भारत का पोषक तत्वों से भरपूर बैंगनी आलू
Hidden hunger remains a major nutritional challenge despite adequate calorie intake in many populations. Biofortified crops are being developed to improve the intake of essential vitamins and minerals through daily food consumption. In this context, ICAR-CPRI (Indian Council of Agricultural Research- Central Potato Research Institute) developed nutrient-rich coloured potato varieties, including Kufri neelkanth, Kufri manik, and Kufri jamunia. These varieties contain important antioxidants and micronutrients, such as anthocyanins, iron, and zinc. Among them, Kufri jamunia represents a major advancement due to its higher levels of Vitamin C, anthocyanins, and carotenoids. Its improved nutritional profile, attractive purple flesh, and strong consumer appeal make it an important variety for addressing hidden hunger and improving nutritional security.
–A PIB FEATURE-
पर्याप्त कैलोरी सेवन के बावजूद छिपी भूख एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब लोग पर्याप्त मात्रा में भोजन तो करते हैं, लेकिन उनके आहार में आवश्यक विटामिन और खनिजों की कमी होती है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक बेहतर पोषण मूल्य वाली जैव-संवर्धित फसलों को तेजी से विकसित कर रहे हैं। बायोफोर्टिफिकेशन पादप प्रजनन (प्लांट ब्रीडिंग) के माध्यम से फसलों की पोषक तत्व सामग्री में सुधार करता है, जिससे खाद्य पदार्थ प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्वों के उच्च स्तर प्रदान करने में सक्षम होते हैं। पारंपरिक खाद्य सुदृढ़ीकरण (फूड फोर्टिफिकेशन) के विपरीत-जिसमें प्रसंस्करण के दौरान पोषक तत्व जोड़े जाते हैं-बायोफोर्टिफिकेशन पोषण को सीधे फसल में समाहित करता है। यह आमतौर पर खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में पोषण की गुणवत्ता में सुधार करने का एक स्थायी और किफायती तरीका है। साथ ही, यह दीर्घकालिक पोषण सुरक्षा को भी सुदृढ़ करता है।
बायोफोर्टिफिकेशन अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण परिणाम संवर्धित पोषण मूल्य वाली रंगीन आलू की किस्मों का विकास रहा है। इनमें लाल, बैंगनी और नीले गूदे वाले आलू शामिल हैं। इन आलुओं में एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड जैसे प्राकृतिक पिगमेंट होते हैं, जो इन्हें इनका विशिष्ट रंग प्रदान करते हैं। रंगीन आलू एंटीऑक्सीडेंट तथा आयरन और जिंक जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
ICAR–CPRI द्वारा विकसित पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में
ICAR–CPRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान) ने निम्नलिखित पोषक तत्वों से भरपूर रंगीन आलू की किस्में विकसित की हैं:
- कुफरी नीलकंठ ICAR-CPRI द्वारा विकसित पहली बैंगनी छिलके वाली विशेष आलू की किस्म थी, जिसे 2018 में जारी किया गया था। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में खेती के लिए उपयुक्त है। यह अपने उच्च एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जानी जाती है और सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है।
- कुफरी माणिक को 2021 में जारी किया गया था। यह गोल आकार, मध्यम आंखें और पीले गूदे वाले आकर्षक, गहरे लाल रंग के कंद पैदा करता है। यह किस्म पोषक तत्वों से भरपूर है और इसमें एंथोसायनिन, जिंक तथा आयरन उच्च मात्रा में पाया जाता है।
- कुफरी जामुनिया को आधिकारिक तौर पर 2024 में जारी किया गया था। इस किस्म में कुफरी माणिक और कुफरी नीलकंठ की तुलना में एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी), एंथोसायनिन और कैरोटीनॉयड का स्तर अधिक है। इसका बैंगनी गूदा उच्च एंटीऑक्सीडेंट मात्रा और बेहतर पोषण गुणवत्ता को दर्शाता है। कुफरी जामुनिया में जिंक और आयरन का स्तर भी बढ़ा हुआ है। यह किस्म खाने के लिए उपयुक्त है और अपने अनूठे बैंगनी रंग के कारण विभिन्न खाद्य व्यंजनों में नवीनता लाती है। इसलिए, उपभोक्ताओं के बीच इस किस्म का आकर्षण काफी अधिक देखा गया है।
कुफ़री जामुनिया: पोषण सुरक्षा के लिए एक बायोफोर्टिफाइड बैंगनी आलू
