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कश्मीर को जोड़ना: विकास के लिए बुनियादी ढाँचे का निर्माण

Jammu and Kashmir’s challenging terrain is steadily yielding to a new era of connectivity. The Udhampur–Srinagar–Baramulla Rail Link has connected the valley to India’s rail network. Its centrepiece, the Chenab Bridge, stands as the world’s highest railway arch bridge. Expanded Vande Bharat services are improving passenger mobility. New freight terminals are carrying Kashmiri apples, saffron and handicrafts to national markets, opening opportunities for farmers and businesses. On land, the Sonamarg and Zojila tunnels promise year-round passage into Ladakh. In the air, Srinagar’s expanding airport is complemented by nascent hubs at Udhampur and Kishtwar. Together, these advances are drawing Kashmir’s produce, trade and tourism firmly into the national mainstream.

 

-A PIB FEATURE-

जम्मू-कश्मीर का पर्वतीय भूभाग लंबे अर्से से कनेक्टिविटी से संबंधित बुनियादी ढाँचे के विकास की दिशा में एक बड़ी चुनौती रहा है। हालाँकि, बीते कुछ वर्षों में स्थिति में लगातार बदलाव आया है। बुनियादी ढाँचे में निवेश की एक नई लहर ने इस क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने के तरीकों को नया स्वरूप दिया है। उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना इस विस्तार का प्रमुख हिस्सा है। यह स्वतंत्रता के बाद देश में शुरू की गई सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे परियोजनाओं में से एक है। आज यह भारत की इंजीनियरिंग की उत्कृष्ट उपलब्धियों में से एक के रूप में स्थापित है, जिसने कश्मीर घाटी को रेल मार्ग के माध्यम से देश के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है।

यूएसबीआरएल परियोजना के साथ-साथ सड़कों, सुरंगों और हवाई अड्डों के बुनियादी ढाँचे का भी लगातार विस्तार किया गया है। इस नेटवर्क में अब वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी नई रेल सेवाओं के अतिरिक्त, प्रमुख सड़क गलियारे और सुरंगे भी इसमें शामिल हैं। श्रीनगर में हवाई अड्डे की क्षमता का विस्तार किया जा रहा है, उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास की योजना है, जिससे यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की उम्मीद है। मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल और बेहतर माल ढुलाई सेवाएँ पूरे क्षेत्र में वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बना रही हैं। इन विकास कार्यों ने जम्मू-कश्मीर में हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने वाले बुनियादी ढाँचे का लगातार विस्तार किया है।

रेलवे: कश्मीर को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ना

उधमपुर–श्रीनगर–बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) राष्ट्रीय परियोजना  

यूएसबीआरएल परियोजना का उद्घाटन जून 2025 में किया गया, जिससे हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी से संबंधित बुनियादी ढाँचे में सुधार हुआ। 43,780 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस परियोजना का विस्तार जम्मू-कश्मीर के उधमपुर, रियासी, रामबन, श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम और बारामूला जिलों तक है।

यह परियोजना दुर्गम हिमालयी क्षेत्र से होकर 272 किलोमीटर तक फैली है; इसमें कुल 36 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई 119 किलोमीटर है, और 943 पुल हैं। क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई यह परियोजना दूर-दराज के इलाकों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ती है। इससे आवागमन, व्यापार और पर्यटन के क्षेत्र में नए अवसर खुल रहे हैं। यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत 215 किलोमीटर से अधिक सड़कों (एक सुरंग और 320 पुलों सहित) का निर्माण किया गया है, जो स्थानीय समुदायों के लिए उपयोगी हैं। इसके अतिरिक्त, यूएसबीआरएल परियोजना सुरंगों के भीतर और खुले रेल खंडों में भी पूर्ण विद्युतीकृत है।

यूएसबीआरएल परियोजना ने क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके प्रभाव का एक प्रमुख पहलू रोजगार सृजन रहा है। इस परियोजना के माध्यम से रोजगार के 5 करोड़ से अधिक मानव-दिवसों का सृजन हुआ है।

