श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच लाटू धाम वाण के कपाट हुए बंद
-रिपोर्ट हरेंद्र बिष्ट-
थराली/देवाल, 27 नवंबर। प्रसिद्ध लाटू धाम वांण के कपाट आज जय नंदा भगवती,लाटू देवता की जय के जोरदार उदघोष के साथ बैसाख पूर्णमासी तक के लिए बंद हो गये हैं। कपाट बंदी के समय वांण गांव के अलावा आसपास के गांव के नंदा एवं लाटू भक्त भारी संख्या में मौजूद थे।

विकास खंड देवाल के वांण गांव में सोमवार को तय समया अनुसार दोपहर 1 बज कर 5 मिनट पर विधि-विधान के साथ कपाट बंद कर दिए गए हैं। कपाट को बंद करने की प्रक्रिया के तहत प्रातः 9 बजे से लाटूधाम के मुख्य पुजारी खिम सिंह बिष्ट के नेतृत्व में मंदिर में धूपबत्ती कर प्रसाद चढ़ाया गया।
इसके बाद विधि-विधान के साथ नंदा देवी एवं लाटू देवता की पूजा अर्चना की इसके बाद नंदा देवी व लाटू देवता के जोरदार उदघोष, शंखनाद, एवं घंटियों की घनघनाहट के बीच मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। इस मौके पर मंदिर समिति अध्यक्ष कृष्णा सिंह, ग्राम सचिव खिलाप सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य कृष्णा बिष्ट, देवाल की पूर्व ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट,लोहाजंग व्यापार संघ अध्यक्ष हीरा सिंह बुग्याली, पूर्व छात्र नेता महावीर बिष्ट,ग्राम प्रधान पुष्पा देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य रामेश्वरी देवी, महिला मंगल दल अध्यक्ष नंदी देवी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हीरा सिंह पहाड़ी,एतवार सिंह हुक्म सिंह पूर्व डिप्टी रेंजर त्रिलोक सिंह बिष्ट,दिवान सिंह,भगवत सिंह,पाल सिंह,मदन बिष्ट ने कपाट बंद होने की प्रक्रिया में अपनी अहम भूमिका निभाई।
इस मौके पर वांण गांव सहित तमाम नंदा एवं लाटू भक्त मौजूद रहे।अब लाटूधाम के कपाट अगले साल बैसाख पूर्णमासी के लिए फिर से लाटू भक्तों के लिए खोले जाएंगे।
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कौन है लाटू देवता ? आज तक भी यह बात रहस्यमयी बनी हुई हैं। 12 वर्षों में आयोजित होने वाली श्री नंदादेवी राजजात यात्रा एवं प्रति वर्ष भादों मास में आयोजित होने वाली नंदा लोकजात यात्रा के मुख्य अगवा लाटू देवता ही होते हैं । कुछ लोक कथाओं के अनुसार लाटू देवता को कन्नौज का ब्राह्मण माना जाता हैं। जबकि कुछ लोक कथाओं के अनुसार लाटू को नंदा देवी का मुंह बोला भाई एवं कुछ में उन्हें नंदा देवी का सब से बड़ा एवं शक्तिशाली भक्त माना जाता है। वांण में उनका प्रसिद्ध मंदिर के पीछे भी कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं। चमोली जिले के साथ ही बागेश्वर जिले एक बड़े हिस्से के अलावा उत्तराखंड के अन्य जिलों में भी लाटू देवता को पूजा जाता हैं।
