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निठारी कांड में मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंदर कोली इलाहाबाद हाई कोर्ट से बरी 

इलाहबाद, 16 अक्टूबर ।   इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साल 2006 के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोप में जेल में बंद मोनिंदर सिंह पंढेर और उनके घर में काम करने वाले सुरेंदर कोली को सबूतों के अभाव में सोमवार को बरी कर दिया.

पुलिस के मुताबिक कम से कम 19 युवा महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था, उनकी हत्या कर दी गई थी और उनके शवों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे. पुलिस ने उस समय कहा था कि ये हत्याएं पंढेर के घर के अंदर हुई थीं, जहां कोली नौकर के तौर पर काम करते थे.

सुरिंदर कोली और उनके कारोबारी मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को बलात्कार और कत्ल के मामलों में साल 2009 में सज़ा हुई थी. पंढेर के खिलाफ निठारी कांड में कुल 6 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से तीन मामलों में वह सीबीआई की ट्रायल कोर्ट से बरी हो गया था और एक मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही बरी कर दिया था. अब बाकी बचे दो केस में उसको आज राहत मिल गई. 6 में से तीन मामलों में पंढेर को दोषी ठहराया गया था. कुल 19 मामलों में से 16 केस सुरेंद्र कोली पर दर्ज हुए थे. सीबीआई की चार्जशीट में 16 मामलों में सुरेंद्र कोली का नाम दर्ज था, लेकिन 3 केस सबूतों के अभाव में रद्द कर दिए गए और 13 मामलों में उसे दोषी ठहराया गया था. अब 12 मामलों में उसको बरी कर दिया गया है.

इस मामले से पर्दा तब उठा था जब नोएडा के निठारी में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे से कुछ कंकाल मिले थे. उस समय मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के सामने से गुज़रने वाले सीवर में शरीर के कुछ अंग और बच्चों के कपड़े मिले थे.

पुलिस ने आरोप लगाया कि जिन बच्चों के अवशेष बैग में छिपे हुए पाए गए थे, उन्हें कोली ने मिठाई और चॉकलेट देकर लालच देकर मार डाला था.

मोनिंदर सिंह पंढेर नोएडा के सेक्टर-3 के निठारी में स्थित डी-5 बंगले का मालिक है और सुरेंद्र कोली उसका नौकर था. मोनिंदर के बंगले के पीछे से 19 महिलाओं और बच्चों के कंकाल मिले थे, जिसके बाद जांच में मोनिंदर और सुरेंद्र को साल 2006 में गिरफ्तार कर लिया गया था. 13 फरवरी, 2009 को विशेष अदालत ने मोनिंदर और कोली को एक किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी.

सुरेंद्र उत्तराखंड के अल्मोड़ा का रहने वाला है और साल 2000 में वह उत्तराखंड से दिल्ली आ गया. यहां एक ब्रिगेडियर के घर पर वह खाना बनाया करता था. इसके बाद साल 2003 में मोनिंदर सिंह पंढेर से उसका संपर्क हुआ और वह उसके घर पर काम करने लगा. जब 2004 में पंढेर की फैमली पंजाब चली गई तो अब घर में कोली और मोनिंदर ही रह गए. मोनिंदर के घर पर कॉर्लगर्ल्स आया करती थीं और इस दौरान कोली दरवाजे पर नजर रखता था. उस पर आरोप है कि वह वहां से गुजरने वाले बच्चों को पकड़कर उनके साथ गलत हरकतें करता था और उनको जान से मार देता था. यह मामला उस वक्त सामने आया, जब साल 2006 में एक गुमशुदा युवती की तलाश शुरू हुई. साल 2006 में मोनिंदर पंढेर ने नौकरी के बहाने निठारी की एक युवती को अपने घर बुलाया. जब युवती घर नहीं पहुंची तो घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की और नोएडा के सेक्टर-20 थाने में बेटी की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद पुलिस को मोनिंदर की कोठी के पीछे नाले में 19 कंकाल मिले, जो महिलाओं और बच्चों के थे. इस खबर ने पूरे देश में सनसनी मचा दी थी. इस मामले में एक और बात सामने आई थी कि मोनिंदर के घर से मानव अंगों का व्यापार किया जाता था और ये अंग विदेशों में भेजे जाते थे.

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