प्रधानमंत्री ने गगनयान मिशन की तैयारियों की समीक्षा की
- Indian Space Station to be set up by 2035
- India to send Man to Moon by 2040
- India to undertake missions to Venus and Mars

Gaganyaan project envisages a demonstration of human spaceflight capability by launching a crew of 3 members to an orbit of 400 km for a 3-day mission and bringing them back safely to earth, by landing in Indian sea waters. The project is accomplished through an optimal strategy by considering in-house expertise, experience of Indian industry, intellectual capabilities of Indian academia & research institutions along cutting-edge technologies available with international agencies. The pre-requisites for the Gaganyaan mission include the development of many critical technologies including a human-rated launch vehicle for carrying the crew safely to space, a Life Support System to provide an earth-like environment to the crew in space, crew emergency escape provision and evolving crew management aspects for training, recovery, and rehabilitation of crew.
-By Usha Rawat
नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के गगनयान मिशन की प्रगति का आकलन करने और अंतरिक्ष अन्वेषण के भारत के प्रयासों के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने से संबंधित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
अंतरिक्ष विभाग ने ह्यूमन-रेटेड लॉन्च व्हीकल और सिस्टम क्वालिफिकेशन जैसी अब तक विकसित की जा चुकी विभिन्न प्रौद्योगिकियों सहित गगनयान मिशन का व्यापक विवरण प्रस्तुत किया। इस बात पर गौर किया गया कि ह्यूमन रेटेड लॉन्च व्हीकल (एचएलवीएम3) के 3 अनक्रूड मिशनों सहित लगभग 20 प्रमुख परीक्षणों की योजना बनाई गई है। क्रू एस्केप सिस्टम टेस्ट व्हीकल की पहली प्रदर्शन उड़ान 21 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। बैठक में 2025 में मिशन के लॉन्च की पुष्टि करते हुए इसकी तैयारी का मूल्यांकन किया गया।
हाल के चंद्रयान-3 और आदित्य एल1 मिशन सहित भारत की अंतरिक्ष संबंधी पहलों की सफलता के आधार पर प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि भारत को अब 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ की स्थापना और 2040 तक चंद्रमा पर पहला भारतीय भेजने सहित नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।
गगनयान परियोजना में 3 सदस्यों के चालक दल को 3 दिनों के मिशन के लिए 400 कि.मी. की कक्षा में प्रक्षेपित करके और उन्हें भारतीय समुद्री जल में उतारकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता के प्रदर्शन की परिकल्पना की गई है।
परियोजना को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के पास उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीकों के साथ-साथ आंतरिक विशेषज्ञता, भारतीय उद्योग के अनुभव, भारतीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की बौद्धिक क्षमताओं को ध्यान में रखते एक इष्टतम रणनीति के माध्यम से पूरा किया जाना है। गगनयान मिशन के लिए पूर्व-आवश्यकताओं में कई महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास शामिल है, जिसमें मानव अनुकूल प्रमोचन यान, अंतरिक्ष में चालक दल को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए, अंतरिक्ष में चालक दल को पृथ्वी जैसा वातावरण प्रदान करने के लिए जीवन समर्थन प्रणाली, चालक दल के आपातकालीन निकास का प्रावधान और प्रशिक्षण, चालक दल की वापसी और पुनर्वास के लिए चालक दल के प्रबंधन पहलुओं को विकसित करना शामिल है।
वास्तविक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को अमल में लाने से पहले प्रौद्योगिकी की तैयारी के स्तर को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न पूर्ववर्ती मिशनों की योजना बनाई गई है। इन प्रदर्शनकारी मिशनों में एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (आई.ए.डी.टी.), पैड एबॉर्ट परीक्षण (पी.ए.टी.) और परीक्षण यान (टी.वी.) उड़ानें शामिल हैं। मानवयुक्त मिशन से पहले मानव रहित मिशनों में सभी प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता को सिद्ध किया जाएगा।
