध किया। उन्होंने आग्रह किया कि कथित वीआईपी की भूमिका से संबंधित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच पूरी होने तक गौतम को पदभार ग्रहण नहीं कराया जाए। अंकिता के माता-पिता ने भी नियुक्ति वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर भाजपा ने नियुक्ति का बचाव करते हुए कांग्रेस पर इस मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2022 में पौड़ी गढ़वाल के वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था। मामले में तीन आरोपियों को हत्या के अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है, लेकिन कथित वीआईपी की पहचान को लेकर उठे सवाल अलग विवाद बने हुए हैं। इन्हीं सवालों की जांच को लेकर अब फिर से सार्वजनिक दबाव बढ़ रहा है।

इस विवाद का एक संवैधानिक पहलू भी है। सिक्किम के राज्यपाल का केंद्रीय विश्वविद्यालय से रेक्टर के रूप में संबंध बताया गया है। हालांकि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की भूमिका राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति की भूमिका से भिन्न होती है। इसी संदर्भ में छात्र संगठन की अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय परिसर की गरिमा और विद्यार्थियों के विश्वास का प्रश्न उठाया है।

गौतम को 12 अक्टूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। महज तीन दिनों के भीतर छात्र संगठन और सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से आपत्तियां सामने आना इस बात का संकेत है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवाल उत्तराखंड की सीमाओं से बाहर भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं।

फिलहाल इस विवाद में दो अलग-अलग प्रश्न हैं। पहला, अंकिता हत्याकांड के कथित वीआईपी से संबंधित आरोपों की वास्तविकता और जांच का परिणाम। दूसरा, गंभीर किंतु अप्रमाणित आरोपों के बीच उच्च संवैधानिक पद पर नियुक्ति को लेकर सार्वजनिक विश्वास का प्रश्न। छात्र संगठन ने कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच पर जोर देते हुए इन्हीं दोनों मुद्दों पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपेक्षा की है।

 

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