वंदे भारत एक्‍सप्रेस

 

जम्मू-कश्मीर में वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन पहली बार जून 2025 में कटरा और श्रीनगर के बीच शुरू हुआ। रेल संपर्क को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से, अप्रैल 2026 में श्रीनगर–कटरा वंदे भारत एक्सप्रेस सेवा का विस्तार जम्मू तवी रेलवे स्टेशन तक किया गया।

अब जम्मू से श्रीनगर तक की यात्रा पाँच घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकती है। ट्रेन में डिब्बों की संख्या 8 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है। इन ट्रेनों को विषम मौसमी परिस्थितियों में संचालन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इनमें उन्नत परिचालन प्रणालियाँ और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाए गए हैं, जो अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों की परिस्थितियों के अनुकूल हैं।

इस रेल मार्ग पर बर्फ हटाने वाली एक ट्रेन भी उपलब्‍ध कराई गई है, जो आगे चलकर पटरियों से बर्फ हटाती है और साल भर रेल सेवाओं का संचालन सुनिश्चित करने में मदद करती है। इसके अतिरिक्त, भूकंपीय झटकों को अवशोषित करने के लिए विशेष डैम्पर लगाए गए हैं, जो इस उच्च जोखिम वाले क्षेत्र में यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने में सहायक हैं।

 यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत इंजीनियरिंग के अद्भुत नमूने    

यूएसबीआरएल परियोजना में कई प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियाँ शामिल हैं, जिनमें चिनाब रेल पुल, अंजी खड्ड पुल और T50 सुरंग प्रमुख हैं।

चिनाब रेल पुल

यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे आर्च पुल बनाया गया है। जून 2025 में उद्घाटित चिनाब पुल की लंबाई 1,315 मीटर है। इसके आर्च की लंबाई 467 मीटर है और यह नदी तल से 359 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे एफिल टॉवर से भी ऊँचा बनाती है। इस पुल को तेज़ भूकंपीय झटकों और शक्तिशाली हवाओं का सामना करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पुल से होकर वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से जम्मू – कश्मीर के बीच रेल संपर्क में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

चित्र 2: जम्मू -कश्मीर में चिनाब रेल पुल

 

अंजी खड्ड पुल

चित्र 3: जम्मू -कश्मीर में अंजी खड्ड पुल

अंजी खड्ड पुल भारत का पहला केबल-आधारित रेलवे पुल है, जिसका निर्माण चिनाब नदी की सहायक नदी अंजी नदी की गहरी घाटी के ऊपर किया गया है। अंजी खड्ड पुल यूएसबीआरएल परियोजना का हिस्सा है और इसका उद्घाटन जून 2025 में किया गया था।

यह पुल जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित है। इसे उल्टे ‘Y’ के आकार के 193 मीटर ऊँचे एकल टावर का सहारा दिया गया है, जिससे जुड़े केबल पुल को मजबूती प्रदान करते हैं। इस मुख्य पुल की कुल लंबाई 473.25 मीटर है। इसका डिज़ाइन क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और भूकंपीय चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

 

सुरंग T50

चित्र 4: जम्मू-कश्मीर में सुरंग T50

2024 में उद्घाटित T50 सुरंग जम्मू-कश्मीर में खड़ी और सुंबर को जोड़ने वाली 12.77 किलोमीटर लंबी रेल सुरंग है। यूएसबीआरएल परियोजना के अंतर्गत निर्मित यह भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग है। यह सुरंग कश्मीर घाटी और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक महत्वपूर्ण रेल संपर्क प्रदान करती है।

हिमालय की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से किया गया है। सुरंग के निर्माण के दौरान अत्यधिक जल रिसाव, भूस्खलन, भ्रंश क्षेत्रों और दरारयुक्त ज्वालामुखीय चट्टानों जैसी चुनौतियों का सामना किया गया। इस सुरंग में एक मुख्य सुरंग के साथ-साथ एक समानांतर आपातकालीन निकास सुरंग भी बनाई गई है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन दोनों सुरंगों को प्रत्येक 375 मीटर की दूरी पर आपस में जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक 50 मीटर पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी सहायता से केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से सुरंग की निगरानी की जाती है ।

