इसरो ने फिर रचा इतिहास, अब गगनयान का किया सफल परीक्षण
By Usha Rawat
इसरो ने फिर इतहास रचते हुए गगनयान का सफल परीक्षण कर लिया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से गगनयान के क्रू मॉड्यूल एस्केप सिस्टम का लाइव परीक्षण किया गया. यह उन 20 बड़े परीक्षणों में से पहला परीक्षण है, जिनको आने वाले समय में इसरो ने करने की योजना बनाई है.
मिशन गगनयान के पहले चरण का उड़ान परीक्षण आज सफलतापूर्वक हो गया है. दूसरी बार में इसका लॉन्च पूरा हो सका. इसको सुबह 8:45 बजे प्रक्षेपण से कुछ समय पहले रोक दिया गया. तकनीकी खामी की वजह से परीक्षण उस समय नहीं हो सका था. उड़ान के लिए काउंटडाउन लगभग पूरा होने को था लेकिन पांच सेकेंड पहले ही इसे होल्ड कर दिया गया था.
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से शनिवार सुबह 10 बजे गगनयान के क्रू मॉड्यूल एस्केप सिस्टम का लाइव परीक्षण हुआ. यह उन 20 बड़े परीक्षणों में से पहला परीक्षण था, जिनको आने वाले समय में इसरो ने पूरा करने की योजना बनाई है.
गगनयान परियोजना में 3 सदस्यों के चालक दल को 3 दिनों के मिशन के लिए 400 कि.मी. की कक्षा में प्रक्षेपित करके और उन्हें भारतीय समुद्री जल में उतारकर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाकर मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता के प्रदर्शन की परिकल्पना की गई है।
परियोजना को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के पास उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीकों के साथ-साथ आंतरिक विशेषज्ञता, भारतीय उद्योग के अनुभव, भारतीय शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों की बौद्धिक क्षमताओं को ध्यान में रखते एक इष्टतम रणनीति के माध्यम से पूरा किया जाना है। गगनयान मिशन के लिए पूर्व-आवश्यकताओं में कई महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास शामिल है, जिसमें मानव अनुकूल प्रमोचन यान, अंतरिक्ष में चालक दल को सुरक्षित रूप से ले जाने के लिए, अंतरिक्ष में चालक दल को पृथ्वी जैसा वातावरण प्रदान करने के लिए जीवन समर्थन प्रणाली, चालक दल के आपातकालीन निकास का प्रावधान और प्रशिक्षण, चालक दल की वापसी और पुनर्वास के लिए चालक दल के प्रबंधन पहलुओं को विकसित करना शामिल है।
वास्तविक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन को अमल में लाने से पहले प्रौद्योगिकी की तैयारी के स्तर को प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न पूर्ववर्ती मिशनों की योजना बनाई गई है। इन प्रदर्शनकारी मिशनों में एकीकृत एयर ड्रॉप परीक्षण (आई.ए.डी.टी.), पैड एबॉर्ट परीक्षण (पी.ए.टी.) और परीक्षण यान (टी.वी.) उड़ानें शामिल हैं। मानवयुक्त मिशन से पहले मानव रहित मिशनों में सभी प्रणालियों की सुरक्षा और विश्वसनीयता को सिद्ध किया जाएगा।