कुफरी जामुनिया मध्यम अवधि में पकने वाली आलू की किस्म है, जिसके पौधे मध्यम ऊंचाई वाले और चंदवा (कैनोपी) अर्ध-सघन होते हैं। इसके कंद बाहर से गहरे बैंगनी छिलके और अंदर से बैंगनी गूदे वाले होते हैं। ये उथली आंखों और भुरभुरी संरचना (मीली टेक्सचर) के साथ आयताकार होते हैं। प्रत्येक पौधा 10–12 मध्यम से बड़े आकार के कंद पैदा करता है।

कुफरी जामुनिया की प्रमुख विशेषताएं:
- अनुशंसित कृषि पद्धतियों के तहत प्रति हेक्टेयर 32-35 टन उत्पादन देती है।
- 90 दिनों की अवधि के स्टेशन परीक्षणों में लगभग 49 टन प्रति हेक्टेयर उपज दर्ज की गई।
- परीक्षणों में विपणन योग्य उपज कुल उत्पादन का लगभग 90% तक पहुंच गई।
- लगभग 6-8 सप्ताह की मध्यम सुप्तावस्था (डोरमेंसी) दर्शाती है, जिसके कारण कंद जल्दी अंकुरित नहीं होते हैं।
- कम सड़न और न्यूनतम वजन घटने के साथ भंडारण की बेहतरीन गुणवत्ता प्रदान करती है।
कुफ़री जामुनिया के प्रमुख पोषक घटक
कुफरी जामुनिया के गूदे में 42.05 मिलीग्राम/100 ग्राम और छिलके में 80.66 मिलीग्राम/100 ग्राम एंथोसायनिन होता है। इसके गूदे में लगभग 42.75 मिलीग्राम/100 ग्राम विटामिन सी भी मौजूद है। इसके गूदे में कैरोटीनॉयड की मात्रा लगभग 161 माइक्रोग्राम/100 ग्राम (ताजा वजन) है। इसके अलावा, इस किस्म के गूदे में लगभग 22.77 पीपीएम जिंक और 32.23 पीपीएम आयरन पाया जाता है। निम्नलिखित तालिका कुफरी जामुनिया के पोषण मूल्य की तुलना पारंपरिक पीले छिलके वाले आलू से करती है:
| पोषक तत्व (प्रति 100 ग्राम) | कुफरी जामुनिया | सामान्य आलू |
| विटामिन सी | 42.75 mg | 23.15 mg |
| जिंक | 2.28 mg | 0.28 mg |
| आयरन | 3.22 mg | 0.57 mg |
कुफ़री जामुनिया के खान-पान संबंधी उपयोग
अपने पोषण संबंधी लाभों के अलावा, कुफरी जामुनिया विभिन्न प्रकार के पाक उपयोगों के लिए उपयुक्त है। यह किस्म अपने आकर्षक बैंगनी रंग, भुरभुरी संरचना और सुखद स्वाद के लिए सराही जाती है। यह इसे पारंपरिक व्यंजनों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों दोनों के लिए उपयुक्त बनाता है। इसका विशिष्ट रंग व्यंजनों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के दृश्य आकर्षण को भी बढ़ाता है।
कुफरी जामुनिया जैसे बैंगनी गूदे वाले आलू का उपयोग कई प्रकार के व्यंजनों में किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- पारंपरिक व्यंजन: सब्जी (करी), पराठा, पूरी और रायता
- नाश्ता और अल्पाहार: दलिया, हलवा, उपमा, डोसा और इडली बैटर
- प्रसंस्कृत उत्पाद: बेकरी उत्पादों, सूप और कुकीज के लिए आलू का आटा
इसके अलावा, इन कंदों को निर्जलित उत्पादों (डीहाइड्रेटेड प्रोडक्ट्स) जैसे एंथोसायनिन युक्त दलिया, सूजी और आटे में प्रसंस्कृत किया जा सकता है, जिनका उपयोग विभिन्न खाद्य सामग्रियों में घटक के रूप में किया जा सकता है।
कुफ़री जामुनिया की खेती के लिए उपयुक्त राज्य
बड़े पैमाने पर अपनाए जाने के लिए किसी फसल की किस्म का विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रदर्शन करना आवश्यक होता है। कुफरी जामुनिया ने विभिन्न स्थानों पर किए गए परीक्षणों में स्थिर प्रदर्शन का प्रदर्शन किया है और इसे उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों में खेती के लिए अनुशंसित किया गया है। यह किस्म उन कई राज्यों के लिए उपयुक्त मानी जाती है जहां व्यापक रूप से आलू उगाया जाता है।

ये क्षेत्र इस किस्म की सफल खेती के लिए अनुकूल जलवायु और मिट्टी की स्थिति प्रदान करते हैं।
कुफ़री जामुनिया की पोषण और कृषि संबंधी संभावनाएं
कुफरी जामुनिया भारत में बायोफोर्टिफाइड आलू की किस्मों के विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। बेहतर पोषण गुणवत्ता के साथ अच्छे कृषि प्रदर्शन को जोड़कर यह किस्म किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ पहुंचाती है। एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रचुरता इसे आहार विविधता में सुधार और छिपी हुई भूख से निपटने के प्रयासों में एक मूल्यवान योगदान बनाती है। अपने आकर्षक रूप, पाक बहुमुखी प्रतिभा और उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों के कई राज्यों के प्रति अनुकूलन क्षमता के साथ, कुफरी जामुनिया भविष्य में व्यापक स्तर पर खेती और उपभोग के लिए अपार संभावनाएं रखती है।