रेलवे के लिए सहायक बुनियादी ढाँचा

जम्मू-कश्मीर में रेल संपर्क को मजबूत बनाने के लिए सहायक बुनियादी ढाँचे और रेल नेटवर्क के विकास में निवेश बढ़ाया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर के लिए रेलवे का औसत वार्षिक बजट वर्ष 2009–14 के दौरान 1,044 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026–27 में 1,086 करोड़ रुपये हो गया है।

विद्युतीकरण  

भारतीय रेलवे ने रेल विद्युतीकरण का कार्य मिशन मोड में आगे बढ़ाया है, जिसके तहत अब देश के लगभग 99.6% ब्रॉड गेज (बीजी) रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण किया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर में मौजूदा संपूर्ण ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क विद्युतीकृत है। सभी नई रेल लाइनों और मल्टी–ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़ी परियोजनाओं को शुरुआत से ही विद्युतीकरण की व्यवस्था के साथ मंजूरी दी जा रही है और उनका निर्माण भी इसी प्रावधान के तहत किया जा रहा है।

रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास

अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत भारतीय रेलवे के 1,340 स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें चार स्टेशन जम्मू-कश्मीर में हैं। ये स्टेशन हैं—बडगाम, जम्मू तवी, शहीद कैप्टन तुषार महाजन (उधमपुर) और श्री माता वैष्णो देवी कटरा रेलवे स्टेशन।

अन्य क्षेत्रीय रेलवे पहलें

जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रेलवे संपर्क को मजबूत बनाने के लिए कई परियोजनाएँ प्रस्तावित हैं। इनमें निम्नलिखित परियोजनाएँ शामिल हैं:

  1. जालंधर कैंट–जम्मू तवी के बीच तीसरी रेल लाइन — 216 किलोमीटर
  2. जम्मू और श्री माता वैष्णो देवी कटरा के बीच अतिरिक्त रेल लाइन — 78 किलोमीटर
  3. जम्मू/रियासी और पुंछ के बीच नई रेलवे लाइन — 190 किलोमीटर

 

सड़कें: सड़क संपर्क को सुदृढ़ बनाना

रेल संपर्क के पूरक के रूप में सड़कें

जम्मू-कश्मीर में रेलवे बुनियादी ढाँचे के साथ-साथ सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। रेलवे नेटवर्क से बाहर के क्षेत्रों तक अंतिम छोर तक संपर्क सुनिश्चित करने में सड़कें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई–IV) के अंतर्गत अगस्त 2026 में 598.455 किलोमीटर लंबाई की 110 सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई। 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली इन परियोजनाओं से उधमपुर–कठुआ–डोडा–किश्तवाड़ क्षेत्र में 46,972 लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इन परियोजनाओं के अंतर्गत सड़क निर्माण के कई पैकेजों में अपशिष्ट प्लास्टिक के उपयोग का भी प्रावधान किया गया है, जिससे अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण में सहायता मिलती है।

हिमालयी क्षेत्र में सुरंगों का निर्माण भी विकास का एक प्रमुख घटक बन गया है, ताकि हर मौसम में निर्बाध आवागमन सुनिश्चित हो सके, सड़क सुरक्षा में सुधार हो सके और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक आवागमन की क्षमता बढ़ सके।

