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कर्फ्यू से बेखबर अब भी मौत बन कर घूम रहे हैँ खूंखार गुलदार, आप खुद ही देख लो

–प्रभुपल  रावत की रिपोर्ट —

रिखणीखाल, 19 अप्रैल। पौड़ी प्रशासन ने लैंसडोन  क्षेत्र के गुलदार प्रभावित 24 गावों में रात्रि का कर्फ्यू  तो लगा दिया मगर ढीठ गुलदारों को क्या फर्क पड़ता है? वे बेखौफ होकर  इंसानों और मवेशियों की तलाश में घूम रहे हैँ।

 

रिखणीखाल के अन्तर्गत द्वारी- भौन सड़क मार्ग ग्राम मेलधार के पास दोपहर में एक साथ तीन गुलदार/ तेंदुए छोटी सी नदी से पानी पीकर सड़क पार करते दिखाई दे रहे हैं।कुछ ही दूरी पर स्थानीय युवकों ने छुपकर इसका वीडियो प्रसारित किया।

ये गुलदार/ तेंदुए ग्राम मेलधार की नदी से पानी पीकर सड़क पार कर रहे थे फिर ये ऊपर ग्राम डला के जंगल की ओर बढ गये।

ऐसा ही एक वाक्या ग्राम नावेतल्ली से जानकारी में आया है कि एक अकेला यक्वा बाघ गाँव के नजदीक ही आ धमका,बामुश्किल गाँव से 300 मीटर दूरी पर था।ग्रामीणो द्वारा शोर मचाने पर जंगल की ओर चले गया।

बाघ ,गुलदार से बचाव के लिए कहा जाता है कि यदि गाँव के पास आग जलाने की व्यवस्था की जाये तो जंगली जानवर आग के जलने से नजदीक नहीं आता।गाँव में रात्रि के समय सोलर पावर लाइट की व्यवस्था हो,जिससे गाँव में उजाला हो,गाँव के पास सूखी मिर्च का धुआं लगाया जाये तो जंगली जानवर नजदीक नहीं फटकता।मिर्च की व्यवस्था वन विभाग से की जा सकती है।

लोगों में दहशत है कि कब बाघ के कब्जे में कोई कब आ जाये।

इसी प्रकार एक दिन पहले ही ग्राम द्वारी में स्थानांतरण पर आये ए एन एम अपने पति के साथ बाइक से नौकरी ज्वाइनिंग करने आ रहे थे,तो बाघ ने उन पर झपटा मारने की कोशिश की,लेकिन असफल रहा।वे बाल बाल बचे।अब तो सरकारी कर्मचारी भी इस क्षेत्र में सेवा देने के लिए कतरा हे हैं।अन्ततः उनको वापस गाडियू पुल लौटना पड़ा।तथा किसी अन्य बन्द वाहन से आना पड़ा।ये इसी द्वारी भौन मार्ग की वारदात है।बाघ की गतिविधियाँ लगातार तेज होती जा रही हैं।वे बेखौफ घूम रहे हैं।

गांवों में मानव जनसंख्या दिन प्रतिदिन घटती जा रही है।एक तो पलायन दूसरा बाघ के डर से भी लोग भयभीत है।बाहर प्रदेशों में नौकरी पेशा वाले भी अब अपने घर आने में कतरा रहे हैं।

आजकल पहाडो में शादी व्याह का सीजन व मेला( कौथिक) का भी सीजन आ रहा है।बाहर प्रदेशों में स्कूली बच्चों की छुट्टियां भी पड़ने जा रही है,वे भी अपने गाँव में आने को घबरा रहे हैं।

इस हालत में पहाङों में रह रहे लोगों का भविष्य क्या होगा? ये भी एक चिन्तन व मनन का विषय है।अब देखे सरकार बाघ से कैसे निपटती है।

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