कर्मभूमि अख़बार की यात्रा ;कैसे पहुँचता था गांव -गांव तक
–कुशल नौटियाल —
नयी पीढ़ी को ये जानकारी होनी चाहिए कि कोटद्वार से गढ़वाल को जो रोडवेज की बसे जाती थीं सभी बसों में कर्मभूमि की कुछ प्रतियाँ भेज दी जाती थीं l आगे लोग पूछते थे कर्मभूमि अखबार लाने वाली बस आ गई l बस के पहुचने का समय याद रखते थे l अखबार लाने वाली बस की भी विशिष्टता थी l
बस आ गयी होगी , धारा रोड से मेरा अखबार ले आना l
अब कर्मभूमि गाँव के स्थानीय बाज़ार में पहुँचता था, लोग चाय भी पीते ,पकौड़ी खाते और अखबार में छपी ख़बरों पर चर्चा होती l
ये चर्चा रुकती थी जब लोग कहने लगते थे जो अखबार में लिखा है BBC रेडियो समाचार में सुन लेना l
कर्म भूमि का सफर अब आगे गाँवों की ओर बढ़ता था l
लोग आवाज लगाते थे, कर्मभूमि पढ़ लो मै सुबह कर्मभूमि लेने आऊंगा l
फिर गाँव मे ये पता लगाया जाता था किसके पास कर्मभूमि है lहालात ये थे कि लोग अपना खाना, नास्ता नहीं करते थे और इस प्रकार सारे गांव में कर्मभूमि घर – घर जाता था l लोगों को इतनी उत्सुकता रहती थीं 3 साल पुराना कर्मभूमि किसी सम्मानित बुजुर्ग के घर में सुरक्षित मिलेगा l
कर्म भूमि इस प्रकार दूर दराज के गाँव तक पहुंचता था l अगर किताबों में विद्यार्थियों को जिल्द लगानी होती थीं तो तारीख देखकर अखबार दिया जाता था l
गाँव के जिस परिवार में कर्मभूमि संग्रहीत होता था उसको विशेष सम्मान और प्रतिष्ठित परिवार जाना जाता था l
“””कर्मभूमि एक प्रतिष्ठा “”