 सोनमर्ग (ज़ेड-मोड़) सुरंग

चित्र  5: सोनमर्ग सुरंग, जम्‍मू-कश्‍मीर

सोनमर्ग सुरंग परियोजना, जिसे ज़ेड-मोड़ सुरंग के नाम से भी जाना जाता है, का उद्घाटन जनवरी 2025 में किया गया था। यह 6.4 किलोमीटर लंबी द्विदिशीय सुरंग है, जिसके साथ 6.4 किलोमीटर लंबी समानांतर आपातकालीन निकास सुरंग और 5.5 किलोमीटर लंबी पहुँच सड़क भी है। 2,700 करोड़ रुपये  से अधिक की लागत से निर्मित यह सुरंग समुद्र तल से 2,634 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। यह श्रीनगर से सोनमर्ग होते हुए लेह तक हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराती है। इसके निर्माण से सड़क के उन हिस्सों को बाईपास करना संभव हुआ है, जो बड़े हिमस्खलनों और भूस्खलनों से प्रभावित होते हैं। यह सुरंग सोनमर्ग को साल भर पर्यटकों के लिए सुलभ बनाकर शीतकालीन पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देती है। ज़ोजिला सुरंग के साथ मिलकर यह परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग-1 के संबंधित खंड की लंबाई 13 किलोमीटर से घटाकर 11.98 किलोमीटर करने में सहायक होगी।

ज़ोजिला सुरंग

ज़ोजिला सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बालटाल और मीनामर्ग के बीच निर्मित की जा रही 13.153 किलोमीटर लंबी द्विदिशीय सुरंग है। इसका एनएचआईडीसीएल द्वारा किया जा रहा है। समुद्र तल से 2,900 से 3,310 मीटर की ऊँचाई पर स्थित 6,808 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच साल भर हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क सुनिश्चित करना है। इस परियोजना का निर्माण अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था और जून 2026 में मुख्य सुरंग की खुदाई दोनों छोरों से आगे बढ़ते हुए आपस में जुड़ने के चरण तक पहुँच गई।

 

चित्र  6: ज़ोजिला सुरंग, जम्‍मू-कश्‍मीर

इस सुरंग में आधुनिक वेंटिलेशन प्रणाली, ऑटोमेटिक फायर डिटेक्‍शन सिस्‍टम, सीसीटीवी निगरानी, वेरिएबल मैसेज साइन (वीएमएस) सिस्‍टम, एससीएडीए सिस्‍टम तथा अन्य उन्नत सुरक्षा और यातायात प्रबंधन प्रणालियाँ स्थापित की जाएँगी। इस परियोजना में 4.8 किलोमीटर लंबाई वाली दो जुड़वाँ एकदिशीय नीलग्रार सुरंगें, कुल 2.350 किलोमीटर लंबाई वाले आठ कट-एंड-कवर खंड, कुल 810 मीटर लंबाई के चार पुल और 40 पुलियाएँ भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 16.964 किलोमीटर लंबी पहुँच सड़क के किनारे हिमस्खलन से सुरक्षा के लिए हिम सुरंगें, कैच डैम, डिफ्लेक्टर डैम, एयर-ब्‍लास्‍ट वॉल्‍स तथा अन्य सुरक्षात्मक संरचनाएँ बनाई जा रही हैं।

इस परियोजना के पूरा होने पर सोनमर्ग से मीनामर्ग के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर करीब 30 मिनट रह जाने की उम्मीद है। यह परियोजना दुर्गम ज़ोजिला दर्रे पर दुर्घटनाओं और आवागमन में बाधा के जोखिम को भी कम करेगी, क्योंकि सर्दियों के महीनों में इस दर्रे पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा बना रहता है। इस सुरंग से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा तथा दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी। साल भर निर्बाध सड़क संपर्क से रक्षा रसद और सामरिक तैयारियों को मजबूती मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह परियोजना रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक होगी।

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग (पूर्व में चेनानी–नाशरी सुरंग के नाम से प्रसिद्ध)

2017 में शुरू की गई 9 किलोमीटर लंबी यह सुरंग भारत की सबसे लंबी परिचालनाधीन राजमार्ग सुरंगों में से एक है और एशिया की सबसे लंबी द्विदिशीय सुरंगों में गिनी जाती है। यह जम्मू-कश्मीर में उधमपुर को रामबन से जोड़ती है। 2,500 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह सुरंग यात्रा की दूरी को 31 किलोमीटर कम करती है और यात्रा के समय में दो घंटे की बचत करती है, जिससे ईंधन की लागत भी कम होती है।

राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार

  • दिल्ली–अमृतसर–कटरा एक्सप्रेसवे: यह 667 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड राजमार्ग है, जो दिल्ली को अमृतसर और कटरा से जोड़ता है। इसे तेज़ सड़क संपर्क उपलब्ध कराने, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात का दबाव कम करने और श्री माता वैष्णो देवी मंदिर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुँच को सुगम बनाने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। जुलाई 2026 में इस एक्सप्रेसवे के प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया गया, जो दिल्ली और कटरा के बीच संपर्क बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके पूर्ण हो चुके खंडों से दिल्ली से कटरा तक की यात्रा का समय लगभग 14 घंटे से घटकर करीब 6 घंटे होने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर तीर्थयात्रियों के आवागमन को सुगम बनाने के साथ-साथ मार्ग के आसपास औद्योगिक गतिविधियों और माल ढुलाई एवं लॉजिस्टिक्स को भी बढ़ावा देगा।
  • रफ़ियाबाद–कुपवाड़ा सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग -701): अंतिम छोर तक विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जून 2025 में राष्ट्रीय राजमार्ग-701 के रफ़ियाबाद–कुपवाड़ा खंड के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की परियोजना की आधारशिला रखी गई। यह परियोजना प्रोजेक्ट बीकन के अंतर्गत रफ़ियाबाद–कुपवाड़ा–चौकीबल–तंगधार–चमकोट कॉरिडोर का हिस्सा है।
  • शोपियां बाईपास (राष्ट्रीय राजमार्ग -444): मार्च 2024 में 224.44 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत 8.925 किलोमीटर लंबे शोपियां बाईपास की आधारशिला जून 2025 में रखी गई। इस बाईपास से शोपियां, पुलवामा और कुलगाम के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा तथा कृषि उत्पादों के तेज़ और सुगम परिवहन में मदद मिलेगी।

हवाई अड्डे: हवाई संपर्क का विस्तार

श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विस्तार

श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सिविल एन्क्लेव के विस्तार के लिए फरवरी 2026 में 1,677 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई। इस हवाई अड्डे का संचालन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण द्वारा भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के बडगाम एयरबेस परिसर के भीतर किया जाता है। इस परियोजना से कश्मीर घाटी में हवाई संपर्क को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

73.18 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना के अंतर्गत 71,500 वर्ग मीटर क्षेत्रफल वाला एक नया टर्मिनल भवन शामिल है। यह टर्मिनल व्यस्ततम समय के दौरान 2,900 यात्रियों और प्रतिवर्ष 10 मिलियन  यात्रियों को हैंडल करने की क्षमता रखेगा। हवाई अड्डे पर विमानों की पार्किंग के लिए 15 पार्किंग बे बनाए जाएंगे, जिनमें एक बड़े आकार के विमान के लिए भी जगह शामिल होगी। हवाई अड्डे के मौजूदा 3,658 मीटर लंबे रनवे का संचालन भारतीय वायु सेना के पास ही रहेगा। इसके अतिरिक्त, 1,000 कारों की पार्किंग क्षमता वाली एक नई बहुस्तरीय पार्किंग सुविधा का निर्माण किया जाएगा। परियोजना में सुरक्षा कर्मियों के लिए बैरकों का निर्माण भी शामिल है।

नया टर्मिनल भवन आधुनिक हवाई अड्डा सुविधाओं के साथ स्थानीय लकड़ी की नक्काशी और पारंपरिक शिल्पकला सहित कश्मीर की पारंपरिक वास्तुकला के तत्वों का समन्वय करेगा। इस परियोजना में टिकाऊपन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके अंतर्गत वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक रोशनी के अधिकतम उपयोग और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पर्यावरण-अनुकूल निर्माण सामग्री के इस्तेमाल की व्यवस्था की गई है। इस परियोजना का लक्ष्य टिकाऊ भवन निर्माण की प्रथाओं के लिए एकीकृत आवास मूल्यांकन के अंतर्गत 5-स्टार ग्रीन रेटिंग (गृह)  प्राप्त करना है।

क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार

सरकार जम्मू-कश्मीर के निवासियों के लिए क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार करने तथा किफायती और सुरक्षित यात्रा विकल्प उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • उधमपुर और किश्तवाड़, दोनों क्षेत्र दर्शाते हैं कि क्षेत्रीय विमानन सेवाओं के माध्यम से प्रमुख शहरी केंद्रों से दूर स्थित इलाकों तक पहुँच बढ़ाई जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का विस्तार करने के लिए उड़ान योजना के अंतर्गत इन दोनों हवाई अड्डों के विकास की योजना बनाई गई है। हवाई अड्डों की क्षमता में वृद्धि से पर्यटन को बढ़ावा मिलने, रोजगार के अवसर सृजित होने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और आर्थिक केंद्र के रूप में श्रीनगर की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।

संपर्क से आर्थिक एकीकरण तक

मल्‍टीमॉडल लॉजिस्टिक्स

अक्टूबर 2021 में आरंभ किए गए पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत रेलवे, सड़क, बंदरगाह, अंतर्देशीय जलमार्ग, हवाई अड्डों और लॉजिस्टिक्स संबंधी बुनियादी ढाँचे को एक भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित एकीकृत नियोजन मंच पर लाया गया। इसमें 44 केंद्रीय मंत्रालयों तथा 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इस ढाँचे के आधार पर दिसंबर 2021 में शुरू की गई गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति निजी निवेश के माध्यम से आधुनिक, रेल संपर्क से जुड़े माल ढुलाई टर्मिनलों के विकास को प्रोत्साहित करती है।

अब तक देश में 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं। वर्ष 2024 में जम्मू-कश्मीर के सांबा में एक गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल चालू किया गया, जो अब पूरी तरह से परिचालन में है। इसके अतिरिक्त, देश में 310 अन्य स्थानों पर जीसीटी विकसित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इनमें से तीन टर्मिनल जम्मू-कश्मीर के कठुआ, अनंतनाग और जम्मू जिलों में प्रस्तावित हैं।

जीसीटी नीति से सीमेंट, इस्पात, बिजली, खनन, कृषि, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों को लाभ हुआ है। इस नीति से भंडारण गोदामों, साइलो, कोल्‍ड स्‍टोरेज  और अन्य मूल्यवर्धित लॉजिस्टिक्स सुविधाओं से युक्त आधुनिक मल्‍टीमॉडल कार्गो टर्मिनलों के विकास को बढ़ावा मिला है। इससे स्थानीय उद्योगों और किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है, रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिला है।

पहुँच से अवसरों तक

कभी मौसमी अलगाव के लिए पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र अब भारत के आर्थिक भूगोल के एक अभिन्न और बेहतर संपर्क से जुड़े हिस्से के रूप में उभर रहा है। रेल, सड़क और हवाई संपर्क से जुड़ी परियोजनाएँ अब अलग-अलग पहल न रहकर एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में कार्य कर रही हैं। इस समन्वित विकास से स्थानीय निवासियों, किसानों, व्यापारियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के दैनिक जीवन में बदलाव आ रहा है। इस विस्तार से किसानों और स्थानीय व्यवसायों की क्षेत्र से बाहर के बाजारों तक पहुँच बढ़ रही है। सेब, सूखे मेवे, पश्मीना शॉल और हस्तशिल्प सहित कश्मीर के विशिष्ट उत्पाद अब बड़े बाजारों में पहुँच रहे हैं, जिससे आर्थिक विविधता को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी विशेषकर सीमावर्ती सुरक्षा और आपदा प्रबंधन एवं राहत कार्यों के संदर्भ में क्षेत्र की सामरिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है ।

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